तुम धरती हो …
तुम धरती हो बिछी हो जिस पर मैं चलता हूं तुम वृक्ष हो झुकी हो, जिससे लिपट मैं अकसर सो...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
तुम धरती हो बिछी हो जिस पर मैं चलता हूं तुम वृक्ष हो झुकी हो, जिससे लिपट मैं अकसर सो...
रिटायर सैन्य अधिकारियों का बस एक ही काम है - वह है युद्धोन्माद भडकाना. बक्शी से जैसे लोग इसका टिपिकल...
एक महिला ने संसद परिसर में नेहरू का कॉलर पकड़कर पूछा, 'भारत आज़ाद हो गया, तुम देश के प्रधानमंत्री बन...
इस देश के नागरिकों में कितनी 'पॉलिटिकल एजुकेशन' है, आप सब वाकिफ हैं. लोग सरकार और देश के बीच का...
आत्म निर्भर शब्द का क्या वही मतलब है जो कल घोषणा के पूर्व था या आज जो घोषणा के बाद...
मेरे अंदर बसती है एक चरित्रहीन लड़की जो पार करना चाहती है सभी सीमाओं को वह दौड़ती है खुले...
दबंग कहे जाने वाले एक पूर्व सांसद निजी बातचीत के दौरान बताते हैं, 'लोग मुझे रंगदार कहता है. पर यह...
पं. सुन्दरलाल (जन्म - 26 सितम्बर, 1886; मृत्यु - 8 मई, 1981) पं. सुन्दरलाल महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी तथा गांधीवादी...
कोरोन वायरस से बचाव के नाम पर भारत की पुलिस बकायदा माईक लगाकर घोषणा करती सुनी जा सकती है - अगर...
भूख पुरानी नहीं पड़ती बासी रोटी की तरह भूख से सनी कविताएंं भी डेग डेग पर गुंंथी रहती हैं तुम्हारे...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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