Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

बारकोड : उत्पाद संबंधित जानकारी का डिजिटलाइजेशन

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 4, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बारकोड : उत्पाद संबंधित जानकारी का डिजिटलाइजेशन

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

ब्रांडेड हो या अनब्रांडेड, लघु उद्योग हो या शिल्प उद्योग, निर्मित वस्तु कोई भी क्यों न हो अगर वह सेलिंग प्रोडक्ट है तो उस पर बारकोड लिखा होना जरूरी होता है और उस बार कोड में संबंधित सारी जानकारी का डिजिटलाइजेशन रहता है. अतः एक बात हमेशा अपने जहन में रखिये कि किसी भी वस्तु को खरीदने से पहले कुछ और देखे या न देखे मगर बारकोड अवश्य चेक कर लें क्योंकि किसी भी तरह की वस्तु के निर्माण के बाद उस पर संबंधित कम्पनी ही नहीं बल्कि संबंधित देश का बारकोड लगाना भी अनिवार्य होता है. अतः पतंजलि हो या हिंदुस्तान यूनिवर या फिर कोई विदेशी कम्पनी, उस पर बारकोड अवश्य चेक करे क्योंकि इससे आपको ये पता चलेगा कि आप स्वदेशी खरीद रहे हैं या विदेशी (बहुत सारी कम्पनियांं उपभोक्ता को बेवकूफ बना रही है और स्वदेशी के नाम पर विदेश में बने प्रोडक्ट बेच रही है).

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

याद रखे – इंडिया में बनी हुई वस्तु पर 890 बारकोड होगा जबकि दूसरे देश में बनी हुई वस्तु पर उस देश का बारकोड होगा और जिस पर बारकोड न हो समझ लीजिये कि कम्पनी रजिस्टर्ड नहीं है. या तो उसे सरकार से छुपाकर चोरी छुपे बनाया और बेचा जा रहा है या फिर वो स्मगलिंग द्वारा लाया गया माल है, दोनों ही स्थिति में सारा धन काला हो रहा है.

बारकोड को ऑप्टिकल स्कैनर (बारकोड रीडर) से पढ़ा जा सकता है और उसमें से संबंधित देश और कम्पनी की सारी जानकारी निकाली जा सकती है. बारकोड लगाने की दो विधियांं हैंं, जिसमें पहली विधि में समान्तर रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जिसे लाइनर बारकोड कहा जाता है. ये 1D कोड होता है. दूसरी विधि में द्विबीमीय रूप में प्रदर्शित किया जाता है, जिसे QR कोड कहा जाता है और ये 2D कोड होता है.

1D बारकोड का प्रयोग साधारण उत्पादों जैसे साबुन,पेन और मोबाइल इत्यादि में किया जाता है जबकि 2D बारकोड इंटरनेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डिजिटल पेमेंट इत्यादि में प्रयोग किया जाता है और आप इसे आप एंड्रॉयड मोबाइल इत्यादि पर भी स्कैन कर सकते हैं.

चूंंकि कंप्यूटर केवल 0 और 1 की भाषा अर्थात binary कोड को ही समझता है इसीलिये बारकोड को 95 खानों में केवल 0 और 1 के रूप में बांटा जाता है. इन 95 खानों को भी 15 अलग-अलग विभागों में बांटा जाता है, जिनमें 12 खानों में बारकोड लिखा जाता है, जबकि 3 खानों को गार्ड्स के रूप में बांटा जाता है.

बारकोड को बायें से दायें पढ़ा जाता है और पूरे बारकोड में बायें और दायें अलग-अलग नंबर दिये गये होते हैं. बायें हाथ की तरफ 1 की संख्या विषम (3 या 5 बार) होती है जबकि दाई तरफ 1 की संख्या सम (2 या 4 बार) होती है. बायीं तरफ के बारकोड में नंबर 0 से शुरू होकर 1 पर ख़त्म होते हैं, जबकि दायीं तरफ के नंबर 1 से शुरू होकर 0 पर ख़त्म होते हैं.

बारकोड के सबसे दायीं ओर लिखा गया 0 यह बताता है कि यह उत्पाद किस प्रकार का है और क्या यह उत्पाद मांस के बना है या फिर प्लास्टिक से बना हुआ है. यदि इस जगह पर 2 लिखा होता तो इसका मतलब होता कि उत्पाद या तो खाना है या मांस और यदि 3 लिखा होता तो इसका मतलब होता कि उत्पाद फार्मेसी का है (इस बार कोड में सबसे बायीं ओर (लेफ्ट गार्ड के पास) लिखे दो अंक 0 और 5 यह बताते हैं कि उत्पाद किस देश में बना है. बारकोड के दायीं ओर दिया गया अंतिम अंक 7 एक चेक संख्या है जो यह सुनिश्चित करती है कि कंप्यूटर की मदद से इस जानकारी को ठीक से पढ़ा गया है कि नही.

कुछ प्रमुख देशों के बारकोड के बारे में जान लीजिये यथा —

अमेरिका या कनाडा में बने उत्पादों का कोड 00 से लेकर 13 तक है.
फ़्रांस – 30 से 37
जर्मनी – 40 से 44
जापान – 45, 49
रूस – 46
यूनाइटेड किंगडम – 50
नॉर्वे -70
स्वीडन – 73
स्विट्जरलैंड – 76
ऑस्ट्रेलिया – 93
ताइवान – 471
श्रीलंका – 479
फिलीपींस – 480
जॉर्जिया – 486
हांगकांग – 489
चीन – 690 से 692
ब्राजील – 789
सिंगापुर – 888:
भारत – 890

बारकोड आवंटित करने वाली इकाई GS1 (Global Standards One) एक गैर-लाभकारी वैश्विक इकाई है, जो पूरे विश्व में बार कोड का प्रबंधन और मानकीकरण करता है. भारत में, GS1 India की स्थापना वर्ष 1996 में भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा वाणिज्य और उद्योग के प्रमुख चैंबर के गैर-लाभकारी संगठन के रूप में की गई थी लेकिन GS1 India से बारकोड प्राप्त करने के लिये आवश्यक शुल्क के साथ-साथ कुछ दस्तावेज भी पंजीकरण फार्म के साथ जमा करवाने जरूरी होते हैं, जिसमें उत्पाद वर्गीकरण शीट, बैलेंस सीट की कॉपी, प्रोप्राइटरशिप संबंधी कागजात, पैनकार्ड, कम्पनी की स्थिति (भूमि) के प्रमाण या स्थायी पता, वैट संबंधी कागजात, साझेदारी हो तो भागेदारी विलेख, आधारकार्ड आदि-इत्यादि.

चूंंकि GS1 india, GS1 Global के सहयोगी के रूप में भारत में बारकोड को प्रशासित और आवंटित करता है, अतः इसका बारकोड विश्व में कहीं भी स्कैन किया जा सकता है और उपरोक्तानुसार जरूरी प्रक्रिया द्वारा भारत में बारकोड आसानी से प्राप्त भी किया जा सकता है.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

अब यहां से कहां जाएं हम – 3

Next Post

लॉकडाउन : भारत की आर्थिक बर्बादी का न्योता

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

लॉकडाउन : भारत की आर्थिक बर्बादी का न्योता

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अपनी ही अवाम के साथ इतनी घातक-घिनौना षड्यंत्र एक गद्दार ही कर सकता है

April 29, 2021

आरएसएस की पाठशाला से : गुरूजी उवाच – 1

May 11, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.