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देशवासियों को लूटकर खा जाने की आजादी नया राष्ट्रवाद है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 20, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
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देशवासियों को लूटकर खा जाने की आजादी नया राष्ट्रवाद है

मुद्रास्फीति 8% है, और बचत पर बैंक की ब्याज दर 4.8%. यानी घर मे रखने पर पैसा 8% की दर से घटेगा, बैंक में रखो तो 3.2% की दर से घटेगा (8 – 4.8 = 3.2). अब आप मजबूर हैं, बचत का पैसा शेयर मार्केट में को. No other option ! शेयर का पैसा कंपनी को जाएगा, डूब गई तो सारा पैसा गया.

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उधर बैंक ने जो जमा आपसे ली है, वह भी लोन बनकर कम्पनी को जाएगा. अब दिवालिया कानून जो मोदी की सरकार ने बनाया है, वो कहता है कि कम्पनी के मालिकान, कम्पनी डूबने पर सिर्फ उतने पैसे की देनदारी को मजबूर होगा, जितना कि उसकी शेयर कैपिटल है.

इसे ऐसे समझें – मान लें कम्पनी मालिक की 100 करोड़ की शेयर कैपिटल है. 1000 करोड़ आपकी बचत का शेयर मार्किट से उठा लिया. 5000 करोड़ बैंक से आपके पैसे से लोन उठा लिया लेकिन कम्पनी उसकी देनदारी 100 करोड़ ही रहेगी. यानी देशवासियों को लूटकर खा जाने की आजादी नया राष्ट्रवाद है.

इसी तरह बैंक डिपाजिट गारंटी स्कीम याने बैंक डूबने की स्थिति में आपको 5 लाख वापस मिलने की गारंटी को समझिए. 5 लाख तक के डिपॉजिट आपको इंश्योरेंस कम्पनी देगी, बाकी खत्म. अगर सरकार इन बैंकों की मालिक रहे तो ही जवाबदेही रहेगी ! बैंक ही प्राइवेट कर दो, तो वह समस्या भी खत्म.

कहते हैं यह मोदी सरकार तो भ्रष्टाचारी नहीं है ? तो बड़ा आश्चर्य यह कि इतने विशालकाय ‘मनी हेस्ट’ का रास्ता किसलिए साफ कर रही है ? कोई और पार्टी, या सरकार बिजनेसमैन के लिए इतना कर देती तो 50 साल तक उसे चुनाव चंदे के लिए भटकना न पड़ता.

राशन दुकान, थाने से वसूली, व्यापारी से कमीशन, अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग जैसी चिन्दी चोरी से फंड जुटाने की जरूरत नहीं होती, जिसके लिए कांग्रेस सरकार को बदनाम किया जाता है.

ऐसी पार्टी को पैसे की कमी न होती. हर जिले में करोड़ों का ऑफिस होता, दिल्ली में अट्टालिका होती. गली गली में पेड कार्यकर्ता होते, मजबूत संगठन होता, रोज प्रशिक्षण होते. झंडे, पोस्टर, बैनर से देश अटा रहता, करोड़ों की रैलियां और आयोजन होते. पर यह मोदी सरकार, ये पार्टी तो ईमानदार है, महान देशभक्त है, मितव्ययी है, फिर ऐसा क्यों कर रही है ? सच्ची राष्ट्रवादी है शायद !

राष्ट्रवाद की गुलाबी जमीन के नीचे, तेजाबी अर्थशास्त्र होता है. हम गुलाब से तेजाब की ओर फिसल चुके  रुकने की कोई वजह, कोई मौका नहीं है. खैर ! सन्देश यह है कि खर्च कीजिए, बचत करने की जरूरत नहीं. वो 8% की दर से डूबेगा, 3.2% की दर से डूबेगा या झटके से डूबेगा. कुल मिला कर आपकी बचत का डूबना तय है. बाकी 5 किलो आटा मिलना भी तय है.

‘अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, योगी मोदी कह गए, सबके दाता राम.’ इसलिए राम का नाम जपिये, मस्त रहिये. अगला मन्दिर आपके मोहल्ले में बनेगा. जय श्री राम.

  • अमित श्रीवास्तव

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