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Home लघुकथा

बाजे वाला

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 3, 2021
in लघुकथा
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रणभेरी की गूंज करीब सुनाई दे रही थी. राज्य की जनता में भय का माहौल था. लोग ईश्वर से अपने और परिजनों की जान बचाने के लिए दुआएं कर रहे थे.

‘महराज! जैसी सूचना आई है, शत्रु की सेना हमसे चार गुना विकराल है महाराज !’, सेनापति ने कुछ कांपते, कुछ हांफते हुए कहा.

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महाराज तलवार की मूठ पर हाथ रखे, चेहरा अदा से उठाए हुए चित्रकार से अपना ओजमयी चित्र बनवा रहे थे. उनके मन में ऐसी कोई आशंका नहीं थी. ऐसे कितने ही युद्ध जीत कर वो आज यहां महाराजाधिराज की गद्दी पर पहुंचे थे. मुस्कुराते हुए बोले, ‘चिंता मत करो, जीतेंगे तो हम ही !’, और वापस चित्रकार की तरफ देखने लगे.

‘वे पूरे वर्ष हमारे राज्य की सीमाओं पर खेमें बनाते रहे हैं महाराज. इस बार जीत असंभव है’, सेनापति की माथे पर चिंता की रेखाएं बढ़ती जा रही थीं.

महाराज को टेंशन न लेते देख कोषाध्यक्ष ने आगे बढ़कर कहा, ‘हमारे सैनिकों के पास अस्त्र-शस्त्र और आयुधों की भी भारी कमी है महाराज. आपको अपने नए रंगमहल के निर्माण का काम शीघ्र ही रोक देना चाहिए.’

महाराज मुस्कुराए. उनको लगा कि ये प्रोटोकॉल से ज्यादा बोल रहा है. किंचित मुझे नए कोषाध्यक्ष की जरूरत है. सेनापति की तरफ घूमे, ‘तुम्हारे पास कितना सैनिक बल है ?’

‘महाराज ! पांच हजार घुड़सवार, पांच हजार तीरंदाज, और करीब पंद्रह हजार पैदल दस्ता होगा महाराज.’

‘हम्म !’ महाराज सोचते हुए बोले, ‘और बाजे वाले ?’

भीषण आपदा के बीच बाजे वालों की बात सुनकर सेनापति सकपका गया. जवाब मंत्री ने दिया, ‘महाराज डुगडुगी बजाने वाले और चारण गाने वाले मेरे प्रभार में हैं महाराज. कोई सौ-दौ सौ होंगे.’

‘बहुत बढ़िया. सैनिकों की संख्या आधी कर दो, और बाजे वालों की संख्या बढ़ा दो. सारे बाजे वालों और भांडों की एक सभा बुलाओ. इस समय प्रजा को सकारात्मक होने की जरूरत है.’

‘जी महाराज !’, मंत्री ने शीष नवाया.

‘मगर सैनिकों के भत्ते की व्यवस्था महाराज ?’, कोषाध्यक्ष ने दुबारा प्रोटोकाल तोड़ा.

‘उसकी चिंता मत करो. जीतेंगे तो हम ही’, राजा ने मुस्कुराते हुए कहा.

साथ ही, महाराज के सभी चाहने वालों ने जयकारा लगाया, ‘जीतेंगे तो हम ही.’

महाराज मुस्कुराते हुए अंत:पुर में अपनी सुरा-सुंदरियों के पास चले गए.

( 2 )

अगली सुबह रणभूमि में विचित्र दृश्य हुआ. प्रतिद्वंदी सेना और उसके राजा के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगीं, जब उन्होंने देखा कि सामने से पांच हजार तो केवल बाजे वाले चले आ रहे थे. ‘जब बाजे वाले इतने हैं तो लड़ने वालों की संख्या कितनी होगी ?’, उन्होंने सोचा.

बाजे वालों ने उनकी सेना को चारों तरफ से घेर लिया.

नियम के मुताबिक वे डुगडुगी बजाने वालों को और युद्ध के बाद युद्ध का हाल बताते गीत गाने वालों पर प्रहार नहीं कर सकते थे. बाजे वाले हर विपक्षी सैनिक के पास जाकर गाते, ‘कुछ भी कर लो, जीतेंगे तो हम ही.’ विपक्षी सैनिकों की हालत खराब थी, मगर दूसरा राजा जिम्मेदारियों से नजरें चुराने वाला नहीं था. बाजे वालों की धूल हटी तो देखा कि लड़ने वाले केवल दस हज़ार आ रहे थे.

युद्ध शुरू हुआ. बाजे वालों की चिल्ल-पों में कुछ साफ स्थिति तो नहीं बन पा रही थी, लेकिन रक्तपात शुरू हुआ. जब भी अपना एक सैनिक मरता था, बाजे वाले लाश के चारों ओर खड़े होके डुगडुगी बजाते, ‘कुछ भी कर लो, जीतेंगे तो हम ही.’

घायल सैनिकों को कोई उठाने वाला नहीं था, बाजे वाले उनके पास जाकर कहते, ‘जीतेंगे तो हम ही.’

सेना के पूरी तरह से नेस्तानाबूद हो जाने के बाद, बाजे वाले नगर में जनता के बीच आये. ऊंचे स्वर में गाया, ‘इस महान देश के वासियों चिंता न करें. राजा हमारे इस संकट से निपटने में जी जान से लगे हुए हैं. जीतेंगे तो हम ही.’

विपक्षी सेना जब नगर में घुसी तब बाजे वालों ने गाया, ‘चिंता की कोई बात नहीं है. स्थिति नियंत्रण में है.’

जब विपक्षी सेना ने आम नागरिकों को लूटना शुरू किया, तब बाजे वालों ने गाया, ‘इतने बड़े संकट में थोड़ा बहुत त्याग तो करना ही होगा लेकिन जीतेंगे तो हम ही.’

जब जनता सड़कों पर त्राहि-त्राहि करके मरने लगी तो बाजे वालों ने कहा, ‘अगर इतने महान राजा के राज्य में हम मरे भी तो सीधे बैकुंठ जाएंगे. इसे अपना सौभाग्य समझें.’

राजा अपने आरामगाह में अपनी दूसरी फूल सूंघती तस्वीर बनवा रहे थे. उनके पास संदेश पहुंचा, ‘महाराज विपक्षी सैनिक नगर में प्रवेश कर रहे हैं. राज्य का कोष लूटा जा रहा है.’

राजा मुस्कुराए, ‘राज्य के कोष में तो जनता का ही दिया धन है, हम फिर लूट लेंगे. लूटने दो. जीतेंगे हम ही.’

शत्रु सेना नगर और पूरा खजाना लूट कर चली गई. राजा के सारे सैनिक मारे गए. आम जनता त्राहि-त्राहि करते हुए लुट-पिट गई.

बाजे वाले गाते रहे, ‘जनता ने थोड़ा संकट तो झेला। मगर जीते तो हम ही हैं”

राजा ने बाजे वालों की मदद से फिर से अपना राज्य कायम किया.

पुस्तकों में लिखा गया कि राजा ने कितनी बहादुरी से लड़कर हम सबको जीत दिलाई, साथ में तलवार की मूठ पकड़े उनकी ओजमयी तस्वीर भी छपी.

बच गए लोगों ने राजा का धन्यवाद किया कि अगर वे न होते तो हमारा क्या होता. बाजे वालों ने नए गीत लिखने शुरू किए.

  • शशांक भारतीय

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