ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

माहवारी

आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है पैरों में चलने की ताक़त नहीं है, जांघों में जैसे पत्थर की सिल...

पहली बार कैमरों, सोशल मीडिया के चलते पूरा देश मनु के राज को देख रहा है

आप उत्तर प्रदेश चुनावों में हो रही हिंसा देखकर अचरज कर सकते हैं लेकिन मनुस्मृति आधारित जातिवादी तंत्र पांच हज़ार...

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