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फासिस्ट मोदी सत्ता का एजेंडा – मंदिर और सीएए

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 6, 2024
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मीरा दत्त, सम्पादक, तलाश, वैज्ञानिक सोच एवं चेतना की

देश की जनता की परेशानियाें में लगातार इजाफा हो रहा है. अभूतपूर्व मंहगाई, बेरोजगारीे, भूखमरी, इलाज और दवाई की बढ़ती कीमतें, शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती फीसें, कॉपी-किताबों के बढ़ते मूल्य आदि ने एक तरफ जनता को आर्थिक बदहाली में धकेल दिया है, वहीं महिलाओं की असुरक्षा, सांप्रदायिकता और अपराध का माहौल ने जनता में असुरक्षा और नफरत को बढ़ा दिया है. लेकिन भाजपा शासक जनता का ध्यान इन मामलों से हटाकर मंदिर के नाम पर भटकाना चाहती है.

अबु-धाबी में मंदिर बनवा लें या लॉसऐंजेल्स में इससे क्या बलात्कारी और शोषणकारी, अपराधी भाजपा के नेताओं को सजा मिल जायेगी ? इससे आन्दोलनकारी किसानों की बेवजह पिटाई और प्रताड़ना रूक जायेगा ? क्या अन्नदाता किसानों को सरकार द्वारा धमकाना, गिरफ्तार करना और कील गाड़ना, सड़कों को मीलाें तक जाम करना जायज हो जायेगा ? भाजपा सरकार किस हक से जनता को सड़कों पर चलने से रोक रही है ? किसानों के उपजाए अनाज, दूध-दही आदि से कमाए लाखाें करोड़ रुपये के वस्तु एवं सेवा कर सरकार उन्हें वापस कर देगी ? किसान आत्महत्या करें और निजी बीमा कम्पनियों को प्रीमियम का लाभ क्रमशः 2016-17 व 2017-18 में 6724 करोड़ रुपए और 12731-45 करोड़ रुपए हो, यह कैसे संभव हो सकता है ?

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हाल में रेलवे में मात्र 5600 बहाली (जबकि 5 लाख पद रिक्त हैं) के नोटिस पर बेकारी से त्रस्त युवावर्ग सड़क पर प्रदर्शन कर रहे थे. प्रशासन द्वारा उन्हें पिटवाया गया. जनता पूछ रही है कि इतने कम रोजगार देने थे तब साल दर साल तक भाजपा सरकार इंतजार क्यों कर रही थी ? जनता सेना में पांच साल की बहाली के फार्मूला को लेकर पहले ही परेशान थी जबकि, मोदीजी ने कहा था कि हर साल दो करोड़ नौकरी दी जायेगी. अब आम चुनाव के ठीक पहले ऐलान कर रहें हैं देश में तीसों स्थानों पर जॉब मेला लगाकर एक लाख नियुक्ति पत्र बांटा जायेगा.

अर्थशास्त्री एस के मेहरोत्र का बयान है कि करीब एक करोड़ पद सरकारी दफतरों में खाली पड़ा है. अब चुनाव होने वाला है तो कुछ हजार बहाली निकाल कर बहाली का माहौल बनाया जा रहा है. हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान रेलवे द्वारा निकाली गई बहाली में ही अब तक नियुत्तिफ़ नहीं की गई है. इस गहन बेकारी से जुझते युवा पिछले दस साल से आन्दोलन करने को मजबूर हैं. अतः जनता में धार्मिक उन्माद पैदा करने के लिए अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को ही पीएम ने महत्व दिया. इसके पहले कश्मीर में धारा 370 को हटाया.

ऐसा नहीं कि अयोध्या में राम मंदिर नहीं था, बल्कि वहां राम मंदिर के अलावा कई मंदिर जैसे सीता माता का रसोई, लक्ष्मण का मंदिर, हनुमान का मंदिर एवं अन्य मंदिर है, जो कि पांच सौ साल पुराना है. ऐतिहासिक तथ्य यह है कि न बाबर ने मस्जिद बनवाई, न राम मंदिर तोड़ी. इतिहास गवाह है कि ये मंदिर का निर्माण अधिकांशतः अकबर के शासन काल में हुआ. यह सर्वज्ञ है कि अयोेध्या में करीब 6000 मंदिर हैं. यहां तक कि साल 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का कोई साक्ष्य नहीं है, कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता है. सुप्रीम कोर्ट ने ‘आस्था’ के नाम पर मंदिर बनाने का आदेश दे दिया. इसलिए शायद कोर्ट के आदेश में मस्जिद बनाने के लिए भी सरकार को 500 एकड़ भूमि देने को कहा गया.

मंदिर बनवाने का श्रेय भले ही पीएम मोदी एवं आरएसएस ने लूट लिया लेकिन इसकी शुरूआत किसने की ? बाबरी मस्जिद के स्थान पर नये मंदिर का नारा आडवाणी ने दिया था. आडवाणी के साथ मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती एवं अन्य ने यह नारा 1992 में दिया था ‘मंदिर वहीं बनायेंगे.’ उस समय न मोदी, ना ही आरएसएस ने लीड लिया. आडवाणी ने आह्वान किया कि हर एक कार सेवक ईंट लेकर आयेंगे और मंदिर के लिए रखेंगे.

उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बाबरी मस्जिद के विध्वंश को अंजाम देने में पूरी मदद की. केन्द्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार नरसिंम्हा राव ने अप्रत्यक्ष रूप से बाबरी मस्जिद का विध्वंश होने में मदद की (हाल में उन्हें मरणोपरान्त ‘भारत रत्न’ दिया गया). उन्होंने सेना तो भेजी परंतु उन्हें घटना स्थल से दस किलोमीटर पीछे रहकर गोली नहीं चलाने का आदेश दिया था. मस्जिद के गुंबद को तोड़ने के क्रम में कुछ कारसेवक उपर से गिरकर मरे भी. उनमें से दो भाई राम कोठारी व नरेश कोठारी व अन्य लोग थे.

दिलचस्प बात ये है कि इन सभी लोगों से भाजपा सरकार ने साल 2014 में दूरियां बना ली. यहां तक कि लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी से भी. 22 जनवरी से होने वाले कार्यक्रम ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के लिए उन्हें आमंत्रित नहीं करने का बहाना बनाया कि वे बहुत बूढ़े हो चुके हैं, ठंडा का मौसम उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होगा. सनातन धर्म के सर्वोच्च भूमिका में आने वाले चारों पीठ के शंकराचार्य तक को दरकिनार कर दिया.

जिस तरह से बालाकोट, पाकिस्तान में हवाई हमला को साल 2019 के चुनाव जीतने के लिए प्रचार किया था, उसी तरह से मोदी ने हिन्दू बहुल मानसिकता को भुनाने की आस में स्वयं का महिमा मंडन किया. पुलवामा के आतंकवादी हमला में शहीद हुए 41 सैनिकों के मामले को भी चुनाव के लिए इस्तेमाल किया. इस पर कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल ने बताया है कि ‘सेना को वहां ले जाने के लिए सरकार ने हवाई जहाज नहीं दिया.’

यह तो सर्वविदित है कि राम के मुर्ति में प्राण प्रतिष्ठा भी मोदी ने किया. मुख्य मीडिया अधिकांशतः मंदिर के निर्माण पर जो विशाल खर्च एवं इसके आयोजन की तैयारियों को ही दिखाने में व्यस्त रहें, उन्हें भी जनता से कोई लेना देना नहीं है. यहां तक कि पुराने राम मंदिर के मुख्य अंश पर बुलडोजर चला यह भी नहीं दिखाया. यहां
यह भी जानना जरूरी है कि क्या एक मंदिर के निर्माण के लिए दूसरे मंदिरों को तोड़ना आवश्यक हैं ? यदि सोशल मीडिया की मानें तो करीब तीन सौ मंदिरों पर बुलडोजर चला है.

पुराने राम मंदिर का मुख्य द्वार तोड़कर रास्ता चौड़ीकरण किया गया है. इसके अलावे हजारों अयोेध्या वासी के घर तोड़कर उन्हें दर-बदर की ठोकरें खाने के लिए ठंडे के मौसम में छोड़ दिया गया. जिनके घर तोड़े गए उनका कहना है कि वे साठ साल से वहां रहते आये हैं, उन्हें बेघर कर कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया. बस दस दिन का समय दिया गया और उसके बाद उनके घरों को तोड़ दिया गया.

उपर से तुर्रा ये कि यानी यूपी प्रशासन ने उजड़े को बसाने के लिए उन्हें कम से कम पांच लाख की मकान और इससे अधिक कीमत की दुकान खरीदने का प्रस्ताव किया है. अयोध्यावासी एवं मंदिर के पुजारियों का यह भी कहना है कि अब पुराने मंदिर में कौन आयेगा ? लोग भव्यता के ओर जा रहे हैं. अब सैकड़ों जीर्ण मंदिरों का धरोहर के रूप में उद्धार नहीं होगा.

इस विशाल मंदिर बनाने का खर्च 1800 करोड़ बताया जा रहा है. बताया जाता है कि मंदिर के नाम से 5000 करोड़ का चन्दा मिला है. अब सवाल है कि बचे हुए हजारों करोड़ और भविष्य में होने वाले मंदिर के आमदनी का कौन हिसाब करेगा ? आमदनी का ये धन कौन कहां खर्च करेगा ?

मंदिर बन जाने के बाद भी क्या भाजपा सरकार विवाद खत्म होने देगी ? जवाब है नहीं. अभी आम चुनाव जीतने के लिए दूसरा उन्मादी, सांप्रदायिक मुद्दा का असम की तरह पूरे देश में लागू नहीं हुआ है. गृह मंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करने का ऐलान किया है. असम में सीएए कानून से करीब 14 हिंदू व आदिवासी बेघर कर दिये गये अब पूरे देश में कितने लोग बेघर किये जायेगें ? इसकी कल्पना मात्र से शरीर में सिहरन दौड़ जाती है.

पूरे देश में धार्मिक उन्माद का माहौल बनाने के लिए इधर राम मंदिर में जश्न चलाया जा रहा था, उधर कश्मीर में तीन निर्दोष नागरिकों की बर्बरतापूर्वक सेना ने हत्या कर दी. सैनिक भी क्या करे, वे भी दबाव में काम कर रहे हैं. सैनिक भी आंतकवादियों द्वारा मारे जा रहे हैं. इस पर वहां की जनता को जवाब देने के लिए सुरक्षा मंत्री को जाना पड़ा. वे आश्वासन देकर आये कि मारे गये लोगों के परिजनों के साथ न्याय होगा.

मुम्बई में राम मंदिर प्र्रदर्शन के आड़ में मुम्बई के मुस्लिम बहुल इलाके मीरा रोड एवं नया बाजार में ठीक 22 जनवरी को ही दुकानों को तोड़ते रहे. उसके बाद बिना सूचना के बीएमसी द्वारा बुलडोजर चलवा कर कई दुकानों को धवस्त कर दिया.

धांधली, घोटाले ही घोटाले, भ्रष्टाचार. साल 2024 के लोकसभा चुनाव पर नजर रखतेेेे हुुए खर्चों के मद में पहले नम्बर पर रक्षा मंत्रलय के बजट में अभूतपूर्व सबसे अधिक बढ़ोतरी के साथ 5,93,538 करोड़ और दूसरे नम्बर पर राजमार्ग निधि नई ऊंचाई पर, 2.70 लाख करोड़ बजट का प्रावधान रखा गया.

रक्षा मंत्रालय एक पवित्र दुधारू गाय की तरह है, जिसके खर्च पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है. हालांकि राफेल विमान की बड़ी कीमत पर खरीद को लेकर संसद तक में बवाल हो चुका है. हाई वे या चारों धाम रोड माला के निर्माण में भारी घोटालों का पता चला है.

कैग की रिर्पोर्ट की माने तो एक्सप्रेस वे निर्माण की स्वीकृत राशि प्रतिकिलोमीटर 18.2 करोड़ रू. था, जबकि, सरकार ने खर्च किया 250 करोड़ रूपये प्रति किलोमीटर. इतना बड़ा घोटाला कभी नहीं हुआ था. भारत माला प्रोजेक्ट 7.5 लाख करोड का घोटाला है. ग्रामीण विकास मंत्रलय के पेेंशन फंड से योजनाओं का प्रचार प्रसार किया सरकार ने, जिसकी राशि है 2 करोड़ 83 लाख रूपये. ये तो कुछ मिसाल है.

आयुष्मान भारत राशि के हिसाब में भारी गड़बड़ी है. राज्य विधान सभा में बहुमत के लिए खरीद-फरोख्त के अलावा क्षेत्रीय दलों के शासकों को अपराधी तरीके से जुटाकर सरकार बनाने के मामले भी अब परदे का बाहर आ रहें हैं. यहां तक कि चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में मतों की गैरकानूनी और गलत गिनती से भाजपा की जीत के मामला का सुप्रीम कोर्ट में पर्दाफास हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड जिसमें दानदाताओं के नाम गुप्त रखने की भाजपा की संगीन अपराध पर रोक लगा दी है. खबरों की मानें तो छः हजार करोड़ से अधिक धनराशि का कोर्ट ने हिसाब देने को कहा है.

ऐसे कई भ्रष्टाचार, धांधली के मुकदमें कोर्ट में आये दिन चल रहे हैं. उपर से केन्द्रीय भाजपा सरकार ने देश को अभूतपूर्व कर्ज (करीब 205 लाख करोड़) के गर्त में धकेल दिया है. इस पर कंपनियों का पिछले 9 सालों में करीब 20 लाख करोड़ माफ कर दिया है, जो कि एक फासीवादी भाजपा शासक ही कर सकते हैं. इसके खिलाफ आवाज उठाने से रोकने के लिए भाजपा की केंद्र सरकार किसानों, मजदूरों, आदिवासियों पर आये दिन अर्द्धसैनिक बलों से हमला करवा रही है और प्रतिरोध की हर आवाज को कुचल रही है, जेलों में डालकर मौत के घाट उतार रही है.

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