Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

दिल्ली के दोनों छात्र संघ चुनाव का आदेश पतनशील भाजपा और उसकी संदिग्ध ईवीएम के खिलाफ है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 15, 2017
in ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

दिल्ली के जेएनयू और डीयू छात्र संघ के चुनाव में प्रतिगामी ताकत भारतीय जनता पार्टी के छात्र ईकाई एवीबीपी को जिस प्रकार छात्रों के आक्रोश का सामना करना पड़ा और उसे नेतृत्वकारी निकायों से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, वह भारतीय जनता पार्टी के प्रति देशभर का रूझान का प्रतिनिधित्व करता है. जेएनयू देश भर में फैले हुए किसान, मजदूर, बुद्धिजीवियों व जनवाद पसंद प्रगतिशील छात्र ताकतों का प्रतिनिधित्व करता है, तो वहीं डीयू उत्तर भारत के छात्रों का प्रतिनिधित्व करता है क्योंकि डीयू में ज्यादातर उत्तर भारत के छात्र पढ़ने जाते हैं.

जेएनयू और डीयू छात्र संघ में भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन एवीबीपी की हार इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इन शिक्षण संस्थानों में मोदी के प्रतिगामी नीतियों पर खुलकर बहस होती है और इन चुनावों में एवीबीपी की पराजय, मोदी के नीतियों की पराजय के रूप में देखा जाना चाहिए. महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है की इन छात्रों के बौद्धिक और नैतिक बहसों में जाने-अनजाने आज समूचा देश शामिल हो गया है.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

जेएनयू और डीयू के छात्र संघ के चुनाव में एवीबीपी की पराजय का सबसे गहरा संदेश इस बात में जाता है कि यहां मतदान संदिग्ध ईवीएम के वजाय मतपत्रों से किया गया था. उत्तर प्रदेश में भाजपा की विशाल जीत ने ईवीएम को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था क्योंकि धरातल पर जिस प्रकार ध्रुवीकरण हो रहा था वह भाजपा के पक्ष में तो कतई नहीं था. परन्तु अचानक ईवीएम से भाजपा के पक्ष में जिस प्रकार ईवीएम से आदेश निकल कर सामने आया, वह स्वाभाविक नहीं था. ईवीएम के खिलाफ देश भर में सवाल उठने और उसकी जांच कराये जाने की मांग को जिस प्रकार चुनाव आयोग ने न केवल अनसुना ही कर दिया वरन् ‘अंधे धृतराष्ट्र’ की भांति ईवीएम के पक्ष में अड़ा रहा, वह देश की निगाह में खुद चुनाव आयोग ही भाजपा के दलाल के रूप में साबित कर गया.

दिल्ली के छात्र संघों का यह जनादेश ईवीएम के खिलाफ इसलिए भी जाता है कि उत्तर प्रदेश में अस्वाभाविक तौर पर जीत के बाद जहां कहीं भी मतपत्रों के माध्यम से चुनाव हुई और भाजपा ने उसमें भाग लिया, उसे पराजय ही हाथ लगी है, चाहे बंगाल हो या गुजरात अथवा स्वयं दिल्ली के बाबना या फिर राजस्थान छात्र संघ का चुनाव हो. भाजपा की मतपत्रों के माध्यम से हुई लगातार हार ने यह साबित कर दिया है कि ईवीएम फर्जी है. वह देश की जनता के जनादेश का प्रतिनिधित्व कतई नहीं करता. जिस प्रकार सारी दुनिया ने ईवीएम को कबाड़ में फेंक दिया है, भारत में भी उसे कबाड़ के हवाले फेंक दिया जाना चाहिए.

भाजपा की नीतियों के खिलाफ देश भर में गुस्सा है. किसान, मजूदर, व्यावसायी सहित सभी भाजपा की नीतियों से आक्रोशित हैं. देश में कहीं भी भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण नहीं है. जो भी दिख अथवा दिखाया जा रहा है वह सोशल मीडिया पर बैठे भाजपा के गुण्डे और खुद को भाजपा के हाथों बेच चुके मुख्य धारा की मीडिया संस्थान की वजह से हो रहा था. चूंकि अब ऐसे वे तमाम मीडिया संस्थान – जिसमें जी-न्यूज, अरनब गोस्वामी का रेडिकल (यह केवल नाम का रेडिकल है) न्यूज – जो भाजपा की दलाली व स्वामी भक्ति में लीन थे, जनता में बदनाम हो चुकी है.वहीं सोशल मीडिया पर बैठे भाजपा के भाड़े के गुण्डे हर दिन, हर क्षण जनता के आक्रोश से प्रकम्पित हो कर मैदान छोड़कर भाग रहे हैं.

जेएनयू के छात्रों के साथ किया गया दुव्र्यवहार देश की जनता को हिला कर रख दिया था. सारे के सारे दलाल नंगे हो गये. भाजपा की नीतियों की समीक्षा देश की हर गली व सड़क-चैराहे पर होने लगी है. पतनशील भाजपा पूरे देश के सामने नंगी हो गई है. यही कारण है कि दिल्ली के दोनों छात्र संघों में एवीबीपी की पराजय खुद भाजपा, उसकी नीतियों, संदिग्ध ईवीएम और भाजपा की दलाली पर उतर आये चुनाव आयोग के खिलाफ मानी जानी चाहिए.

Previous Post

यह जोगी नहीं यह सत्ता के नशे में मदहोश हत्यारों की सरकार है

Next Post

अमेरिकी साम्राज्यवादी आदमखोर का अगला शिकार उत्तर कोरिया

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

अमेरिकी साम्राज्यवादी आदमखोर का अगला शिकार उत्तर कोरिया

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जी. एन. साईंबाबा की रिहाई मसले पर हत्यारों-बलात्कारियों के संरक्षक सुप्रीम कोर्ट की साख दांव पर

October 14, 2022

ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ डेमोक्रेटिक फ्रंट ने छत्तीसगढ़ में कथित न्यायेतर हत्याओं की निंदा की

February 13, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.