Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

आन्दोलन व संघर्ष के वगैर किसानों का कोई भविष्य नहीं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 30, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

आन्दोलन व संघर्ष के वगैर किसानों का कोई भविष्य नहीं

Ram Chandra Shuklaराम चन्द्र शुक्ल

गोलमोल बातों से किसानों की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आने वाला है. कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन की संस्तुतियां बिना लागू हुए पड़ी हैं. किसान आयोग का गठन भी लंबित है. पिछड़ा वर्ग आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, महिला आयोग, अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग व मानवाधिकार आयोग, सूचना का अधिकार आयोग जैसे जनता को जाति, धर्म व लिंग के आधार पर विभाजित करने वाले तमाम आयोग बने हुए हैं, पर किसानों के लिए आयोग गठित करने का विभिन्न दल वादा तो करते हैं पर वास्तव में करते कुछ नहीं.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

इसका सबसे बड़ा कारण है कि देश के किसान संगठित नही हैं. किसान जब तक मेहनतकशों से एकता कायम कर अपने वाजिब हकों के लिए आन्दोलन व संघर्ष नहीं करेंगे तब तक उनके जीवन की स्थितियों में कोई बदलाव नहीं आने वाला है. मैं पिछले चार साल से कृषि विभाग उत्तर प्रदेश, सचिवालय में अंडर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हूं. आप जो बता रहे हैं उन सरकारी टोटकों से मैं भलीभांति परिचित हूं.

किसान की मूल समस्या है उसके द्वारा उत्पादित वस्तुओं की लागत में बेतहाशा वृद्धि तथा उसकी उपज का लाभकारी मूल्य का न मिलना. यहां तक कि सरकारों द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (मिनिमम सपोर्ट प्राइज) का भी न मिलना. यह कितनी बड़ी विडंबना है कि धरती से मुफ्त में निकाल कर पानी 20/- रुपये  प्रति लीटर बेचा जा रहा है तथा समुद्र से फ्री में निकाला जाने वाला नमक भी 20/- रुपये प्रति किलोग्राम बिकता है, परन्तु 5-6 महीने की मेहनत व मशक्कत तथा बेतहाशा लागत से तैयार धान 20/- रुपये प्रति किलोग्राम भी नहीं बिक पाता है.

2017 के कृषि से जुड़े एक तुलनात्मक आंकड़े रुपेश कुमार ने तैयार किया है, उसे यहां हम प्रस्तुत करते हैं –

  • 2008 में सरकारी टीचर का वेत्तन 30000 रुपये
    2016 में सरकारी टीचर का वेतन 50000 रुपये
  • 2008 में किसान के गेहूं की कीमत 1300 रुपये
    2016 में किसान के गेहूं की कीमत 1500 रुपये
  • 2008 में कपास का कीमत 3500 रुपये
    2016 में  कपास का कीमत 4500 रुपये
  • 2008 में मक्का की कीमत 1000 रुपये
    2016 में मक्का की कीमत 1200 रुपये
  • 2008 में ज्वर की कीमत 1200 रुपये
    2016 में ज्वर की कीमत 1400 रुपये
  • 2008 में विधायक का वेतन 60000 रुपये
    2016 में विधायक का वेतन 125000 रुपये

दूसरी ओर कीटनाशकों व उर्वरक के दाम दुगुने हो गये –

  • 2008 में डीएपी की कीमत 450 रुपये
    2016 में डीएपी की कीमत 1250 रुपये
  • 2008 में पोटाश की कीमत 400 रुपये
    2016 में पोटाश की कीमत 900 रूपये
  • 2008 में सुपर की कीमत 150 रुपये
    2016 में सुपर की कीमत 300 रुपये

और सरकार कहती है किसानों की आय डबल करेंगे ? आय डबल केवल सरकारी कर्मचारियों की, नेताओं की और व्यापरियों की करो, किसानों की तो ऐसे ही डबल हो जायेगी. और मजे की बात. सरकार किसानों के लिए कृषि मेला, कृषि रथ, किसान कल्याण जैसी योजनायें चलाती है, जिसमें करोडों रुपये बर्बाद करती है.

कुछ महीनों पहले कृषि महोत्सव का आयोजन हुआ था जिसमें सरकार ने 450 करोड़ रुपये खर्च किये थे, एक भी किसान बता दे कि उसने इस योजना से 450 रुपये का भी फायदा लिया हो ? सरकार की सारी योजनाओं का लाभ केवल कृषि से जुड़े कर्मचारी ओर व्यापारी ले रहे हैं.
सरकार की योजनाओं का लाभ सिर्फ 20 प्रतिशत किसान ले पाते हैं.

किसानों द्वारा खरीदे जाने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों, कृषि यंत्रों/ट्रैक्टरों, पंपिंग सेटों तथा डीजल के मूल्यों में पिछले 25-30 सालों में जिस अनुपात में बढ़ोत्तरी हुई है, उस अनुपात में कृषि उपजों के मूल्यों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है. इस बढ़ते अंतर के कारण खेती घाटे का उद्यम बन गयी है. इस घाटे को पूरा करने के लिए किसान कर्ज लेता है, जिसे अदा करने की स्थिति में वह कभी नहीं पहुंच पाता. फलस्वरूप कर्जों की अदायगी न कर पाने तथा खेती में निरंतर घाटा होने के कारण उसे अपनी जिंदगी बोझ से दबी व अंधकारमय नजर आने लगती है और कोई उम्मीद की किरण नजर न आने के कारण वह आत्मघात का रास्ता अख्तियार कर लेता है.

ग्रामीण क्षेत्रों में सभी ग्राम सभाओं में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की सरकारी दुकानें खुली हैं पर अनाज के सरकारी क्रय केंद्र हर ग्राम सभा में क्यों नही खोले गये हैं ? सरकारी कोटे की दुकानों में वितरण के लिए अनाज जिला मुख्यालयों में स्थिति एफसीआई के गोदामों से आता है. कोटेदारों को अनाज का वितरण ब्लाक मुख्यालयों से होता है, पर इन ब्लाकों में किसानों से सरकारी दरों पर खरीदे जाने वाले अनाज के भंडारण की व्यवस्था नहीं है.

किसान चौतरफा ठगी का शिकार है. किसान व मेहनतकशों की जिंदगी में वास्तविक बेहतरी से भरा बदलाव तभी आएगा, जब देश व दुनिया की राजनीतिक व आर्थिक सत्ता पर उनका अधिकार होगा तथा सभी तरह के निर्णय लेने का हक उनके पास होगा. निजी सम्पत्ति का खात्मा कर देश की सारी चल व अचल संपत्ति राज्य के अधिकार में होगी. शिक्षा स्वास्थ्य आवास व रोजगार देना राज्य की जिम्मेदारी होगी और सभी को उसकी क्षमता के अनुसार सुनिश्चित रोजगार की व्यवस्था होगी.

Read Also –

जमीन लूटने के लिए नया ‘जमीन मालिकाना कानून’
किसान आंदोलनकारियों के खिलाफ संघी दुश्प्रचार का जवाब
किसान आन्दोलनों के साथ एकजुटता जाहिर करता बिहार-यूपी के 8 किसान संगठनों का सम्मिलित पत्र
अंबानी का नौकर मोदी किसानों को गुलाम बनाने के लिए करता दुश्प्रचार
किसान आन्दोलन और उनकी मांग
मोदी सरकार के तीन कृषि अध्यादेश : किसानों के गुलामी का जंजीर

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

जमीन लूटने के लिए नया ‘जमीन मालिकाना कानून’

Next Post

टूटती सांसों को जोड़ने वाली ऑक्सीजन गैस की खोज की दिलचस्प कहानी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

टूटती सांसों को जोड़ने वाली ऑक्सीजन गैस की खोज की दिलचस्प कहानी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

धारा 124-A को लेकर भाजपा का दुष्प्रचार और गोबर भक्तों का मानसिक दिवालियापन

April 9, 2019

राजद्रोह कानून स्वतंत्रता को कुचलने की धाराओं में राजकुमार की तरह – गांधी

May 2, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.