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विश्व समाजवादी क्रांति के नेता, सीपीपी के संस्थापक चेयरमैन कामरेड जोस मारियो सिसान अमर रहें – सीपीआई (माओवादी)

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 4, 2023
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विश्व समाजवादी क्रांति के नेता, सीपीपी के संस्थापक चेयरमैन कामरेड जोस मारियो सिसान अमर रहें - सीपीआई (माओवादी)
विश्व समाजवादी क्रांति के नेता, सीपीपी के संस्थापक चेयरमैन कामरेड जोस मारियो सिसान अमर रहें – सीपीआई (माओवादी)

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केन्द्रीय कमिटी के प्रवक्ता अभय ने प्रेस बयान जारी करते हुए विश्व समाजवादी क्रांति के नेता, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ फिलिप्पीन्स के संस्थापक चेयरमैन कामरेड जोस मारियो सिसान की शहादत को लाल सलाम पेश करते हुए विश्व क्रांति में न भरा जाने वाला नुकसान कहा है. उन्होंने कहा है कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी कामरेड सिसान को विनम्र क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करती है.

इसके साथ ही विश्व समाजवादी क्रांति को सफल बनाने के लिये अधिक प्रयास करने की विश्व के सर्वहरा वर्ग को आह्वान देती है. सीपीपी, एनपीए, एनडीएफ के समुचे केडरों, फिलिप्पीन्स की क्रांतिकारी जनता और कामरेड सिसान के बंधु-बांधवों को संवेदना अर्पित करती है. का. जोस सिसान नेदरलाण्ड्स के एक्साइल में थे, और उनके स्वास्थ्य बिगड़ने के चलते 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे और उन्होंने एट्रेच में 2022 दिसम्बर की 16 तारीख की रात को आखिरी सांस ली. वह 83 वर्ष के थे.

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क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

कामरेड सिसान पहली पीढ़ी के माओवादी कॉमरेडों में से एक थे जो मार्क्सवाद-लेनिनवाद जिसे कामरेड माओ त्से-तुंग ने मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद में विकसित किया, उस सिद्धांत को विश्व समाजवाद क्रांति के मार्गदर्शन के लिये अपनाया. उन्होंने मालेमा को फिलिप्पीन्स मे लागू किया और 50 साल पहले कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ फिलीपीन्स (सीपीपी) को स्थापना की. उन्होंने संस्थापक चेयरमैन की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेली. साम्राज्यवादी आक्रमण फिलीप्पीन्स में स्पेनिश उपनिवेशवाद के साथ आरंभ हुई थी. द्वीप समूह फिलिप्पीन्स देश में अमेरिका अपनी मिलिटरी बेस कैम्प का विस्तार किया. जब अमेरिका ने अपनी गिद्दवाली आंख फिलिप्पीन्स में डाली, तब से फिलिप्पीन्स अमेरिका साम्राज्यवाद के पंजों में फंस गया है.

कामरेड सिसान ने ये साबित किया कि अर्द्ध उपनिवेशिक, अर्द्ध सामंती फिलिप्पीन्स देश में माओवादी जनयुद्ध ही एक मात्र रास्ता है उससे अर्द्ध उपनिवेशिक, अर्द्ध सामंती व्यवस्था से स्वतंत्र करने में उन्होंने फिलिप्पीन्स आंदोलन को पार्टी, सैनिक और संयुक्त मार्चा के क्षेत्रों में विकसित किया. विश्व के सारे माओवादी पार्टीयों के साथ रिश्ता स्थापित करने में सिसान ने उसकी जिम्मेदारी उठाई. कामरेड सिसान जो विश्व माओवादी ताकतों के लिये खड़े रहते थे. उनका निधन समाजवादी क्रांति में होने वाली नुकसान की जल्दी भरपाई नहीं होने वाली है.

कामरेड सिसान का जन्म एक सामंती परिवार में 8 फरवरी 1939 में हुआ. उन्होंने उच्च शिक्षा की पढ़ाई की. पहले अंग्रेजी के अध्यापक, बाद में राजनीतिक विज्ञान के अध्यापक के तौर पर उन्होंने काम किया. वह दौर था जब अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ जनता में तीव्र आक्रोश पनप रहा था. उस समय में फिलिप्पीन्स को आजाद करने के लिये बहुत सारे मार्ग की तलाश की जा रही थी. यह सब विचार कामरेड सिसान को पार्टिडो कम्युनिस्टा इंग फिलिप्पीन्स में 1964 में भर्ती होने के लिये प्रेरणा दी.

उन्होंने नौजवान संगठन में जो 1964 में स्थापित हुई थी, में सक्रिय काम करने लगे और नेशनलिस्ट यूथ की जिम्मेदारी ले ली. बाद में उन्होंने मूवमेंट फर द एड्वान्समेंट ऑफ नेशनलिज्म की जिम्मेदारी भी उठाई. मार्कोस की तानाशाही के खिलाफ और अमेरिका का वियतनाम पर आक्रमण का विरोध भी करते हुये उन्होंने बहुत सारे आंदोलन को खड़ा किये.

हालांकी कामरेड सिसान को समझ में आया की यह पार्टी संशोधनवादी है, और उससे अलग हो गये. उन्होंने सच्चे कम्युनिस्ट ताकतों को संगठित करके 26 दिसम्बर 1968 में सीपीपी की स्थापना की. उन्होंने माओवादी दृष्टिकोण को समझते हुए उन्हें यह ज्ञात हुआ कि जनता अपनी आजादी जन सेना के बिना नहीं कर सकती. और उसके लिये 29 मार्च 1969 को न्यू पीपुल्स आर्मी की स्थापना की. कामरेड सिसान मात्र 27 साल की उम्र में ही फिलिप्पीन्स आंदोलन के नेता बने. उस समय से उन्होंने फिलिप्पीन्स आंदोलन को अपने शहादत होने तक आगे ले गये.

कामरेड सिसान यह समझे कि सिद्धांत आचरण के लिये अनिवार्य है और फिलिप्पीन्स समाज का मालेमा दृष्टिकोण से अध्ययन किया. उन्होंने कई विश्लेषणात्मक लेख और किताबें लिखें उपनाम अमाडो गेरेरो से. उन्हें एक मार्क्सवादी बुद्धिजीवी की पहचान मिली जब उन्होंने 1967 में ‘स्ट्रगल फॉर नेशनल डेमोक्रसी’ नामक पुस्तक प्रकाशित की. 1993 में कामरेड सिसान ने ‘फिलिप्पीन्स सोसाइटी-रिवल्यूशन’ की रचना की जिसमें उन्होंने फिलिप्पीन्स इतिहास और समाज का विश्लेषण किया. उस समय की सरकार ने उस पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया. सिद्धांत और आचरण का सच्चा सम्मिश्रण करते हुये फिलिप्पीन्स आंदोलन को आगे ले गये.

कामरेड सिसान अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट ताकतों को संगठित करने में अहम योगदान दिया. आधुनिक संशोधनवाद जैसा प्रचण्ड, बाब अवाकियन के विरोध में संघर्ष किया. इंटरनेशनल लीग फॉर पीपुल्स स्ट्रगल्स के नेता होते हुये कामरेड सिसान ने साम्राज्यवाद विरोधी और राष्ट्रीयता मुक्ति आंदोलन को समन्वय की जिम्मेदारी भी निभाई. सीपीपी ने इस साल कामरेड सिसान के लेखों को 11 वाल्यूम्स जो दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र, कला साहित्य, जन लोकतांत्रिक क्रांति और अन्य मुद्दे को विश्लेषण करता है, उसे प्रकाशित किया है. विश्व की माओवादी ताकतों को इन लेखन का अध्ययन करना चाहिये और मालेमा को ठोस परिस्थिति में लागू करना चाहिये.

कामरेड सिसान ने मार्क्स, एंगेल्स, लेनिन, स्तालिन और माओ के योगदान को परिक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिये. उन्होंने सैद्धांतिक और राजनीतिक नेतृत्व विश्व के सर्वहरा वर्ग को प्रदान किये हैं. फिलिप्पीन्स के अलावा कामरेड सिसान ने विश्लेषणात्मक लेख दुनिया भर की आर्थिक, राजनीतिक परिस्थिति पर लिखी है. यह सब लेख विश्व के माओवादी ताकतों को शोषक वर्ग के प्रतिकूल परिस्थिति को, और क्रांति के अनुकूल परिस्थिति को समझने में बहुत ही मददगार साबित हुई है.

कामरेड सिसान और उनके जीवनसाथी कामरेड जूलियेट को मार्कोस सरकार ने 1977 को गिरफ्तार किया. तानाशाह मार्कोस कामरेड सिसान से स्वयं पूछताछ किया और उनको यातना दिया. विश्व भर की ओदोलन ने सरकार पर दबाव डाला जिसके कारण कामरेड सिसान को न्यायालय में पेश किया गया. कामरेड सिसान 9 साल तक जेल में कैद रहे. कामरेड सिसान को एक दिन में 20 घंटे तक एक अंघेरे कमरे में एक काठ के सात बांद कर सैनिक कैद में बंदी बनाकर रखा गया, जो फिलिप्पीन्स की राजधानी के निकट था.

इस समय के दौरान लोकतांत्रिक विद्रोह मार्कोस के तानाशाही के खिलाफ आरंभ हो चुकी थी. 1986 मार्च को नई सरकार सत्ता में आई. यह सरकार ने सीपीपी के साथ शांति वार्ता की प्रक्रिया को शुरू किया. इस समय देश में सीपीपी एक मजबूत ताकत के रूप में उभरी. तब कामरेड सिसान ने फिलिप्पीन्स क्रांतिकारी आंदोलन के समर्थन के लिये अंतर्राष्ट्रीय समर्थन पाने के लिये विश्व का दौरा किया. जब वे नेदरलाण्ड्स में थे तब फिलिप्पीन्स की सरकार उनके पासपोर्ट को रद्द कर दिया. यह 1988 सितम्बर का समय था. उन पर देशद्रोह के फर्जी मामले दर्ज हुये और उन्होंने अपने ही देश में रहने के अधिकार से वंचित किया गया. उस समय से कामरेड सिसान एक राजनीतिक एक्साइल के रूप में नेदरलाण्ड्स में रह रहे थे. उन्होंने आंदोलन को नेदरलाण्ड्स से मार्गदर्शन दी.

2002 अगस्त में अमेरिकी सरकार ने कामरेड सिसान को उग्रवाद के समर्थक के तौर पर घोषित किया. इसके तहत नेदरलाण्ड्स की सरकार ने उन्हें परेशान करना शुरू की. 2009 में ईयू ने भी आतंकवाद के श्रेणी में उनको रखा. अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन और भाईचारा ने कामरेड सिसान को वहां रहने में मदद की. फिलिप्पीन्स आंदोलन में 1988 के दौरान जो तेजी से प्रगति हो रही थी, तब वाम संकीर्णतावादी रूझान उत्पन्न हुई थी. कुछ सालों बाद दक्षिणपंथी रूझान भी उत्पन हुई. यह रूझान आंदोलन को भारी नुकसान पहुंचा दी. कामरेड सिसान ने इस रूझान के खिलाफ सैद्धांतिक राजनीतिक विरोध करते हुये भूल सुधार आंदोलन को लागू किया और पार्टी को कायम रखा.

इस भूल सुधार के आंदोलन के तहत पार्टी, एनपीए, मास आर्गनाइजेशन और एनडीएफ को बहुमूल्य ताकत प्रप्त हुई. इस आंदोलन की कामयाबी ने पार्टी को आगे की तरफ बढ़ाया. आगे बढ़ने की प्रक्रिया में सशस्त्र संघर्ष, गुरिल्ला बेस और गुरिल्ला जोनों के बिना देश को स्वतंत्रा प्राप्त नहीं हो सकती. यह स्पष्ट समझदारी से पार्टी ने एनपीए को शक्ति प्रदान की. उसने नेशनल डेमोक्रटिक फ्रंट को एक संयुक्त मोर्चा के रूप में स्थापित की और उसे बड़े पैमाने पर मजबूती प्रदान की. उसमें अनेक उत्पीड़ित वर्ग, तबकों और इलाकों जैसे लुमोड, मोरो, और कार्डिल्लेरा को एकजुट किया.

1970 के ‘ओप्लान बयनिहान’ केंपेन से 2011 के ‘ओप्लान बयनिहान’ केंपेन तक फिलिप्पीन्स सरकार ने कई कार्यक्रम फिलिप्पीन्स क्रांतिकारी आंदोलन को खत्म करने में लागू किये हैं. 2018 से हवाई बमबारी जारी है. कामरेड सिसान ने सीपीपी को सही नेतृत्व को प्रदान की है और फिलिप्पीन्स के क्रांति को इस कठोर दमन में क्रांति को आगे ले जाना विश्व सर्वहरा आंदोलन के लिये प्रेरणा देती है.

कामरेड सिसान एक कवि भी थे. उन्होंने कहा था कि वह आजादी के ऊपर गीत लिखा करते थे जिस के जरिये वह तानाशाही और जेल की जीवन से उभरने के लिये गीत लिखते थे. कामरेड सिसान ने यह कहा है कि दुश्मन के ऊपर जंग के सार से इंसान एक योद्धा बन जाता है. असली श्रद्धांजलि इस महान नेता को तभी होता है जब सारे माआवादी पार्टीयों के बीच भाईचारा और समन्वय विकसित हो. साम्राज्यवाद बहुत ही गहरे संकट में घुस गया है. इस संदर्भ में जब जनता और राष्ट्रीयता के आंदोलन साम्राज्यवाद के खिलाफ विकसित हो रहा है, तब सारे कम्युनिस्ट पार्टियों और ताकतें
एक जूट होकर क्रांतिकारी कार्य को क्रांतिकारी जोश के साथ आगे ले जाना है. यही हो सकता है असली श्रद्धांजलि कामरेड जोस मारियो सिसान को.

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