Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

एक आस्तिक से बातचीत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 20, 2021
in लघुकथा
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

एक आस्तिक से बातचीत

आस्तिक – आप अच्छे इन्सान हैं लेकिन एक ही बुराई है, आप नास्तिक हैं, भगवान को नहीं मानते.

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

मैं – मैं भगवान को उतना ही मानता हूं, जितना तुम अल्लाह को मानते हो.

आस्तिक – मैं अल्लाह को नहीं मानता, मैं भगवान को मानता हूं.

मैं – मैं भगवान को उतना ही मानता हूँं, जितना मुस्लिम भगवान को मानते हैं.

आस्तिक – हद करते हो. मुस्लिम भगवान को नहीं मानते, वोह तो अल्लाह को मानते हैं.

मैं – हिन्दू अल्लाह को नहीं मानते, मुस्लिम भगवान को नहीं मानते, सब हिन्दू-मुस्लिम नास्तिक हैं.

आस्तिक – नास्तिक कैसे हुए ?

मैं – अगर भगवान को न मानने वाले भी नास्तिक नहीं, अल्लाह को न मानने वाले भी नास्तिक नहीं तो मैं नास्तिक कैसे हो गया ?

आस्तिक – क्या करोड़ों लोग मूर्ख हैं, जो भगवान को मानते हैं ?

मैं – विश्व की आबादी 780 करोड़ है, सिर्फ़ 100 करोड़ लोग भगवान को मानते हैं, 680 करोड़ लोग नहीं मानते. अल्लाह को 180 करोड़ लोग मानते हैं, 600 करोड़ लोग नहीं मानते. गॉड को 240 करोड़ लोग मानते हैं, 540 करोड़ लोग नहीं मानते.

जिस भगवान को विश्व के 87 फ़ीसदी लोग नहीं मानते, जिस अल्लाह को विश्व के 77 फ़ीसदी लोग नहीं मानते, जिस गॉड को 69 फ़ीसदी नहीं मानते, उसे मैं भी नहीं मानता.

आस्तिक – भगवान, अल्लाह, गॉड जितने भी नाम हैं, वोह सब एक ही शक्ति के नाम हैं.

मैं – एक इन्सान के अगर 100 नाम हों तो इन्सान का करैक्टर नहीं बदल जाता. भगवान, अल्लाह, गॉड वगैरह का करैक्टर ही अलग-अलग है. एक को ख़ुश करो तो दूसरा नाराज़ हो जाता है. सबकी पसंद-नापसंद अलग है.

एक को पूजा-पाठ पसंद है, दूसरे को पसंद नहीं. कोई मांसाहारी है तो कोई शाकाहारी. अल्लाह तो दूसरा नाम लेने वालों को दोज़ख़ में जलाता है. सबके अपने अपने पर्सनल स्वर्ग-नरक हैं.

आस्तिक – ये सब झूठी बातें हैं, वह एक ही है.

मैं – भगवान, अल्लाह, गॉड एक ही हैं तो तुम अल्लाह को क्यों नहीं मानते ? मुस्लिम भगवान को क्यों नहीं मानता ? क्यों डरते हो कि दूसरा नाम लेने से अपने वाला नाराज़ हो जायेगा ? क्यों भगवान वाला अल्लाह को झुठ कहता है और अल्लाह वाला भगवान को झूठ कहता है ?

आस्तिक – तुम्हारी बातें मेरी समझ में नहीं आती.

मैं – समझ आ जाती तो तुम भी नास्तिक होते. वैसे तुम अब भी नास्तिक हो.

आस्तिक – मैं नास्तिक नहीं हूं.

मैं – दुनिया में हज़ारों काल्पनिक शक्तियां हैं, तुम सिर्फ़ एक को सच मानते हो. मैं एक को भी नहीं मानता, तेरे मेरे में एक का ही फ़र्क़ है.

आस्तिक – आपका मतलब, कोई शक्ति नहीं है ?

मैं – कोई अलौकिक शक्ति नहीं है. ये सब अज्ञानता से पैदा हुई कल्पनायें थी. बाद में झूठे, मक़्क़ार लोगों ने इन कल्पनाओं का फ़ायदा उठाया.

सच में कोई अलौकिक शक्ति होती तो वह एक होती और यूनिवर्सल सच होती. वह सूरज की तरह रौशन होती. उसके लिये तुम बहस नहीं करते. उसे साबित नहीं करना पड़ता, वह प्रत्यक्ष और प्रमाणित होती.

आस्तिक – कोई शक्ति नहीं है तो धरती-आसमान कैसे बन गये ? इन्सान कैसे बन गये ?

मैं – यू-ट्यूब पे ज्ञान-विज्ञान के कुछ वीडियो देख लो, जवाब मिल जायेंगे.

आस्तिक – कोई ज़रूरत नहीं, मैं विज्ञान को नहीं मानता.

मैं – विज्ञान से जुड़ी सब चीज़ों का सिर्फ़ 10 दिन त्याग कर दो, फिर विज्ञान को मानने लगोगे.

आस्तिक – (उठकर जाते हुये) कोई तो शक्ति होगी, जिसने दुनिया बनाई.

मैं – अपने बच्चों से पूछ लेना कि दुनिया कैसे बनी ? बच्चे भी बता देंगे, स्कूल की क़िताबों में लिखा होता है.

सोचते कुछ नहीं, समझते कुछ नहीं, बोलते बहुत हैं. दीन-धर्म में, इन्सान ही कम हैं, तोते बहुत हैं.

  • मानव राज

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

क्या कारख़ाना मालिक और मज़दूर दोस्त हो सकते हैं ?

Next Post

अफ़ग़ानी कविताएं

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

अफ़ग़ानी कविताएं

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आग

March 2, 2023

IIMC में 11 छात्रों के 5 दिन के निलंबन

February 11, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.