Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

बाबरी मस्जिद बिना किसी विवाद के एक मस्जिद थी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 11, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बाबरी मस्जिद बिना किसी विवाद के एक मस्जिद थी

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ता
गर भारत के युवा आज मन्दिर बनाने को अपनी राजनीतिक सफलता मान लेते हैं तो भारत के हिंदू समुदाय के युवा अपने वर्तमान और भविष्य को नष्ट कर लेंगे. कोई भी कौम मजहब के आधार पर आगे नहीं बढ़ती. अब सिर्फ वही कौम बचेगी और आगे बढ़ेगी जो शिक्षा और विज्ञान को अपनायेगी.

अगर हिन्दुत्ववादी आज सुप्रीम कोर्ट की बदमाशी, धर्म गुरु रविशंकर की गुंडागर्दी और सरकार की बेशर्मी के दम पर बाबरी मस्जिद के मलबे पर एक मन्दिर बनाते हैं तो आने वाली पीढियों के हिन्दू बच्चे इस हरकत को शर्म से याद करेंगे. यह पूरी तरह से गुंडागर्दी है. वह बिना किसी विवाद के एक मस्जिद थी.  उस मस्जिद का बाबर से कोई लेना-देना नहीं था.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

अयोध्या में चार सौ राम मन्दिर हैं. हर मन्दिर का पुजारी अपने मन्दिर को ही असली जन्म-भूमि कहता है. तुलसीदास के रामचरित मानस लिखने से पहले भारत में कोई राम का मन्दिर नहीं था. राम का कोई वर्णन किसी वेद या उपनिषद में नहीं है. राम से मिलती-जुलती कहानियां बहुत सारे देशों में सुनाई जाती है.

तुलसीदास के रामचरितमानस लिखने से पहले भारत की आम जनता राम को नहीं जानती थी. तुलसीदास ने रामचरितमानस तब लिखा जब अकबर का शासन था. अयोध्या के सारे मन्दिर उसके बाद बने. अकबर बाबर का पोता था तो मन्दिर बने पोते के टाइम पर और भाजपा बताती है कि मन्दिर बाबर ने तोड़ दिया यानी जो मन्दिर पोते के टाइम में बना उसे दादा ने तोड़ दिया ! बाबर के टाइम पर मन्दिर बना ही नहीं था. बाबर कभी अयोध्या नहीं आया था.

बाबरी मस्जिद पर हिन्दुओं का कोई हक नहीं बनता. संघ और भाजपा ने सत्ता हडपने के लिए इस विवाद को जन्म दिया. असल में संघ आज़ादी आने से डरा हुआ था. संघ का निर्माण भारत के अमीर सवर्णों ने किया था. इन्हें डर लगता था कि आज़ादी के बाद कहीं समानता ना आ जाए वरना अमीर सवर्ण जातियों का आर्थिक राजनैतिक और सामाजिक दबदबा खत्म हो जाएगा.




भगत सिंह आंबेडकर नेहरु गांधी सभी बराबरी की बात कर रहे थे. आप उस दौर के संघी नेताओं के लेख पढ़ लीजिये. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता लोग भगत सिंह, आंबेडकर गांधी और नेहरु से के बारे में नफरत भरे बयान दे रहे थे. आज़ादी के बाद समानता ना आ सके इसलिए संघ ने राजनीति को साम्प्रदायिकता की तरफ मोड़ा. आज़ादी मिलने के एक साल के भीतर गांधी को गोली मारी और बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रख दीं और प्रचार किया कि ‘गांधी मुसलमानों का दलाल था और मुसलमान हमारे राम जी का मन्दिर नहीं बनने दे रहे हैं.’




धीरे-धीरे यह झूठ और ज़हर भारत के नौजवानों के दिमाग में भरने में सफल हो गये और अंत में इन्होंने भारत की सत्ता पर कब्जा कर लिया. लेकिन अगर भारत के युवा आज मन्दिर बनाने को अपनी राजनीतिक सफलता मान लेते हैं तो भारत के हिंदू समुदाय के युवा अपने वर्तमान और भविष्य को नष्ट कर लेंगे. कोई भी कौम मजहब के आधार पर आगे नहीं बढ़ती. अब सिर्फ वही कौम बचेगी और आगे बढ़ेगी जो शिक्षा और विज्ञान को अपनायेगी.

मंदिर-मस्जिद पूजा और नमाज किसी भी कौम की कोई भलाई नहीं कर सकते. जो कौम मंदिर मस्जिद पूजा और नमाज में फंसेगी वह कुछ ही समय में खत्म हो जाएगी. और जो कौम शिक्षा और विज्ञान को अपनायेगी वहीं कौम आगे बढ़ेगी और बचेगी. फैसला भारत के हिंदू युवाओं को करना है कि उन्हें अपने वर्तमान और भविष्य को बचाना है या मंदिर पूजा अंधविश्वास और पिछड़ेपन में डूब कर खुद को नष्ट कर लेना है.




Read Also –

रामायण और राम की ऐतिहासिक पड़ताल
लाशों का व्यापारी, वोटों का तस्कर
106वीं विज्ञान कांग्रेस बना अवैज्ञानिक विचारों को फैलाने का साधन
रामराज्य : गुलामी और दासता का पर्याय




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



Tags: अयोध्यातुलसीदासमस्जिदसंघ और भाजपाहिन्दुत्ववादी
Previous Post

लाशों का व्यापारी, वोटों का तस्कर

Next Post

महिला दिवस पर एक नजरिया : एक दिन के सम्मान का औचित्य क्या ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

महिला दिवस पर एक नजरिया : एक दिन के सम्मान का औचित्य क्या ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अमावस की रात

June 7, 2023

प्रतिरक्षण प्रणाली और कोरोना टेस्ट

July 25, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.