Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

ठेका पर नौकरी : विचारहीनता और नीतिगत अपंगता के साथ कोई मोदी का राजनीतिक मुकाबला नहीं कर सकता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 18, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना

यानी, अब अगर बिहार के किसी कॉलेज में प्रोफेसर की कमी होती है तो कॉलेज के लोग किसी विकास ट्रेडर्स से संपर्क करेंगे. तब, वह विकास ट्रेडर्स उस कॉलेज को प्रोफेसर मुहैया करवाएगा, जिसे प्रति क्लास के हिंसाब से पैसा दिया जाएगा. जाहिर है, कॉलेज और प्रोफेसर के बीच में कंपनी बिचौलिया का काम करेगी तो उसे भी कमीशन के रूप में पैसा मिलेगा.

विकास ट्रेडर्स, जिसका एड्रेस मधुबनी जिले के किसी सुदूर देहात का मालूम पड़ता है, इस मामले में अकेली बिचौलिया कंपनी नहीं है. अलाना प्राइवेट लिमिटेड, फलाना प्राइवेट लिमिटेड टाइप की तीन और कंपनियां चयनित की गई हैं, जिनसे संपर्क कर कॉलेज अपनी जरूरत के हिंसाब से विषय विशेषज्ञ की सेवाएं ले सकते हैं.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर, जिस भी रैंक का विषय विशेषज्ञ चाहिए, ये प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां उपलब्ध करवाएंगी. यानी, अगर आप जुलाजी, बॉटनी, हिन्दी, इतिहास, फिजिक्स आदि में से किसी भी विषय के विशेषज्ञ विद्वान हैं तो उन कंपनियों में अपना निबंधन करवाएं, वे आपको कॉलेजों से जोड़ेंगी और तब आप वहां पर ज्ञान की धारा बहाएंगे. फिर, देश विश्वगुरु बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा और सामाजिक न्याय की ओर भी कुछ कदम बढ़ा ही देगा.

सामाजिक न्याय से याद आया, यह बिहार सरकार तो नीतीश कुमार के नेतृत्व और लालू प्रसाद के समर्थन से चल रही है, तेजस्वी यादव जिसके डिप्टी सीएम हैं, सीपीआई, सीपीएम और माले जैसे वाम संगठनों का भी जिसे समर्थन हासिल है.

मतलब, जद यू, राजद, कांग्रेस और वाम दल का संयुक्त महागठबंधन. बोले तो कंप्लीट पैकेज ऑफ सोशल जस्टिस. आजकल कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी तो सोशल जस्टिस पर बहुत जोर दे रहे हैं न ! तो, महागठबंधन सरकार को बताना चाहिए कि ऐसे निर्णयों से सामाजिक न्याय के उद्देश्य किस तरह पूरे होते हैं ?

अभी बिहार विधान सभा में सीपीआई माले के युवा विधायक संदीप सौरभ के एक पोस्ट में देखा कि ऐसी नियुक्तियों में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है. नहीं पता, महागठबंधन सरकार इस तरह की नियुक्तियों को रोजगार की किस श्रेणी में रखती है.

समझ में नहीं आता कि वे कौन से एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर साहेबान होंगे जो अलाना ट्रेडर्स और फलाना प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से संपर्क कर अपने लिए रोजगार तलाशेंगे ? बहुत कुछ आगे का समय बताएगा.

स्कूलों के बाथरूम की सफाई से लेकर कॉलेजों में व्याख्यान देने तक के लिए अब प्राइवेट कंपनियों की भूमिका बढ़ती जा रही है. आउटसोर्सिंग पहले एक तकनीकी व्यवस्था थी जो ‘कॉस्ट एफिशिएंसी’ के उद्देश्य से विकसित हुई थी. यह उत्पादन करने वाली और सेवा देने वाली कंपनियों के लिए मुफीद और व्यावहारिक रास्ता था. अब जब, सरकार भी अपने संस्थानों को इसी रास्ते चलाना चाहती है तो सेवा और श्रम संबंधी नैतिक संहिताओं की ऐसी की तैसी तो होनी ही है.

इन सबके बीच बिचौलिए की भूमिका निभाने वाली कंपनियों की तो पौ बारह होगी. है भी. जरा नजर उठा कर देख लीजिए, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अन्य सरकारी संस्थानों में विभिन्न श्रेणी के कर्मचारी मुहैया करवाने वाली आउटसोर्सिंग कंपनियों के मुनाफे का लेवल क्या है ! वह कहावत है न, ‘हर्रे लगे न फिटकिरी, रंग चोखा आए.’ फिर, संस्थान और कंपनियों के बीच करार में भूमिका निभाने वाले अधिकारियों के भी अपने लाभ कहे जा रहे हैं.

संदीप सौरभ के पोस्ट से ही जानकारी मिली कि इन कंपनियों के नाम पर ठगों का गिरोह भी सक्रिय हो गया है जो एक बेरोजगार युवक से रजिस्ट्रेशन के नाम पर तीस हजार रु. ले कर लापता है. जाहिर है, निरीह बेरोजगारों से ऐसी ठगी की घटनाएं बढ़ने वाली हैं, खूब बढ़ने वाली हैं.

बात यहां पर किसी नौकरशाह के लिए गए निर्णय की नहीं है. बात है सरकार के निर्णय की. इस तरह के बड़े निर्णय, जो नीतिगत श्रेणी में आते हैं, क्या बिना राजनीतिक स्तर पर हुए फैसलों के हो सकते हैं ? समझ में नहीं आ रहा.

सरकार नीतीश और तेजस्वी की है और समर्थन कांग्रेस और वाम दलों का है तो जिम्मेदारी भी उन सबकी ही है, निर्णय चाहे जिस लेवल पर हुए हों. यह महागठबंधन में शामिल राजनीतिक समूहों का वैचारिक स्खलन है.

सवाल उठता है कि इस तरह की नीतियों का क्रियान्वयन करने-करवाने वाली महागठबंधन की सरकार किस आधार पर नवउदारवादी भाजपा से राजनीतिक मुकाबला करने की बात करती है ? अगर ऐसी ही नीतियों को आगे बढ़ाना है तो फिर वैचारिकी के स्तर पर भाजपा के मुक़ाबिल होने का मतलब ही क्या है ?

नरेंद्र मोदी, आरएसएस और कार्पोरेट की जुगलबंदी का राजनीतिक मुकाबला अगर आप विचारों और नीतियों के स्तर पर नहीं कर सकते तो कुछ सार्थक हासिल नहीं कर सकते. राहुल गांधी के ओबीसी राग और नीतीश-लालू के जातीय गणना राग के बावजूद हिंदी पट्टी के तीन राज्यों के चुनाव परिणाम बताते हैं कि 2024 की चुनौतियां कितनी कठिन हैं.

किसी भी राजनीतिक समूह या नेता को यह समझना होगा कि भाजपा से मुकाबले के लिए जन सापेक्ष विचारों पर आधारित वैकल्पिक नीतियां ही उनके लिए निर्णायक अस्त्र बन सकती हैं. फिलहाल तो न किसी का चेहरा मोदी का मुकाबला करने में प्रभावी लग रहा है, न किसी तरह की राजनीतिक शोशेबाजियां.

नजरें उठा कर देखिए जरा, जनता के जीवन से जुड़े मुद्दों पर तमाम विफलताओं के बावजूद राजनीतिक शोशेबाजियों की बदौलत मोदी जी का चेहरा आज भी कितना चमक रहा है.

विचारहीनता और नीतिगत अपंगता के साथ कोई मोदी का राजनीतिक मुकाबला नहीं कर सकता. अगर आप इतना बड़ा राजनीतिक समूह, जिसे ‘महागठबंधन’ कहा जा रहा है, बना कर भी किसी ट्रेडर्स के माध्यम से सफाईकर्मी से लेकर प्रोफेसर तक बहाल करने की नीतियों पर ही चलते हैं तो आपका विजन आपको मोदी के मुकाबले कहीं का नहीं रखने वाला है.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

EVM का खेल : तेरा पीएम नहीं हूं मैं…

Next Post

ग्राउंड रिपोर्ट : सफलता की ओर बढ़ता किसान संगठनों का मिशन यूपी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

ग्राउंड रिपोर्ट : सफलता की ओर बढ़ता किसान संगठनों का मिशन यूपी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आधुनिक चीन को दुश्मन बताकर ‘विश्व गुरु’ क्या हासिल करना चाहता है ?

July 2, 2021

दुनिया भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले

January 23, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.