ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

मां

मां ! मैंने खाये हैं तुम्हारे तमाचे अपने गालों पर, जो तुम लगाया करती थी अक्सर, खाना खाने के लिए....

प्रधानमंत्री का सम्बोधन और मध्यवर्ग का वैचारिक खोखलापन

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना 24 मार्च को जब प्रधानमंत्री ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी तो...

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