ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

विकास दूबे प्रकरण : सत्ताधारी पुलिसिया गिरोह और संवैधानिक पुलिसिया गिरोह के बीच टकराव का अखाड़ा बन गया है पुलिसियातंत्र

दबंग कहे जाने वाले एक पूर्व सांसद निजी बातचीत के दौरान बताते हैं, 'लोग मुझे रंगदार कहता है. पर यह...

भूख

भूख पुरानी नहीं पड़ती बासी रोटी की तरह भूख से सनी कविताएंं भी डेग डेग पर गुंंथी रहती हैं तुम्हारे...

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