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विनेश फोगाट डिसक्वालिफिकेशन : क्या हम केन्या से भी गये बीते हैं ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 8, 2024
in ब्लॉग
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विनेश फोगाट डिसक्वालिफिकेशन : क्या हम केन्या से भी गये बीते हैं ?
विनेश फोगाट डिसक्वालिफिकेशन : क्या हम केन्या से भी गये बीते हैं ?

जुल्मों के खिलाफ सड़कों पर जिस निडरता, साहस के साथ विनेश फोगाट ने लड़ाई लड़ी, उसी निडरता और साहस के साथ पेरिस ओलंपिक में चीते की फूर्ति से एक के बाद एक विजयी अभियान को को आगे बढ़ी. ऊसकी जीत ने भारत सरकार थर्रा गई. बलात्कारी बृजभूषण और उसके हिमायती नरेन्द्र मोदी के पसीने छुट गये. ऐसे बुरे वक्त में अन्तर्राष्ट्रीय ओलंपिक की सदस्य नीता अंबानी सामने आई और फोगाट के स्वर्ण की ओर बढ़ते कदम को रोक दिया. बहाना बनाया 100 ग्राम अधिक वजन का.

अब इसी परिदृश्य में केन्याई खिलाड़ी को देखते हैं, पांच अगस्त को ओलंपिक में महिलाओं की 5000 मीटर की रेस हुई थी. इस रेस में केन्या की ही रेसर्स ने गोल्ड और सिल्वर जीता था. गोल्ड पर बीट्राइस चेबेट और सिल्वर पर फेथ किपयेगॉन ने कब्जा किया था. इसके बाद फेथ किपयेगॉन को डिसक्वालिफाई कर दिया गया था. ओलंपिक कमेटी ने बताया था कि वीडियो फुटेज से पता चलता है कि रेस के दौरान किपयेगॉन ने इथियोपिया की गुडाफ सेगे को टक्कर मारी थी.

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दावा किया गया था कि जब दो लैप बाकी थी, तब गुडाफ सेगे ने बढ़त बना ली थी. तभी पीछे से आ रहीं किपयेगॉन उनसे टकरा गईं और आगे निकल गईं. आखिरकार पहले नंबर पर बीट्राइस चेबेट और दूसरे पर किपयेगॉन रहीं. रेस खत्म होने के बाद दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और खुशी मनाई. लेकिन कुछ देर बाद ही किपयेगॉन को डिसक्वालिफाई कर दिया गया.

डिसक्वालिफिकेशन के खिलाफ किपयेगॉन ने अपील की. डिसक्वालिफिकेशन पर बीट्राइस चेबेट ने बताया कि इथियोपिया की गुडाफ सेगे, फेथ किपयेगॉन के ट्रैक पर आ गई थीं. इसलिए किपयेगॉन ने सेगे को ये ‘धक्का न दें’ कहने के लिए हाथ मारा था. इसी दौरान किपयेगॉन का बैलेंस बिगड़ गया और उन्होंने ट्रैक से बाहर निकलने से बचने की कोशिश की. आखिरकार किपयेगॉन का डिसक्वालिफिकेशन रद्द कर दिया गया. उन्हें सिल्वर मेडल से नवाजा गया. इस पूरी लड़ाई में केन्याई खिलाड़ी के साथ पूरी तरह केन्याई टीम खड़ी रही.

लेकिन भारत के मामले में पूरा उल्टा हो गया. विनेश फोगाट के साथ खिलाड़ियों के सहयोग के लिए गई भारतीय टीम अय्याशी में लिप्त रहा. न किसी तरह की मदद और न ही निर्देश. नीता अंबानी जैसे अय्याश, जिसके चाय का एक कप ही ढ़ाई लाख रुपये का आता है, गायब रही. कहा जा सकता है कि ये तमाम लोग जो खिलाड़ियों के सहयोग के नाम पर जाते हैं, असलियत में मौज मस्ती के लिए जाते हैं. इनके लिए देश दोयम है. इसका परिणाम यह निकला कि फोगाट को अयोग्य घोषित कर मेडल से ही वंचित कर दिया गया और फिर फोगाट ने खेल से ही सन्यास ले लिया. यानी, इन अय्याशों के अय्याशी की कीमत देश चुकाया, तो यह पानी की तरह साफ है गद्दार कौन है.

इन अय्याशियों के लिए कितने उच्चतर के अय्याशी की व्यवस्था की जाती है, इसका मालूमात ‘द गार्जियन’ में अरवा महदावी के प्रकाशित इस लेख से पता चलता है, जिसमें वह बताती हैं – ‘ओलंपिक में सेक्स भले ही आधिकारिक अनुशासन न हो, लेकिन ऐसा ज़रूर लगता है कि पेरिस ज़ोरदार इनडोर खेलों के लिए खुद को तैयार कर रहा है. टोक्यो ओलंपिक के दौरान लगाए गए कोविड से संबंधित अंतरंगता प्रतिबंध को आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है और गर्भ निरोधकों का एक बड़ा ऑर्डर दिया गया है.

‘हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, 2024 खेलों के आयोजकों ने कहा कि 2,00,000 पुरुष कंडोम, 20,000 महिला कंडोम और 10,000 डेंटल डैम ओलंपिक विलेज में उपलब्ध कराए जाएंगे, जहां 14,500 एथलीट और कर्मचारी लगभग एक सप्ताह के समय में जाएंगे. कुछ मायनों में, यह हमेशा की तरह व्यवसाय है. दशकों से, ओलंपिक विलेज में नावों पर मुफ्त गर्भनिरोधक आते रहे हैं.

‘2016 के रियो डी जनेरियो खेलों ने रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिसमें 4,50,000 कंडोम उपलब्ध कराए गए, जिनमें (पहली बार) 1,00,000 महिला कंडोम भी शामिल थे. यहां तक ​​कि नो-सेक्स टोक्यो खेलों में 1,60,000 मुफ्त कंडोम भी शामिल थे – एथलीटों के लिए सख्त निर्देश थे कि वे उनका उपयोग न करें, लेकिन उन्हें स्मृति चिन्ह के रूप में घर ले जाएं। (‘नमस्कार, मां और पिताजी ! मैंने टोयको में बहुत अच्छा समय बिताया ! क्या आप मेरा स्मारक कंडोम देखना चाहेंगे ?’)’

इससे साफ पता चलता है कि ओलंपिक खेलों में अय्याशियों का पूरा प्रबंध होता है और भारत से जाने वाले तथाकथित सहयोगी विशुद्ध अय्याश हैं, जो टैक्सपेयर्स के पैसों से केवल और केवल अय्याशी करने जाते हैं. उसे खेल और खिलाडियों से कोई मतलब नहीं होता. बृजभूषण शरण सिंह इन्ही अय्याशों का एक सरगना है, जिसके खिलाफ विनेश फोगाट और उनके साथियों ने सड़कों पर लड़ाई लड़ी, लेकिन उसका बाल तक बांका नहीं हुआ. बाप की जगह बेटा सांसद बन गया.

सवाल है ऐसा कैसे हुआ ? जवाब है नरेन्द्र मोदी के संरक्षण के कारण. नरेन्द्र मोदी संरक्षण क्यों देता है ? जवाब है क्योंकि वह खुद अय्याश है. दिल्ली विधानसभा में पन्ने लहराते तत्कालीन आम आदमी पार्टी विधायक कपिल मिश्रा ने साफ तौर पर बतलाया था कि किस तरह नरेन्द्र मोदी के पास लड़कियों की सप्लाई होती थी. यानी, भाजपा का पूरा महकमा अय्याशों का गिरोह है, जो अब भारत की सत्ता पर है और अब सत्ता और टैक्सपेयर्स के पैसों से आकंठ अय्याशी में डुबा हुआ है. जो कोई उसका विरोध करता है, उसकी हत्या या जेल में डाल दिया जाता है अथवा विनेश फोगाट की तरह उसका कैरियर खत्म कर दिया जाता है.

संसद में खेल मंत्री (जिसका नाम भी शायद ही किसी को पता होगा)  विनेश के खेल में लगे चाय बिस्कुट के खर्च का हिसाब दे रहा था, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि नीता अंबानी के चाय बिस्कुट पर टैक्सपेयर्स का कितना पैसा खर्च हुआ. कि भारत से जाने वाले अय्याशों के गिरोहों पर टैक्सपेयर्स का कितना पैसा खर्च हुआ. उसे बताने में शर्म आती है. ये सभी के सभी षड्यंत्रकारी और देशद्रोही तत्व हैं. विनेश फोगाट ने ओलंपिक शुरु होने से पहले ही सोशल मीडिया के माध्यम से देश की जनता को इस बारे में आगाह कर दिया था –

’19 अप्रैल को एशियन ओलम्पिक क्वालीफाई टूर्नामेंट शुरू होने जा रहा है. मेरे द्वारा लगातार एक महीने से भारत सरकार (SAI, TOPS) सभी से मेरे कोच और फिजियो की ACCREDITATION (मान्यता) के लिए रिक्वेस्ट की जा रही है. ACCREDITATION के बिना मेरे कोच और फिजियो का मेरे साथ कम्पटीशन AREANA में जाना संभव नहीं है. लेकिन बार-बार रिक्वेस्ट करने पर भी कहीं से भी कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है. कोई भी मदद करने को तैयार नहीं है. क्या हमेशा ऐसे ही खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खेला जाता रहेगा. बृजभूषण और उसके द्वारा बैठाया गया डैमी संजय सिंह हर तरीक़े से प्रयास कर रहे है कि कैसे मुझे ओलंपिक्स में खेलने से रोका जा सके. जो टीम के साथ कोच लगाए गए हैं वे सभी बृजभूषण और उसकी टीम के चहेते हैं, तो इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वो मेरे मैच के दौरान मुझे मेरे पानी में कुछ मिला के ना पीला दे ?? अगर मैं ऐसा कहूं कि मुझे डोप में फसाने की साजिश हो सकती है तो ग़लत नहीं होगा. हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही. इतने महत्वपूर्ण कम्पटीशन से पहले ऐसे हमारे साथ मानसिक टॉर्चर कहां तक जायज़ है. क्या अब देश के लिए खेलने जाने से पहले भी हमारे साथ राजनीति ही होगी क्योंकि हमने सेक्सुअल हैरेसमेंट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठायी ?? क्या हमारे देश में गलत के खिलाफ आवाज उठाने की यही सजा है ? उम्मीद करती हूं हमें देश के लिए खेलने जाने से पहले तो न्याय मिलेगा. जय हिन्द !’

स्पष्ट है भारत की हर संस्थानों की तरह खेल भी भ्रष्टाचारियों और अय्याशों की भेंट चढ़ चुका है, जिसकी कीमत विनेश फोगाट, साक्षी मलिक जैसी खिलाड़ियों को चुकाना पड़ रहा है. इससे एक चीज और स्पष्ट भारत की पूरी सरकार हत्यारों, बलात्कारियों, भ्रष्टाचारियों और अय्याशों का ठिकाना बन गया है. देश की जनता को पूरी कड़ाई के साथ इन गिरोहों से निपटना होगा. अन्यथा खुद को परमेश्वर बताने वाला यह नन बॉयोलॉजिकल गिरोह देश को गुलामी की भेंट चढ़ा देगा.

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