एक शुद्ध 'कामरेड' का शुद्ध गीत 'कामरेड' को हर चीज शुद्ध चाहिए चाहे वह चाय हो या क्रांति थोड़ी चीनी...
Read moreDetailsअर्द्धनारीश्वर स्त्री व पुरूष, दोनों ही जन्म से , अर्द्ध नारीश्वर होते हैं, पुरूषों का स्त्रीत्व, धीरे धीरे कुचला गया....
Read moreDetailsमगध के लोग मगध के लोग मृतकों की हड्डियां चुन रहे हैं कौन-सी अशोक की हैं ? और चन्द्रगुप्त की...
Read moreDetailsमार्क्स जब क्रांतियां मार्क्स की आंखों के सामने एक एक कर 'पराजित' हो चुकी थी ! जब मार्क्स का अपना...
Read moreDetailsअपनी सामाजिक सुरक्षाओं के साथ वह उदास थे और व्यवस्था के आसपास भिनभिना रहे थे बासी जलेबी पर मक्खियों की...
Read moreDetailsक्रिकेट की ख़बरों के बीच अचानक एक अंग्रेज़ी हिंदी शब्दकोश मिल गया उसमें क्रिकेट का अर्थ झींगुर दिखा और तभी...
Read moreDetailsबुझ गई होगी टीवी स्क्रीन पर वह चिता. अख़बार के पन्नों की लग चुकी होंगी तहें टीवी एंकर गरम पानी...
Read moreDetailsरहस्य की तरह आग भीषण आग चारों तरफ आग आग के बीच द्वीप द्वीप के बीच नदी अनेकों द्वीप के...
Read moreDetailsमार रही है लोकवेद को भद्रजनों की अदाकारियां, ओछी बिछा बिसात बिखेरी अधकचरी कुछ जानकारियां. हमको रखा निरक्षर, लेकिन इनसे...
Read moreDetailsहे अन्तरयामी ! अंतिम और परम सत्यवादी ! आओ ! हम सबकी आत्माओं में झांको ! बताओ कि हमारी आत्मा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.