Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

दांतेवाड़ा का ‘मितानिन’ कार्यक्रम, जो भारत की ‘आशा’ बनी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 15, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

दांतेवाड़ा का 'मितानिन' कार्यक्रम, जो भारत की 'आशा' बनी

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, गांधीवादी चिंतक

गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने के लिए गांव के ही लोगों को तैयार किया जाए, इस विचार के साथ सबसे पहले छत्तीसगढ़ में मितानिन कार्यक्रम शुरू हुआ था. डॉक्टर सुंदर रमन और उनकी टीम ने काम की शुरुआत की. डॉक्टर बिनायक सेन, इलीना सेन और बहुत सारे सामाजिक कार्यकर्ता भी इसमें जुड़े. बाद में तो भाजपा सरकार ने इन्हीं डॉ. बिनायक सेन को जेल में डाल दिया और उम्रकैद की सजा सुना दी थी.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

हमारी संस्था ने दंतेवाड़ा जिले के दो ब्लॉक में इस कार्यक्रम को चलाने की जिम्मेदारी ली थी. बाद में भारत सरकार ने इस कार्यक्रम को ‘आशा’ के नाम से सारे भारत में लागू किया. लेकिन ‘मितानिन’ और ‘आशा’ में यह फर्क है कि आशा को सरकारी प्रक्रिया के द्वारा एक गांव के लिए एक आशा कार्यकर्ता नियुक्त की जाती है, जबकि ‘मितानिन’ का चयन गांव के लोग एक पारा के लिए जिसे मजरा टोला मोहल्ला या ढाणी कहा जाता है, खुद करते थे.

हम लोगों ने इन मितानिनों के साथ उनकी जागरूकता सूचना और उनके साथ कार्य करके एक ऐसी स्थिति पैदा की थी कि हमारे दोनों ब्लॉक में एक भी बाल मृत्यु की घटना होनी बंद हो गई. जन्म देते समय माताओं की मृत्यु शून्य पर पहुंच गई थी.

हमने मितानिनों को अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया था. कई संस्थाओं में संस्थाएं समुदाय का नेतृत्व करती हैं लेकिन हमारे यहां गांव की महिलाएं आगे आगे चलती थी और हमें पीछे पीछे चलना होता था.

गांव की महिलाएं अस्पताल में दवाई ना मिलने पर या जच्चा के लिए समय पर गाड़ी एंबुलेंस ना पहुंचने पर या किसी स्वास्थ्य कार्यकर्ता या डॉक्टर के द्वारा पैसा मांगने पर रैली करना धरना प्रदर्शन करना, अधिकारियों से मिलकर जोरदार तरीके से अपनी बात रखती थी. इस सब से परेशान होकर कई बार सरकारी अधिकारी कहते थे दंतेवाड़ा में मितानिन कार्यक्रम नक्सलाइट लोग चला रहे हैं.

हम लोगों के साथ उस समय जो महिलाएं जुड़ी थी, आज भी वे अपना काम बखूबी कर रही हैं. गांव में आपको डॉक्टर की जरूरत नहीं होती और डॉक्टर जो काम कर सकता है, वहीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी कर सकती है. गांव में बुखार, दस्त, चर्म रोग से ज्यादा बड़े रोगों का इलाज डॉक्टर भी नहीं कर सकते. इसके अलावा किसी भी बीमारी के लिए उन्हें भी बड़े अस्पताल की जरूरत पड़ती है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भयानक अनदेखी की जा रही है.

एक तरफ बढ़ती बेरोजगारी के कारण लोगों के आय में कमी आई है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लगातार कमजोर किया जा रहा है, उससे लोगों का पोषण स्तर गिर रहा है. दूसरी तरफ स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राइवेटाइजेशन को बढ़ाया जा रहा है. देश की जनता को अगर आप मुनाफा कमाने की चीज समझ लेंगे तो आपके हाथों उसकी दुर्गति होना तय है.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

ईश्वर और किसान

Next Post

मुनाफाखोरी की होड़ से औद्योगिक हादसों में तबाह होते मज़दूर

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

मुनाफाखोरी की होड़ से औद्योगिक हादसों में तबाह होते मज़दूर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी सरकार का एकमात्र लक्ष्य है अदानी का कारोबार बढ़ाना

June 16, 2022

कॉमरेड जीसस को लाल सलाम !

December 31, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.