Tuesday, June 9, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

असली असामाजिक तत्व कौन हैं ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 19, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

असली असामाजिक तत्व कौन हैं ?

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, प्रसिद्ध गांधीवादी

हमारी एक मित्र अभी क्यूबा में पर्यावरण बचाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक बैठक में भाग लेकर लौटी हैं. क्यूबा में कारें, मशीनें और घर सब पुराने हैं. ऐसा लगता है हम साठ के दशक में पहुंंच गये हैं. इसका कारण है संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा की आर्थिक नाकेबंदी की हुई है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

असल में संयुक्त राज्य अमेरिका पूंजीवादी देश है. संयुक्त राज्य अमेरिका को समाजवाद या साम्यवाद शब्द से ही बुखार चढने लगता है. इसलिए क्यूबा में फिदेल कास्त्रो और चे ग्वेरा ने जब समाजवादी क्रांति की, उसके बाद चिढ़ कर संयुक्त राज्य अमेरिका ने सारी दुनिया को यह दिखाने के लिए कि ‘देखो समाजवाद सफल नहीं हो सकता’, क्यूबा की आर्थिक घेराबंदी कर दी.

क्यूबा की मदद सोवियत रूस करता रहा लेकिन सोवियत रूस में साम्यवादी शासन का अंत होने के बाद क्यूबा आर्थिक संकट में घिर गया. लेकिन क्यूबा के लोगों ने हार नहीं मानी. क्यूबा के लोग पुरानी कारों, मशीनों को ठीक करके चलाने में माहिर हो गये. छतों पर सब्जियां उगाना शुरू किया ताकि खाने की कमी ना हो. राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो खुद गन्ने के खेत में गन्ने काटने जाते थे.

आज पूंजीवादी देश गरीबों के लिए नर्क बने हुए हैं. इस मीटिंग में क्यूबा के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि हम स्वर्ग तो नहीं है लेकिन हम नर्क भी नहीं है. हमारी साथी ने कहा लैटिन अमेरिकी देशों के लोग अपनी सोच में बिलकुल साफ़ हैं. उनसे अगर पूछो कि इस सब का विकल्प क्या है ? तो वे लोग बिना एक क्षण की देरी के कहेंगे समाजवाद. लेकिन भारत में हम लोग रणनीतियां ही बनाते रहते हैं कि अच्छा अब हम सरकार के इस कदम का कैसे जवाब देंगे ? इसलिए भारत में आज विपक्ष के पास या सामाजिक कार्यकर्ताओं के पास कोई वैकल्पिक विचारधारा भी नहीं है. जबकि लैटिन अमेरिकी देशों में कार्यकर्ताओं के पास वैकल्पिक माडल है. इसलिए आज संयुक्त राज्य अमेरिका भी उनसे डरता है.

संयुक्त राज्य अमेरिका की सहायता से इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों की हत्याएं करवा देना, चुनी हुई सरकारों को गिरा देना सामजिक कार्यकर्ताओं की हत्याएं खूब होती रहती हैं. भारत अब इस लुटेरे संयुक्त राज्य अमेरिका का पिछलग्गू बनने में शान समझ रहा है लेकिन अमेरिकी सरपरस्ती में पूंजीवाद जब हमारा सब कुछ लूट कर ले जाएगा, शायद तब हमें होश आएगा.

{ 2 }

अगर यह समाज हर पैदा होने वाले बच्चे को एक ही स्तर का मकान, हर बच्चे को एक ही स्तर का स्कूल, हर बच्चे को एक ही स्तर का खाना नहीं देता तो यह संविधान के विरुद्ध है. अपने जन्म का स्थान चुनना किसी भी बच्चे के अपने वश में नहीं है, इसलिये बच्चा चाहे सफाई कर्मचारी का हो चाहे किसी अम्बानी का, दोनों के बच्चों को जन्मजात बराबरी का अधिकार है. और यह बात आपके संविधान के पहले पन्ने पर लिखी हुई है, लेकिन समाज अभी भी इस बात को स्वीकार करने के लिये तैयार नहीं है, इसलिये सरकारें भी ऐसा क्यों सोचें ?

आज तो शहरी बच्चे – ग्रामीण बच्चे, बड़ी ज़ात के बच्चे – दलित बच्चे, साक्षर मांं बाप के बच्चे – निरक्षर मांं बाप के बच्चे सब को भयंकर भेदभाव जन्म से मिलता है..इस तरह आप कभी भी अवसर की समानता, सामजिक, आर्थिक, राजनैतिक न्याय को वास्तविक नहीं बना पायेंगे.
समाज में समता के बिना शांति नहीं आयेगी, इस तरह सामजिक हिंसा के लिये यह समाज खुद ही ज़िम्मेदार है.

प्रकृति ने तो सभी को सामान बनाया है, पर समाज ने असमानता पैदा की है, और यह समाज, समानता की बात करने वालों को असामाजिक और आतंकवादी कह कर उन पर हमला कर देता है. अब बताइये असली असामाजिक तत्व कौन हैं ?

Read Also –

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

आवारा बच्चे शिकायत नहीं करते

Next Post

प्रलाप

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

प्रलाप

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मनरेगा क्यों जरूरी है और मोदी सरकार लाख कोशिशों के बावजूद इसे क्यों खत्म नहीं कर पायी ?

June 12, 2020

आवश्यकता है आंदोलन पर बैठे किसानों को एक परिभाषा की

December 26, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.