ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

राजनीति कठोर यथार्थ की दुनिया है इसलिए व्यक्ति समाज से बड़ा नहीं हो सकता

सुब्रतो चटर्जी ट्रेजेडी को परिभाषित करते हुए अरस्तू ने कहा था कि ट्रैजिक हीरो में एक ट्रैजिक फ्लॉ या चरित्रगत...

डोम

डोम का बच्चा समा जायेगा संकरे मैनहोल में आकंठ पांक में डूबकर खोल देगा जाम स्वतंत्र कर देगा गंदे जल...

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