ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

जुर्म

जब मैंने मोटर साइकिल पर रखकर बम फोड़ा जिसमे दर्जनों इंसान मारे गए लेकिन मैं डरा नहीं क्योंकि इस आतंकी...

भगत सिंह

भगत सिंह भगत सिंह जब मौत तुम्हारे सामने खड़ी तुम्हारा इंतजार कर रही थी तब तुम लेनिन से बात कर...

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