एक बार एक हंस और हंसिनी सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये....
Read moreDetailsकनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ वह रोज़ आती है. आती क्या, साथ रहती है. उसे अपनी आंखों से...
Read moreDetailsअगर आपने जैक लण्डन को नहीं पढ़ा तो आप विश्व साहित्य की एक महान विरासत से वंचित हैं. भगत सिंह...
Read moreDetailsरणभेरी की गूंज करीब सुनाई दे रही थी. राज्य की जनता में भय का माहौल था. लोग ईश्वर से अपने...
Read moreDetails1969 में इंदिरा गांधी ने किया था बैंकों का राष्ट्रीयकरण. जो बैंक राष्ट्रीयकृत हुए थे उनमें से एक था सेन्ट्रल...
Read moreDetailsपत्रकार : रिहाना ने भारत के अंदरूनी मामले में दख़ल दी है, आपका क्या कहना है इस पर ?? चौधरी...
Read moreDetailsअरे अंडू, कैसा है ?? ठीक है कर्जा ज्यादा हो गया है. कोई नई दुकान खुलवा दो. पेट नहीं भरता...
Read moreDetailsस्क्रिप्ट किसी गधे ने लिखा है. सीन 1 लांग शॉट में हावड़ा ब्रिज, भागती हुई सवारियां. बैक ग्राउंड से सायरन...
Read moreDetailsदेश की राजधानी दिल्ली के विहंगम प्रधान क्रिमिनल आवास की एक मनहूस सुबह. पोर्श में एक-एक कर पांंच गाड़ियांं आकर...
Read moreDetails'हट छिनाल, ऐसे क्या देख रही है ?' बत्तीस वर्षीय मोना को अपनी हमउम्र कामवाली सरिता का उसकी तरफ़ तिरछी...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.