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मजदूरों की पहचान ‘माईग्रेंट’ के रूप में … ताकि व्यवस्था पर कोई सवाल ना हो

हम जिस गांंव में रहते हैं वहांं मेरी दस पीढ़ियांं गुजर गयी होंगी. उस गांंव में मेरे खानदान के आने...

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आजाद भारत में कामगारों के विरुद्ध ऐसी कोई सरकार नहीं आई थी

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना दुनिया के कई देशों की तरह हमारे देश के भी प्राइवेट सेक्टर के...

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खतरे में धर्म की इंडस्ट्री : राहत पैकेज की मांग

मजदूरों, दुकानदार, व्यवसायियों और फैक्ट्री मालिक आदि का सरकार पूरा ख्याल रख रही है. इनके पुनर्वास तथा कारोबार को पटरी...

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आत्मनिर्भरता वाला भाषण दरअसल निरंंकुशता और अराजकता का आह्वान था

कई विकलांग और बीमार लोग पैदल ही दिल्ली-मुुुंबई से चले और अपने घर पहुंंच गए. उसी दिल्ली-मुंबई से ट्रेनें चली...

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आंकड़ों की बाजीगरी और ‘आत्मनिर्भर भारत’

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना नरेंद्र मोदी की जो कार्यशैली है, उसमें उम्मीद नहीं कि वे रघुराम राजन और...

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लंबी लेख पढ़ने की आदत डाल लीजिए वरना दिक्कतें लंबे लेख में बदल जायेगी

रविश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त जन पत्रकार क्या सरकार ने देह से दूरी के अनिवार्य सिद्धांत का त्याग कर सबको...

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