Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

क्रांति का जरूरी हथियार छोड़ रहे कामरेड

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 23, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
क्रांति का जरूरी हथियार छोड़ रहे कामरेड
क्रांति का जरूरी हथियार छोड़ रहे कामरेड
कमलेश

लगभग एक साल पहले भाकपा माले के एक कार्यकर्ता से बात हो रही थी. वे छात्र संगठन के मोर्चे पर काम करते हैं. बातचीत के ही दौरान भाकपा माले के उन शहीदों क़ी चर्चा होने लगी, जिन्होंने किसान अन्दोलनों के झंझावातों का नेतृत्व किया था. मैं यह देख कर हैरत में पड़ गया कि उन्हें अपने कई शहीद नेताओं के बारे में पता नहीं था. मसलन वे कमांडर बूटन मुसहर के बारे में कुछ ज्यादा नहीं जानते थे.

मेरे लिए आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने कहा कि उन्होंने बिहार के धधकते खेत खलिहान नहीं पढ़ी है. मैंने उनसे साफ कहा – ऐसे तो क्रांति नहीं होगी कामरेड. आपको पढना-लिखना तो पड़ेगा. हालांकि उन्होंने बड़ी विनम्रता से स्वीकार किया क़ि वे जबसे संगठन में आये हैं तब से लगातार आंदोलनों में व्यस्त हैं. पढने का समय नहीं मिल पा रहा है, लेकिन उस नौजवान कार्यकर्ता ने यह भरोसा दिलाया कि वे जल्दी ही बिहार में कम्युनिस्ट पार्टी के आन्दोलन के बारे पढेंगे और अपनी पार्टी के आन्दोलन के बारे में जरूर पढेंगे. उस घटना के बाद उनसे मुलाकात नहीं हो पाई है लेकिन मैं यह उम्मीद तो कर ही सकता हूँ कि उन्होंने पढाई-लिखाई जरूर क़ी होगी.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

यह अकेले भाकपा माले क़ी बात नहीं है. परंपरागत कम्युनिस्ट पार्टियों क़ी हालत तो और ख़राब है. एक तो इन संगठनों में नए कार्यकर्ता आ नहीं रहे हैं और आ भी रहे हैं तो उनकी ट्रेनिंग या पढाई- लिखाई नहीं हो पा रही है. जिस समय सिंगुर और नंदीग्राम को लेकर कम्युनिस्ट पार्टियों के भीतर देश भर में बहस चल रही थी, उस समय मैं बिहार में सीपीआइ के गढ़ बेगुसराय में था. मैं यह देखकर चकित था कि कार्यकर्ता इस मसले पर अपनी बातों को ठीक से नहीं रख पा रहे थे.

मैंने जब एक कार्यकर्ता से पूछा कि उसने अपनी पार्टी का लिटरेचेर पढ़ा है या नहीं तो उसने कहा कि एक तो लिटरेचेर देर से आते हैं और नेताओं के पास आते हैं. उन्हें पढने के लिए ये लिटरेचेर काफी देर से मिल पाते हैं. किताबें तो पढने क़ी बात ही पूछनी बेकार थी.

एक बार पटना में सीपीआई के छात्र संगठन एआईएसएफ का प्रदर्शन था. इस प्रदर्शन में आगे/आगे कुछ मुस्लिम छात्राएं चल रही थी. इन छात्राओं ने बुरके पहन रखे थे. एआईएसएफ के एक प्रदेश स्तर के नेता से जब इसके बारे में पुछा गया तो उन्होंने चकित कर दिया. वे पूछने वाले से ही पूछ बैठे कि पर्दा प्रथा में खराबी क्या है. मात्र यही नहीं वे पर्दा प्रथा के समर्थन में तर्क भी देने लगे. अब एक वामपंथी छात्र संगठन का नेता ऐसे तर्क दे तो आप इसे क्या कहेंगे !

पुराने लोगों को याद होगा कि पटना में अमरनाथ रोड में कभी किताबों क़ी एक दुकान हुआ करती थी. पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस क़ी वह दुकान थी. मुझे याद है कि एक दौर में यह दुकान कम्युनिस्ट पार्टियों के युवा कार्यकर्ताओं क़ी गढ़ थी. यहां विभिन्न कम्युनिस्ट पार्टियों के कार्यकर्ता तो आते ही थे, कई नक्सली व अन्य वामपंथी जनसंगठनों के कार्यकर्ता भी आते थे. संगठन अपने सदस्यों के चंदे से ढेर सारी किताबें खरीदते थे. इसके बाद उन किताबों को सदस्यों के बीच पढने के लिए दिया जाता था.

उस दुकान पर भी आने वाले कार्यकर्ता इतनी जीवंत बहसें करते थे कि सुनने के लिए कई बार भीड़ लग जाती थी. मुझे याद हैं- एक दिन इस दुकान पर कुछ कार्यकर्ता बहस कर रहे थे और उन्हें सुनने के लिए भीड़ जुट गयी थी. एक आदमी ने कहा था- ई सब इतना तेज होकर अपना कैरियर बर्बाद कर रहा है, ई सब को इन्तेहान देकर अफसर बनना चाहिए. उस आदमी क़ी प्रतिक्रिया पर कितनी हंसी गूंजी थी. लेकिन अब वह दुकान बंद हो चुकी है. जिस भवन में यह दुकान थी वहां अब एक होटल खुल गया है.

भागलपुर में एक नक्सली संगठन से जुड़े छात्र संगठन की ओर से स्टडी ग्रुप चलाया जाता था. हर हफ्ते होने वाले इसके डिस्कसन सत्र में भाग लेने के लिए भागलपुर विश्वविद्यालय के कई शिक्षक भी आते थे. कई बार तो पटना के भी छात्र वहां पहुंचते थे. लगभग हर शहर से छात्र-युवा संगठन पत्रिकाएं निकलते थे. लेकिन अब तो न कार्यकर्ता पढ़ते हैं और न नेता पढने देना चाहते हैं. क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि कम्युनिस्ट पार्टियों को अपने कार्यकर्ताओं की पढाई-लिखाई पर भी थोड़ा ध्यान देना चाहिए ?

Read Also –

अंतोनियो ग्राम्शी : परिचय एवं राजनीतिक विचार
छात्रों पर हमला : पढ़ाई करने और पढ़ाई न करने देने वालों के बीच
विचार ही बदलते हैं दुनिया को…
हीरामनी उर्फ आशा को सजा सुनाते हुए माओवादी आंदोलन पर फासीवादी टिप्पणी से न्यायपालिका आखिर क्या साबित करना चाह रही है ?
बीजापुर में आदिवासियों के शांतिपूर्ण आन्दोलन पर पुलिसिया हमला पर मानवाधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी से साक्षात्कार 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

असली टुकड़े-टुकड़े गैंग कौन है ?

Next Post

स्त्री मुक्ति किसे कहते हैं ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

स्त्री मुक्ति किसे कहते हैं ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मार्क्स के जन्मदिन पर विशेष : मार्क्स की स्‍मृतियां – पॉल लाफार्ज

May 6, 2022

कश्मीरी ब्राह्मण संघ, भाजपा और मोदी सरकार के लिए सिर्फ राजनीति के मोहरे भर हैं

October 28, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.