Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भाजपा इवीएम के दम पर हर जगह चुनाव जीतेगी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 17, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी

अर्णव गोस्वामी के लिए कोर्ट रात 12 बजे खुल सकता है, लेकिन केजरीवाल को बेवजह दो महीने जेल में रहना होगा और कोर्ट 29 अप्रैल के पहले ज़मानत पर फ़ैसला नहीं कर सकती है. यानी जो मोदी का कुत्ता नहीं है, सुप्रीम कोर्ट उसके लिए नहीं बना है, फिर इस कोर्ट की ज़रूरत क्या है ?

आप कहेंगे कि संजय सिंह को तो ज़मानत मिली ? दरअसल यह ठीक वैसी ही बात है जैसे कि तेलंगाना देकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को ईवीएम से ले लिया जाए ताकि शुचिता का वहम बना रहे.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

नव फासीवाद को डिकोड करने के लिए आपको न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका की भूमिका को एक लाईन में खड़े कर देखना होगा. लोकतंत्र पर ग्रहण ऐसे ही नहीं लगता है, चांद, सूरज और पृथ्वी को एक सीधी रेखा में आना पड़ता है. ये अलग बात है कि अंधेरे में आपको कुछ सूझता नहीं है, क्योंकि आपकी फासीवाद की समझ सीमित है.

फासीवाद की सीमित समझ के पीछे आपकी वैचारिक शून्यता है और उसके लिए ज़िम्मेदार आपका पूंजीवादी व्यवस्था पर विश्वास है. पूंजीवादी लोकतंत्र पर विश्वास के लिए आपके निहित स्वार्थों की रक्षा के लिए जद्दोजहद है.

यह स्थिति आपके कम होते नागरिक होने की निशानी है जो कि अंततोगत्वा आपको कम मनुष्य बना देता है. ऐसे में अगर आंशिक नागरिक और आंशिक मनुष्यों के देश में फासीवाद आ जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है.

इसकी एक झलक आप गोबर पट्टी के तथाकथित बुद्धिजीवी पत्रकारों (एकाध अपवादों को छोड़कर) की राजनीतिक चर्चाओं में देख सकते हैं. वे अभी तक 2019 के चुनाव में इवीएम धांधली पर नहीं बोलते हैं, जबकि क़रीब 350 सीटों पर इवीएम में पड़े वोटों और गिने गए वोटों के बीच अंतर पाया गया है.

गोबर बुद्धिजीवी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव के बाद इवीएम पर शक जता रहे थे, फिर इनके मुंह में पैसे ठूंस दिये गये और अब वे चुनाव के आख़िरी हफ़्ते में भाजपा के मास मोबिलाईजेशन की तारीफ़ करते हुए नहीं थकते हैं. यू ट्यूब पर दुकानदारी चल रही है और आपको लगता है कि ये गधे मोदी विरोधी हैं.

दरअसल आप गधे हैं कि इनको फासीवाद विरोधी समझ बैठे हैं. इनका मोदी विरोध सिर्फ़ इसलिए है कि कहीं तीसरी बार जीतने पर नये क़ानून के तहत इनकी दुकानदारी न बंद हो जाए.

तथाकथित मुख्यधारा की मीडिया में कोई दोगलापन नहीं है. वे स्वघोषित नंगे हैं मोदी की तरह. ऐसे में यह आशा करना कि न्यायपालिका देश में लोकतंत्र पुनर्बहाली के लिए ठोस कदम उठाएगी, एक दिवास्वप्न है.

दो दिनों बाद से आम चुनाव शुरु हो रहे हैं. हर तरफ़ क्रुद्ध राजपूत, जाट और अन्य लॉबी की बात हो रही है. भाजपा की बड़ी हार की बात पहले चरण में होने की संभावनाएं जताईं जा रही हैं.

मेरे आज की बातों को सेव कर रख लीजिए, भाजपा इवीएम के दम पर हर जगह जीतेगी. 4  जून के बाद गोबर पट्टी का समानांतर प्रेस फिर से भाजपा के बूथ मैनेजमेंट की प्रशंसा में लहालोट होगी. कोई नहीं पूछेगा कि भाजपा के वे नेता भी कैसे जीत गये जिनका खदेड़ा हो रहा था.

जनता को ज़्यादा से ज़्यादा वोट देने की अपील इसी फासीवाद को मान्यता या validity देने का आह्वान है. ऐसे में एक अच्छी ख़बर ये है कि सिर्फ़ 38% फ़र्स्ट टाईम वोटरों ने ही वोटर कार्ड लिया है. मतलब एक नौजवान पीढ़ी तैयार हो रही है, जिसका विश्वास चुनावी लोकतंत्र में नहीं रह गया है.

अब वे विशुद्ध लुंपेन हैं या चारु मजूमदार के अचेतन समर्थक हैं, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इस मोहभंग की स्थिति का राजनीतिक फ़ायदा कोई भी ले सकता है, फ़ासिस्ट भी और कम्युनिस्ट भी.

ख़ैर, एक काल्पनिक चरित्र के पीछे मरे पड़े गोबर पट्टी के लोगों के लिए यह सब कोई समस्या नहीं है.  आप एक ही साथ राजा राम के राजतंत्र की पूजा करेंगे और दूसरी तरफ़ लोकतंत्र के प्रहरी बनेंगे, ऐसा तो हो नहीं सकता है. बौद्धिक दोगलापन आपको कहीं का नहीं छोड़ता है.

Read Also –

2024 का चुनाव (?) भारत के इतिहास में सबसे ज़्यादा हिंसक और धांधली से होने की प्रचंड संभावनाओं से लैस है
आगामी लोकसभा चुनाव में जीत के लिए फासिस्ट इतना बेताब क्यों है ?
चुनावी फ़ायदे और अपनी नाकामी छुपाने के लिए किसी की हत्या करवाना लोकतंत्र का मज़ाक़ है
फासिस्ट चुनाव के जरिए आता है, पर उसे युद्ध के जरिये ही खत्म कर सकते हैं
आरएसएस – देश का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Tags: अरविन्द केजरीवालचारु मजुमदारचुनावनरेन्द्र मोदीलोकतंत्रसुप्रीम कोर्ट
Previous Post

18वीं लोकसभा चुनाव : मोदी सरकार के 10 साल, वादे और हक़ीक़त

Next Post

अंबेडकर की वैचारिक यात्रा को कैसे समझा जाए ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

अंबेडकर की वैचारिक यात्रा को कैसे समझा जाए ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बेचारों का हिंदू राष्ट्र

January 14, 2022

माफीवीर सावरकर ‘वीर’ कैसे ?

May 29, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.