Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कैशलेस सोसाइटी यानी गुलामी के लिए तैयार रहें

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 28, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कैशलेस सोसाइटी यानी गुलामी के लिए तैयार रहें
कैशलेस सोसाइटी यानी गुलामी के लिए तैयार रहें
girish malviyaगिरीश मालवीय

देश में पहली बार किसी जननेता ने सीधे-सीधे नोटबंदी के लिए पीएम मोदी और बिल गेट्स की दुरभिसंधि को जिम्मेदार ठहराया है. पप्पू यादव ने कहा कि ‘देश में बिल गेट्स के इशारे पर नोटबंदी की गई और फिर बिल गेट्स के ही इशारे पर 2 हजार के नोट को भी बंद कर दिया गया.’

बिल गेट्स के इशारे पर 2016 में नोटबंदी की।
अब उसके ही कहने पर 2000 का नोट भी बंद।

आख़िर यह ग़ुलामी क्यों प्रधानमंत्री जी?

— Pappu Yadav (@pappuyadavjapl) May 20, 2023

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

यह बड़ी बात है. हम जैसे लोगों के बोलने से बात दूर तक नहीं जा पाती लेकिन यदि कोई जनाधार वाला नेता इस तरह से सच्चाई को जनता के समक्ष प्रस्तुत करता है तो बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान इस तरफ आकृष्ट होता है.

सितंबर, 2012 में दुनिया में ‘बेटर दैन कैश एलायंस’ लॉन्च किया गया. माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स इस एलाइंस के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हैं. नोटबंदी के ठीक एक साल पहले भारत 2015 में इसका सदस्य बना. यह अलाएंस कैश यानी नकदी को बुरा बताता है.

कैशलेस सोसायटी की स्थापना इसका मुख्य उद्देश्य है. यह कहता है कि कई कारणों से नकदी छापना, उसकी निगरानी, भंडारण, चलन को नियंत्रित करना महंगा है और इससे भी बढ़कर कैशलेस सोसायटी सरकारों को जनता पर और अधिक नियंत्रण का मौका देता है.

मजे की बात यह है कि भारत में जब बड़ी नोटबंदी हुई तो दिसम्बर 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी ने एक खास तरह के नोटबुक में छपे अपने संदेश के द्वारा यह आह्वान किया कि ‘हर व्यक्ति को रोज एक से दो घंटे का समय कैशलेस समाज के बारे में सूचनाओं के प्रसार में देना चाहिए. हर दिन इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में दस लोगों को शिक्षित किया जाना चाहिए.’

बिलकुल स्पष्ट है कि नरेंद्र मोदी किनके हाथो मे खेल रहे थे और हैं. दरअसल आज की दुनिया में कैश ही ऐसी ताकत बची है जिसे सरकारें नियंत्रित नहीं कर सकतीं, इसलिए वे इसका खात्मा करना जरूरी समझती है.

दिसम्बर 2015 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और यूएसएआईडी ने संयुक्त रूप से वाशिंगटन में एक वित्तीय समावेशन फ़ोरम आयोजित किया. इस फोरम में बिल गेट्स ने कहा – ‘अर्थव्यवस्था का पूरी तरह डिजिटाइजेशन विकासशील देशों में अन्य जगहों के मुकाबले तेज रफ़्तार से हो सकता है. निश्चित रूप से यह हमारा लक्ष्य है कि हम आने वाले तीन सालों में बड़े विकासशील देशों में इसे सम्भव बनाएं.’

भारत ने 01 सितम्बर 2015 को ‘बेटर दैन कैश एलायंस’ संगठन की सदस्यता ली. तब तक वित्तीय समावेशन के लिए मोदी की प्रधानमंत्री जन-धन योजना की शुरुआत हुए एक साल हो चुका था. भारत में बैंक नोट को माता लक्ष्मी की संज्ञा दी जाती है लेकिन बाकी दुनियां में ऐसी कोई मान्यता नहीं है.

युरोप अमेरिका में प्लास्टिक मनी बहुत पहले से प्रचलन में आ चुकी है. वहां तो आज काफ़ी हद तक कैश के चलन पर लगाम भी लगा दी गईं हैं लेकिन भारत में आज भी बड़े पैमाने पर नकद का इस्तेमाल होता है.

नकद का इस्तेमाल बैंकों को भी भारी पड़ता है. बैंक पैसा कमाने की बजाय नगद का प्रबंधन करने में लग जाते हैं जबकि डिजिटल लेन-देन उनके लिए ब्रेड बटर के समान है. स्वीडन नॉर्वे जैसे देशों में तो आज यह हालत है कि वहा नकदी संभालने वाली कुछ ही बैंक शाखाएं रह गई हैं. सब कुछ डिजीटल हो चुका है.

एक खास बात और है कि बैंक डूबने की हालत में लोग उस बैंक से अपना पैसा कैश के रुप में निकाल सकते हैं लेकिन यदि समाज ही कैशलैस हो जाए तो उन्हें इस तरह से कैश निकालना फिजूल ही लगने लगेगा, लिहाजा वो इस व्यवस्था के साथ बंधकर रह जाएंगे…!

बहुत सोच समझ कर यह परिवर्तन लाया जा रहा है. यदि आज भी हम नहीं चेते तो 2030 तक इनके हम पूरी तरह से गुलाम बन चुके होंगे.

Read Also –

नोटबंदी के 6 साल : कैशलेस से डिजीटल करेंसी यानी सम्पूर्ण नियंत्रण : चौतरफा नियंत्रण
‘भारत कैसे बिल गेट्स का गिनी पिग बन गया ?’ – डॉ. नॉर्बर्ट हैरिंग
न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का डिजिटल करेंसी यानी सम्पूर्ण नियंत्रण : चौतरफा नियंत्रण
क्या है यह ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ व्यवस्था ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

परमवीर जाट और बाबा का आश्रम

Next Post

नेहरू झंडे की डोर खींच रहे थे…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

नेहरू झंडे की डोर खींच रहे थे...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आप कौन से वर्ग में आते हैं ?

October 7, 2020

5. ऑपरेशन कगार : निगमीकरण, सैन्यीकरण और हिंदुत्व

January 5, 2026

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.