ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

हिंदी साहित्य संसार की हीन स्थिति बहुत दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण है

द्विवेदी, निराला, रेणु रामचन्द्र शुक्ल हिंदी के अधिकांश सेवियों के जीवन के आखिरी दिन बेहद त्रासद स्थितियों में बीते. प्रेमचंद,...

मंडी

वहांसूअर का मांस महंगा हो गया और यहां दाल महंगी हो गईगोकशी की इजाज़त कुछ गिनती के इज्जतदारों को हैबाजार...

जितने घातक कृषि बिल हैं, उतने ही घातक शिक्षा नीति के प्रावधान हैं

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना अंतर यही है कि किसान संगठित हैं, लेकिन छात्र और मजदूर संगठित नहीं...

अब निजी हाथों में आयुध कंपनियां : मुनाफा के लिए लोगों का खून बहायेगा

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना कोई हथियार कंपनी सरकारी है तो उसका दायित्व है कि सरकार द्वारा आदेशित...

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