हमने बनाई इमारत, हमें क्या मिला ? हमने सजाई दुनिया, हमें क्या मिला ? मालिकों को मिली बेशुमार दौलत भुखमरी...
Read moreDetailsईरान के पेंटर इमान मलेकी की पेंटिंग मैं एक औरत हूं ईरानी औरत रात के आठ बजे हैं यहां ख़याबान...
Read moreDetailsमलखान सिंह और उनकी कविताएं इधर मुकाबले में पहले के ब्राह्मण से आज का ब्राह्मण भिन्न हुआ है. स्वीकार-अस्वीकार के...
Read moreDetailsनौ साल की लड़की क्या नौ साल की लड़की अपने साथ बलात्कार होने का सपना देख सकती है सपने में...
Read moreDetailsसूरज के पार काना हो जाता है मेरा शहर रोशनी के लट्टुओं के दिन लद गए हैं अब बित्ते भर...
Read moreDetailsबहुजन बहुजन के भजन में गोपाला बहुजन है कहां आज भी ये आदमी नही राजा के मदारियों के बंदर भालू...
Read moreDetailsव्यवस्था राजा राम की है वह शम्बूक का वध करे सीता का परित्याग करे तो भी यह सब राजधर्म है...
Read moreDetailsजबसे मुझे काल कोठरी में फेंका गया है - तुर्की के महान कवि नाज़िम हिकमत पृथ्वी सूर्य के दस चक्कर...
Read moreDetailsकिसकी है जनवरी, किसका अगस्त है ? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है ? सेठ है, शोषक है,...
Read moreDetailsबिलकिस बानो ! क्या क्या नहीं देखा तुम्हारी इन आंखों ने चारों ओर बस खून और लाशें नीम बेहोशी में...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.