वे उभारेंगे 'आदिकवि' वाल्मीकि को और चर्चा जन-जन तक पहुंचा देंगे कि वाल्मीकि भी पहले एक 'डाकू' थे और चुटकियों...
Read moreDetailsकोई भगवान हो तो मुझे क्या पता लेकिन इंसान की कुछ और बात है जो तुमको पता है, वो हमको...
Read moreDetailsवो लौट रहे हैं वो लौट रहे हैं विजय नारों की गूंज होकर जैसे महीनों पहले वो आये थे वो...
Read moreDetailsमैं ढूंढना चाहता था इस पृथ्वी पर बेशुमार गिरे हुए बेहिस बेहया लोगों के बीच अपने लिए भी गिरने की...
Read moreDetailsयह किताबों को कंठस्थ करने का समय है क्योंकि किताबों को जलाने का आदेश कभी भी आ सकता है. तानाशाह...
Read moreDetailsअसंख्य कहानियां बुनी जा रही हैं मेरे इर्द-गिर्द कुछ ज्ञात और कुछ अज्ञात लिपियों में ज्ञात लिपियों के निश्चित चेहरे...
Read moreDetailsहां सही कह रहे हो तुम रवीश कुमार ! हिटलर सिर्फ़ हिटलर में नहीं होता हिटलर सिर्फ़ जर्मनी में नहीं...
Read moreDetailsमेरे बच्चे मुग़ालते में जी रहे हैं उनको अब भी यक़ीन है सबसे सुंदर कविता अभी लिखी जानी बाक़ी है...
Read moreDetailsमिस्र के विद्रोही कवि अहमद फ़ौआद नेग़्म की कुछ कविताएं 1 सूर्य ऊपर वैसे ही चमकता है जैसे हमारे यहां...
Read moreDetailsडर डरकर जो लिखते हैं फटी फटी सी रहती है तिलकधारी जैसी चेता में रचना रचते हैं स्त्री दलित रचना...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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