ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

प्राथमिकताएं बदलने लगी हैं यानी हिन्दू राष्ट्र से अधिक ज़रूरी अब सुरक्षा लगने लगी है !

प्राथमिकताएं बदलने लगी हैं यानी हिन्दू राष्ट्र से अधिक ज़रूरी अब सुरक्षा लगने लगी है ! फरीदी अल हसन तनवीर...

तुम्हारी आंखें

हमेशा पारदर्शी और उद्वेलित : मैं फेंकता हूं इस पर हज़ारों रूपक रौशनी के... हालांकि इसका मुझे दोष लगेगा मालूम...

Page 120 of 522 1 119 120 121 522

Recommended

Don't miss it