संगतराश, तुम उसका बुत बनाना
फिल्हाल संगतराश, तुम उसका बुत बनाना अवतारी बता कर बुतपरस्त नजूमियों, तुम उसका बुत बेचना कलम, तुम्हें क्या कहूं फिल्हाल...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
फिल्हाल संगतराश, तुम उसका बुत बनाना अवतारी बता कर बुतपरस्त नजूमियों, तुम उसका बुत बेचना कलम, तुम्हें क्या कहूं फिल्हाल...
आज मेरी कविता पढ़ लो यह बहुत अल्पजीवी है कल इस पर मूंगफली और चटनी के साथ समोसे बिकेंगे मैं...
एक मौत ही तो है जो अकेली सब की खबर रखती है कल वह मेरे फ्लैट आई थी उसने फोन...
मेरे हिस्से की धूप चुरा ली गई च्वाइस के रंग चुनने का विकल्प नहीं है माल और मसाला वही है...
गिरीश मालवीय स्वास्थ्य मंत्रालय हमारे साथ गजब का मजाक करता है. कुछ दिन पहले DCGI द्वारा मंजूर कोवेक्सीन कोविशील्ड को...
संघ द्वारा शिक्षित-प्रशिक्षित बिहार का सुशील कुमार मोदी भी अनर्गल प्रलाप करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी विवेकानंद के...
सर्दियां सैनिक की विधवा की सूनी मांग-सी सफेद हैं हजारों सालों से करोड़ों अहेतुक युद्ध में मारे गए श्वेत आत्माओं...
कनक तिवारी यह नए इतिहास और विशेषकर आदिवासी बुद्धिजीवियों का फर्ज है कि वे अपने पूर्वज जयपाल सिंह मुंडा की...
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना खबर छोटी है, लेकिन संकेत गहरे हैं. आप इसमें भविष्य की आतंकित करने...
गिरीश मालवीय मंगलवार शाम से व्हाट्सएप ने भारतीय व्हाट्सएप यूजर्स को अपनी टर्म्स और प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर अपडेट भेजना...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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