ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

हम लड़ेंगे साथी

हम लड़ेंगे साथी, उदास मौसम के लिए हम लड़ेंगे साथी, ग़ुलाम इच्छाओं के लिए हम चुनेंगे साथी, ज़िन्दगी के टुकड़े...

राज कुंद्रा-शिल्पा शेट्टी को बड़े मामलों से बचाने के लिए पोर्नोग्राफी जैसे छोटे मामलों में फंसाया गया ?

गिरीश मालवीय अगर आप सुशांत वाले केस में रिया के रोल को देखे तो उसे मीडिया बिलकुल खलनायिका बनाकर प्रस्तुत...

लघु कविताएं

1. नंगापन कहां से लाती हो इतना नंगापन ? ये अधखुली छातियां तीन चौथाई जांघें पतली लेस के उपर नीचे...

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