Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

दो चूहे और सत्तरघाट पुल

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 18, 2020
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

दो चूहे और सत्तरघाट पुल

एक बिहारी चूहा टुन्न होकर लड़खड़ाती आवाज में दूसरे चूहे से बोला – ‘ए बुड़बक, ए का, सुन रहे हो बे…’

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

दूसरा चूहा बोला – ‘का महाराज, का हो ? सुबह सुबह ही चढ़ा लियो हो का ? का हो गया … !

शराबी चूहा बोला, ‘अरे साला आज प्रभात खबर नहीं कुतरे का ? … अरे उ पुल बना था न गंडक नदी पर, 264 करोड़ रुपये का सत्तर घाट पुल ! उ टूट गवा, उ का महीने भर पहले इनॉग्रेसन किया था न नीतीशवा, …. वही खराब डीएनए वाला…

दूसरा चूहा इतना सुनकर सुबक सुबक कर रोने लगा.

अरे इतना काहे सेंटिया रहे हो, शराबी चूहा बोला. अन्तरात्मा की आवाज सुन लिए हो का बे ?

सुबकते हुए दूसरा चूहा बोला, ‘अरे तुम जानते नहीं हो, इ पुल बनाने वाले पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव है, ई वही नीतीशवा की सरकार का मंत्री है जो हमारे भाई बंधुओं पर बार-बार इल्जाम लगा देती है. हमका याद है जब पिछली बाढ़ आई थी तो इसके मंत्रियों ने हम पर ही इल्जाम लगाया था कि हमारे कारन ही नदी में बाढ़ आयी है, इनके मंत्री बोलते थे कि बांंध की हमने पूरी दीवारें खोद डाली… ! अब पुल ढह गया है तो फिर बोल देगा कि ये काम भी हमने ही किया है, साला इंटरनेसनल लेबल पर हमारा इंसलेट कर देता है.

ओर देखो साला ! … तुमको भी इन्होंने शराबी बना दिया … इन्होंने हमारी पूरी बिरादरी पर थानों में रखी पूरी नौ लाख लीटर शराब पीने का इल्जाम लगा दिया ! जबकि सारी शराब इसके पुलिस वालों ने बेच खाई थी !

हा भैया ! कह तो तुम सही रहे हो – शराबी चूहा बोला. ‘तोहरी भाभी भी यही कह रही थी कि जब से थानों के मालखाने में शराब रखी गयी थी, तब से तुम पक्के शराबी बन गए हो, … लेकिन हम ई नंद किशोर यादव को छोडेंगे नहीं. हमको मालूम है जांंच होगी तो ई ससुरा अपने आप को बचाने के लिए बोल देगा कि 246 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की फाइलों को भी चूहे कुतर गए, चलो आज ही फाइलें विभाग के ऑफिस से निकाल कर दिल्ली में PMO को भेज देते हैं.

अरे रहने दे ! कुछ नही होगा ! … पहला चूहा बोला – तेरे को इतनी चढ़ गयी है कि तू भूल गया है ये मोदी जी का भारत है, जहांं नीतीशवा खुद भी खाता है और मोदी जी को भी खिलाता है.

  • गिरीश मालवीय

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

तुम तो बहरे हो !

Next Post

कोरोना की आड़ में अमीरों की तिजोरी भर रही सरकार और उसकी हत्यारी पुलिस की गैंग

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

कोरोना की आड़ में अमीरों की तिजोरी भर रही सरकार और उसकी हत्यारी पुलिस की गैंग

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्या आपके मुहल्ले में कोरोना का असर सचमुच बढ़ता हुआ दिख रहा है ?

March 19, 2021

मैं नास्तिक क्यों हूंं ?

August 24, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.