Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

रामायण सीरियल के बहाने रामायण के भिन्न भिन्न रूपों की चर्चा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 3, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

शनिवार, दो मई को रात 11 बजे दूरदर्शन पर 25 मार्च से निरंतर चल रहा ‘रामायण’ सीरियल समाप्त हो गया, जबकि लॉक-डाउन दो हफ़्ते के लिए और बढ़ा दिया गया है. अब इस दो सप्ताह में रामायण जैसा कोई सीरियल दूरदर्शन के पास नहीं है. इसका एक दृश्य है, राजा राम के दरबार की धरती अचानक फटी और उससे एक स्वर्ण-खचित सिंहासन पर बैठी अधेड़ उम्र की धरती माता प्रकट हुईं. उन्होंने सीता को अपने अंक में लिया और पुनः धरती में समा गईं. राजा राम अपने सिंहासन से उतर कर जब तक आते, सीता विलुप्त हो चुकी थी. फिर क्रोध करने से क्या लाभ ! अपनी परीक्षा देती-देती थक चुकी सीता के पास और कोई रास्ता भी तो नहीं था.

मुझे नहीं पता, यह कथा कितनी सच है, कितनी झूठ ! पर चूंकि साहित्य समाज का ही दर्पण होता है इसलिए यह तो मानना ही पड़ेगा कि उत्तर के हिंदुस्तान में कोई राजा राम हुए और उन्होंने तब तक स्वतंत्र स्त्री सत्ता को बंधक बना लिया. इसके लिए कारण भले ही लोकापवाद को बताया गया, लेकिन लोक की अराजकता पर क़ाबू पाना एक राजा का दायित्त्व भी तो है. राजा राम ने वह दायित्त्व तो निभाया नहीं, उल्टे पग-पग पर सीता की परीक्षा लेते रहे. बहुत वर्षों बाद वाल्मीकि रचित इस राम कथा के अनेक भाष्य हुए तो हर लेखक ने अपने समय के मूल्यों के आधार पर इस कथा का वर्णन किया.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

8वीं सदी में कंब रामायण तमिल में लिखी गई, जिसमें रावण सीता को पृथ्वी समेत उठा लेता है क्योंकि सीता को स्पर्श कर उनका सतीत्त्व भंग नहीं करना चाहता था. 13वीं शताब्दी में रंगनाथ रामायण तेलुगु में लिखी गई. इसमें राम सेतु निर्माण में गिलहरी की सहायता का वर्णन है और सुलोचना का सती प्रसंग भी. 14 वीं शताब्दी में कणश ने मलयालम में रामायण लिखी. यह वाल्मीकि रामायण का शब्दशः अनुवाद है. कन्नड़ भाषा की रामायण बहुत पुरानी है, इसे जैन मतावलंबियों ने लिखा था.

अंगद द्वारा अपनी पूंछ से रावण के दरबार में सिंहासन का प्रसंग ‘तोखे रामायण’ से लिया गया, जिसे वैष्णवों में मान्यता है. कश्मीरी रामायण शिव-पार्वती संवाद के रूप में है. इसमें पहली बार राम को अवतारी बताया गया. असमिया भाषा में ‘माधव केदली’ में राजा दशरथ की 700 रानियां बताई गई हैं. इसमें कृतिवास की बांग्ला रामायण का पुट है. इसके अनुसार अशोक वाटिका विध्वंस के पूर्व हनुमान रावण से ब्राह्मण वेश में मिलते हैं.

कृतिवास रामायण में सीता को पूर्व जन्म में अप्सरा बताया गया है. बंगाल में अद्भुत रामायण भी लोकप्रिय है, जिसमें सीता देवी स्वरूप में है, और वह हज़ार सिर वाले रावण का संहार करती है. ओड़िया रामायण को सिद्धेश्वर पारिडा उर्फ़ सारला दास ने लिखा है, इसमें बालि और सुग्रीव को अहिल्या के पुत्र बताया गया है.

हिंदी में तुलसी दास ने रामचरित मानस लिखी है, और इसमें सीता वनवास प्रसंग हटा दिया. अग्नि परीक्षा पर वे लज्जित हैं, इसलिए इतना कह कर चुप हो जाते हैं कि असली सीता तो पहले ही अग्निदेव के संरक्षण में चली गई थी, जिस सीता का रावण ने हरण किया, वे परछाईं मात्र थी.

उत्तर कांड में में वे सीता वनवास का उल्लेख नहीं करते, बस इतना कह कर चुप साध जाते हैं कि ‘दुई सुत सुंदर सीता जाये, लव-कुश वेद-पुराण पढ़ाये !’ मानस में अध्यात्म रामायण की छाप है. सूर सागर में सूरदास ने वाल्मीकि रामायण के मार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया है. उन्होंने 150 श्लोक लिए हैं. पृथ्वीराज रासो के दशावतार में 100 छ्न्द वाल्मीकि रामायण के हैं.

20वीं सदी में पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ ने रामचरित चिंतामणि लिखी. मैथिलीशरण गुप्त ने साकेत महाकाव्य लिखा. ‘उर्मिला’ भी खूब चर्चित हुआ. इनमें आधुनिक काल में रामकथा की प्रासंगिकता जांची गई. केदारनाथ मिश्र ने ‘कैकेयी’ काव्य लिखा. इस तरह इन कवियों ने रामायण के उपेक्षित पात्रों को सम्मान दिया.

गोविंद रामायण के अनुसार इंद्र्जित जब राम-लक्ष्मण को नागपाश में बांध लेता तो सीता ही उन्हें आकर छुड़ाती हैं और अपने सतीत्त्व के प्रभाव से समस्त वानरों को जीवित करती हैं. मराठी की एकनाथ रामायण में हनुमान मंदोदरी के केश पकड़ कर खींचते हैं. इसमें सीता को अग्निजा बताया गया है और मंथरा की पिटाई का उल्लेख है. गुजराती में गिरधरदास की रामायण है, जिसे 13वीं सदी में लिखा गया. उर्दू में चकबस्त ने लिखा है.

इसके अलावा तिब्बती रामायण है और तुर्की में खोमानी रामायण है. चीन में यह कथा भारत से गई. इंडोनेशिया, मलयेशिया में भी रामायणें हैं. थाईलैंड, कम्बोडिया की रामायण वाल्मीकि जैसी है. श्रीलंका की हिकायत महाराज रामायण सिंहली भाषा में है. 15वीं शताब्दी के बाद राम कथा योरोप गई और वहां भी इसके कई अनुवाद मिलते हैं और भिन्न-भिन्न क्षेपक भी.

रामानन्द सागर ने अपने टीवी सीरियल रामायण में और भी फेर-बदल किए. उन्होंने राम जी को विष्णु रूप में स्वर्ग जाने को दिखाया है. सीरियल के राम सुदूर दक्षिण के केरल राज्य में पूजित विष्णु की पद्मनाभ मुद्रा में वैकुंठलोक को जाते हैं जबकि किसी भी रामायण में यह प्रसंग नहीं है. वाल्मीकि रामायण के अनुसार लक्ष्मण को त्यागने के बाद राम भी जल समाधि ले लेते हैं और उनके पीछे-पीछे उनके शेष भाई भी सरयू में समा जाते हैं.

  • शम्भूनाथ शुक्ल

Read Also –

रामायण और राम की ऐतिहासिक पड़ताल
सनातन धर्म का ‘स्वर्णकाल’ दरअसल और कोई नहीं बल्कि ‘मुगलकाल’ ही था
राम के नाम पर भारत के 7 हजार सर्वोच्च शोषक-शासकों के प्राण प्रतिष्ठा का मेगा शो
असली मर्यादा पुरुषोत्तम चंगेज़ खां बनाम तथाकथित मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्र
मर्यादा पुरुषोत्तम या संहारक राम ?
रामराज्य : गुलामी और दासता का पर्याय 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

अंतरिम बजट गरीबों तथा किसानों के साथ धोखा, 16 फरवरी को होगा ग्रामीण भारत बन्द – AIKKMS

Next Post

उससे किसी ने प्यार नहीं किया…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

उससे किसी ने प्यार नहीं किया...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी सरकार में गई 20 लाख नौकरियां

April 28, 2018

ऑपरेशन कगार : दंडकारण्य में क्रूर युद्ध का सबसे क्रूर चरण – क्रांतिकारी लेखक संघ

September 18, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.