ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

गर्वित रंडियां : मेरी कोई बेटी हुई तो मैं उसको अरुंधति रॉय और शेहला रशीद जैसी ही रंडी बनाऊंगी…!

गर्वित रंडियां : मेरी कोई बेटी हुई तो मैं उसको अरुंधति रॉय और शेहला रशीद जैसी ही रंडी बनाऊंगी...! आभा...

शब्द

क्या मेरे शब्द बस तुम्हारी यादों की आग के जलावन हैं क्या तुम्हारा मन विस्मृति से भरा मात्र एक आकाश...

पाठ्यक्रम में लुगदी साहित्य : समाज के स्थापित प्रतिमानों और मानकों को ध्वस्त करने का अविवेकी ‘पुनर्लेखन’

पाठ्यक्रम में लुगदी साहित्य : समाज के स्थापित प्रतिमानों और मानकों को ध्वस्त करने का अविवेकी ‘पुनर्लेखन’ 'कहना न होगा...

आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन छीनने के लिए मोदी सरकार ड्रोन-हेलीकॉप्टर से बरसा रही है बम

आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन छीनने के लिए मोदी सरकार ड्रोन-हेलीकॉप्टर से बरसा रही है बम केन्द्र की मोदी सरकार पागल हो...

ज्योतिरादित्य बात कर रहा है गद्दारी और देशद्रोही की यानी, सूप बाजे तो बाजे 72 छेद वाली चलनी भी बाजे…!

ज्योतिरादित्य बात कर रहा है गद्दारी और देशद्रोही की यानी, सूप बाजे तो बाजे 72 छेद वाली चलनी भी बाजे...!...

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