कई दिनों से लगातार ट्रेन में सफर कर रहा हूं. रात में अपनी सीट पर बैठा था तो दो लड़के...
Read moreDetailsमैं अंधभक्तों की आंख तो नहीं खोल सकता लेकिन चाहता हूंं कि वे थोड़ी तर्क शक्ति का इस्तेमाल कर नीचे...
Read moreDetailsएक कहावत है "चिराग तले अंधेरा" ऐसा लगता है कि यह कहावत आज की पत्रकारिता और उसके पत्रकारों के लिए...
Read moreDetailsदूसरे विश्वयुद्ध के दौरान फासिस्ट जर्मनी पर एक प्रसिद्ध कार्टून पिछले दो आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक...
Read moreDetailsइस लेख में प्रस्तुत आंकड़ें “लीगल एड” संस्था के शोध के आधार पर 2012 की स्थिति के आंकड़ेंं है. नक्सली...
Read moreDetailsकर्नाटक में राजनीतिक उठापटक का पहला अध्याय समाप्त हो गया. इसमें सुप्रीम कोर्ट की भूमिका निर्णायक बन गयी, अन्यथा राज्यपाल...
Read moreDetails“हम और हमारी परिभाषित राष्ट्रीयता” (We or 0ur Nationhood Defined) नाम की अपनी पुस्तक के आमुख में “गुरूजी” लिखते हैं:...
Read moreDetailsसरकार नक्सलियों को आतंकवादियों के रूप में संदर्भित कर राज्य के खिलाफ हिंसा करने के लिए उन्हें दोषी ठहरा झूठे...
Read moreDetailsराजनीति विज्ञानी डॉ लारेंस ब्रिट ने कुछ वर्ष पहले फासिज़्म के बारे में एक लेख लिखा ("Fascism Anyone?," Free Inquiry,...
Read moreDetailsडीयर सरदाना, अंजना, अवस्थी व अर्नब, कुछ संघी गुंडे पुलिस संरक्षण के साथ जैसा कि सामने आए वीडियो में साफ-साफ...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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