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सीबीएसई का खत्म होता सिलेबस

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 10, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
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सीबीएसई का खत्म होता सिलेबस

इस देश के नागरिकों में कितनी ‘पॉलिटिकल एजुकेशन’ है, आप सब वाकिफ हैं. लोग सरकार और देश के बीच का अंतर नहीं कर पाते हैं. लोग आज भी समझते हैं कि प्रधानमंत्री से सवाल पूछना अपराध है. ऐसे में सरकार ने सीबीएसई (11th) की पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से पूरे 4 चैप्टर ही उड़ा दिए.

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1. सेक्युलरिज्म – इसे हटाकर आरएसएस के लिए धर्म प्रधान राज्य एस्टेब्लिश करना आसान होगा, क्योंकि इस चैप्टर को आपका बच्चा पढ़ता तो उसे पता लग जाता कि सर्वधर्म, समभाव क्यों आवश्यक है ? धार्मिक आजादी क्यों आवश्यक है ? चूंकि अब उसे किताबों में ये पढ़ने के लिए नहीं मिलेगा कि सेक्युलरिज्म क्यों जरूरी तो व्हाट्सएप ही उसकी पॉलिटिकल एजुकेशन का एकमात्र पढ़ने का सोर्स हुआ करेगा, जहां पर वह पढ़ लिया करेगा कि ‘हिन्दू राष्ट्र’ क्यों जरूरी है ! ऊंची जातियों का शासन क्यों जरूरी है ?

2. फेडरलिज्म (संघवाद) – इस चैप्टर में पढ़ाया जाता है कि कैसे भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है ? आपको बता दूं कि सबसे बड़ा लोकतंत्र इसलिए नहीं है कि यहां सबसे अधिक जनसंख्या है, बल्कि इसलिए है क्योंकि यहां केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय तीन स्तरों पर सरकारें गठित होती हैं.

‘फेडरलिज्म’ आपके बच्चे को सिखाता है कि कैसे सत्ता का केंद्रीकरण खतरनाक है ? कैसे राज्य और केंद्र सरकारों के बीच ताकत का संतुलन होना चाहिए ? ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी राज्य को बजट ही न दिया जाए, ऐसा न हो कि किसी राज्य को खत्म ही कर दिया जाए, जैसे कश्मीर में हुआ.

आरएसएस की मनोवृत्ति शुरू से ही आधुनिक राजतंत्र स्थापित करने की रही है, जिसमें सत्ता का केंद्रीकरण एक आदमी के हाथ में होता है. संविधान में वर्णित फेडरलिज्म आरएसएस के इसी लक्ष्य के बीच में एक मुख्य बाधा है, इसलिए आरएसएस-भाजपा की सरकार आपकी स्मृतियों में से फेडरलिज्म शब्द को ही मिटाना चाहती है.

धीरे-धीरे एक ही राजा, एक ही मंत्री, एक ही जाति का शासन स्थापित करने की कोशिश की जा रही है जोकि फिलहाल स्थापित होती नजर भी आ रही है. दो आदमी ही पूरे देश की नियति तय कर दे रहे हैं.

3. नेशनलिज्म – आपके बच्चे इस चैप्टर को पढ़ लेंगे तो उन्हें पता चल जाएगा कि मोदी जी का निक्कर हिटलर का कॉपी किया हुआ है. आपके बच्चों को पता चल जाएगा कि आरएसएस-भाजपा का राष्ट्रवाद नेशनलिज्म नहीं है, बल्कि जिंगोइज्म है. अगर बच्चे ये चैप्टर पढ़ लेंगे तो जान लेंगे कि आरएसएस का फर्जी राष्ट्रवाद कैसे जर्मनी और इटली की तरह ही इस देश के लोकतंत्र को खत्म कर सकता है, जोकि हो भी रहा है. आज मीडिया, नौकरशाही, शिक्षकों, नागरिकों की हिम्मत नहीं है कि मोदी-शाह के खिलाफ कुछ बोल दें.

4. सिटिजनशिप – अगर आपके बच्चे नागरिकता कानूनों को पढ़ लेंगे तो उन्हें पता चल जाएगा कि सीएए जैसे कानून के बिना भी बाहरी हिंदुओं को इस देश की नागरिकता मिल सकती है. इस देश में किसी को भी नागरिकता मिल सकती है, इसके नियम कानून भी हैं. इस चैप्टर को पढ़ने से सरकार का प्रोपोगेंडा फुस्स हो जाता. पता चल जाता कि कैसे एनआरसी और सीएए केवल जनता को मूर्ख बनाने के लिए लाए जा रहे हैं.

ये सरकार धीरे-धीरे आपकी वैज्ञानिक सोच को निगल रही है. विश्वविद्यालयों पर हमला पहले ही हो चुका है, स्कॉलरशिप खत्म हो ही चुकी हैं, लाइब्रेरियां बन्द की जा रही हैं, सिलेबस खत्म किया जा रहा है.

अब भी नहीं जागना है तो मत जागिए, इससे आप किसी और का कुछ नहीं बिगाड़ रहे हैं सिवाय अपने और अपने बच्चों के. आप अपने बच्चों के लिए जिंगोइज्म वाला हिंदुस्तान छोड़कर जा रहे हैं, जहां एक-दो ऊंची जातियों के कुछेक संगठनों का ही राज होगा, जहां आपकी हैसियत अपने ही देश में एक नागरिक की नहीं बल्कि असहाय गुलाम जितनी होगी.

वैसे महसूस तो अब भी हो रही होगी, होती है न ??

  • श्याम मीरा सिंह

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