Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

धर्म, भोजन और हिन्दुत्ववादी ताकतें

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 5, 2021
in ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

 

मुर्गे, बकरे का मांस या मछली खाने के बजाय बीफ ज्यादा खाओ : मेघालय सरकार में मंत्री शूलई. भाजपा नेता शुलई ने कहा – ‘एक लोकतांत्रिक देश में हर कोई अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र है.’

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

मुर्गे, बकरे का मांस या मछली खाने के बजाय Beef ज्यादा खाओ: मेघालय सरकार में मंत्री शूलई

भाजपा नेता शुलई ने कहा – "एक लोकतांत्रिक देश में हर कोई अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र है" #Meghalaya #Beef pic.twitter.com/fMRcsJRIm9

— News24 (@news24tvchannel) July 31, 2021

इसका जवाब देते हुए एक नागरिक लिखते हैं, ‘हिन्दुत्व तो दिखावा हैं असली तो देश को लूटना है.’ और यही मुख्य बात है.

हिन्दुत्व तो दिखावा हैं असली तो देश को लूटना है

— ADITYA (@adityas62939933) July 31, 2021

दरअसल भाजपा और उसके मातृसंस्था आरएसएस का दंगाई और गद्दारी का दागदार अतीत रहा है. यह मनुस्मृति आधारित ब्राह्मणवादी देश का निर्माण करने के लिए समाज में मौजूद हर लोकप्रिय नारों का इस्तेमाल अपने एजेंडा के लिए करता है. गाय वह नारा हो, या तिरंगा अथवा भगवा रंग का अथवा हिन्दुत्व का.

यह अनायास नहीं है कि अपने दोहरे चरित्र के लिए कुख्यात भाजपा-आरएसएस एक क्षेत्र में गाय को पूजने, उसको माता कहने और गोमांस के खिलाफ अभियान चलाकर लोगों को अपमानित करता है, उनकी हत्या कर लोगों में आतंक फैलाता है, वहीं दूसरे क्षेत्र में गोमांस खाने के लिए प्रोत्साहित करता है. वर्तमान भाजपा नेता का उपरोक्त बयान को इसी का एक उदाहरण है. अजय असुर अपने एक आलेख में इसकी अच्छी व्याख्या किये हैं, जो इस प्रकार है.

धर्म और भोजन हमारा व्यक्तिगत मामला है. हम किस धर्म में जाएं, किसकी पूजा करें और क्या खाएं, ये किसी को भी बताने की जरूरत नहीं है. धर्म और भोजन को राजनीत में लाना एकदम गलत है. धर्म और भोजन जनता पर छोड़ देना चहिए. पर देश की विडंबना धर्म और भोजन को राजनीति में शामिल कर प्राथमिक मुद्दों को गौण बना दिया है और हम इसी को सब कुछ समझते हैं.

आज हम जिंदा हैं तो इसी जीवन को सरकार का तोहफा मानकर सरकार का धन्यवाद देते हैं. कुछ लोग दो वक्त की रोटी को ही विकास समझते हैं. कुछ लोग खड़ंजा लग जाने, नाली बन जाने, पक्की सड़क बन जाने, सड़कों पर बिजली के खम्बे लग जाने, सीवर बन जाने… को ही विकास मानकर सरकार को धन्यवाद देते हैं और अब तो कुछ लोग शौचालय को ही विकास समझकर सरकार को धन्यवाद दे रहे हैं. व्यक्ति पहले खाएगा तभी तो शौचालय जाएगा. पहले भोजन की व्यवस्था फिर शौच की व्यवस्था होनी चहिए.

पिछले साल 31 जुलाई 2020 शुक्रवार को सुबह 9:00 बजे गुरुग्राम में पुलिस के सामने ही, कुछ तथाकथित गौ भक्त रक्षकों / गुंडों ने राजधानी दिल्‍ली से लगे हरियाणा के गुरुग्राम में एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया, जिसने कानून व्‍यवस्‍था पर सवालिया निशान उठा दिया है. यहां गाय का मांस ले जाने के शक में एक पिकअप ड्राइवर को हथौड़े और लाठियों से बुरी तरह पीटा गया. गो-रक्षकों ने ड्राइवर को उसी पिकअप में बांधकर घसीटा भी.

लुकमान नाम के पिकप ड्राईवर को पकड़ा और उसकी हथौड़े से पिटाई की. जब वह अधमरा हो गया तो उसको उठाकर बादशाहपुर ले गए और वहां उसे फिर मारा. वह बार-बार बोलता रहा कि उसकी गाड़ी में भैंस का मांस है और वह जिसके लिए काम करता है, उन लोगों का बीते 50 साल से भैंस के मांस का ही कारोबार है, लेकिन गौ भक्त रक्षकों / गुंडों ने उसकी एक न सुनी और लुकमान को बुरी तरीके से पीटा. रक्षकों / गुंडों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने पुलिस वालों के सामने ही पीटा और पुलिस वाले खड़े, बाकी खड़ी जनता की तरह तमाशा देख रहे थे.

कुछ ऐसा ही वाकया साल 2015 में दादरी में भी हुआ था. वहां भी तथाकथित गौ भक्त रक्षकों / गुंडों ने मॉब लिंचिंग कर 52 वर्षीय मोहम्मद अखलाक की हत्या कर दिया था. चाहे अखलाक हों या पहलू खान या मुम्बई में वो साधू जिनकी महाराष्ट्र् के पालघर जिले में मॉब लिंचिंग कर पुलिस की मौजदूगी में हत्या कर दी गयी थी. ऐसा ही राजस्थान के अलवर में अगस्त 2019 में पहलू खान को भी तथाकथित गौ भक्त रक्षकों / गुंडों ने मॉब लिंचिंग कर मार दिया था. ये घटनाएं घोर अमानवीय, पाशविक, क्रूरतम् और निंदनीय हैं.

आखिर इन तथाकथित गौ भक्त रक्षकों / गुंडों को इतनी हिम्मत आती कहां से है ? और पुलिस खड़ी तमाशा क्यों देखती है ? दोनों का जवाब एक ही है कि ऐसी घटना जिससे शासक वर्ग की सत्ता पक्ष को फायदा हो, वो भला ऐसी घटनायें क्यों नहीं चाहेगा. सत्ता पक्ष तो चाहता ही है कि समय-समय पर ऐसी घटनायें हो ताकि वो ऐसी घटनाओं का मीडिया के माध्यम से सांप्रदायीकरण करे, जिससे जनता इन्हीं में उलझी रहे और बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य पर शासक वर्ग से सवाल ना कर सके. हम और आप शासक वर्ग द्वारा फैलाए गए षडयंत्र में फंसकर मंदिर-मस्जिद और सामने वालों को क्या खाना है और नहीं खाना है, इसी में उलझ जाते हैं. क्या मनुष्य की जान जानवर से ज्यादा कीमती है ?

यदि गाय की जान मनुष्य से ज्यादा कीमती लगती है इन तथाकथित गौ भक्त रक्षकों / गुंडों को, तो देश की गौशालाओं के अंदर बिन पानी, बिन भोजन के मर रही गायें नहीं दिखाई दे रही हैं ? इन गौशालाओं में गायों के लिए जो चारे का पैसा आता है, वो शासन और गौशाला समिति खा कर भ्रष्टाचार कर रही है, दिखाई नहीं दे रहा है ? इन गौशालाओं के अन्दर ही भूख से अधमरी जिंदा गायों को कौवे, कुत्ते नोच-नोच कर खा रहे होते हैं, तब इनकी गौ माता के प्रति इनकी मोहब्बत कहां गायब हो जाती है ?

कमोबेस यही हालात पूरे देश में है. खासकर उत्तर प्रदेश में जहां रामराज्य आ चुका है, गौशालाओं के हालत सबसे खराब हैं. यदि आपको मांस से इतनी नफरत है तो लाइसेंस ही क्यों देते हो ? लाइसेंस देने वाली सरकार से सवाल क्यों नहीं करते हो ? और ऐसी सरकार के खिलाफ आंदोलन क्यों नहीं करते हो ? क्योंकि इन तथाकथित गौ भक्त रक्षकों / गुंडों को इसी सरकार ने अपने हित के लिए पाला है, इसीलिये सरकार के खिलाफ चूं की आवाज तक नहीं आती इन गौ माता के लिए !

एक तरफ यही सरकार अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, केरल, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल, राज्यों में गाय काटकर बेचने का लाइसेंस देती है और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात समेत 20 राज्यों में तथाकथिक गौ रक्षा टीम बनवाकर मॉब लिंचिंग करवाती है. क्या 20 राज्यों में ही गाय माता है ? बाकी राज्यों में ? है कोई जवाब ?

वहीं किशन गोलछा जैन लिखते हैं कि ये बीजेपी के नेता भी पता नहीं कौनसी भांग पीते हैं, एक कहता है महंगाई नेहरू जी के 15 अगस्त के भाषण की वजह से बढ़ी है, दूसरा कहता है बीफ (गाय का मांस) खाओ, तीसरा कहता है लड़कियां घर से अकेले बाहर न जाये तो चौथा कहता है दस बच्चे पैदा करो, एक नेता तो जेएनयू में कंडोम बीनकर गिनती भी कर आया था.

अब समझ में आ रहा है कि रंगा-बिल्ला को कांग्रेस के नेता मुहंमांगे दाम देकर इसलिये खरीदने पड़ते हैं ताकि उन्हें मंत्री बनाकर सरकार चला सके क्योंकि सरकार चलाना इन भंगेड़ियो के बस का नहीं. ये सिर्फ भांग के नशे में उलजुलूल बयानबाजी ही कर सकते है और कुछ नहीं.

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

खेल

Next Post

हर शहर में एक बदनाम औरत होती है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

हर शहर में एक बदनाम औरत होती है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी चला भगवान बनने !

August 10, 2019

‘नमस्ते ट्रम्प’ का कहर और मोदी का दिवालियापन

May 11, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.