Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

गरीब देश के अमीर शासक

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 9, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

गरीब देश के अमीर शासक

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

सभी पार्टियों के कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक. प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है, अर्थात 91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह. इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभग 1100 करोड़ रूपये.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं. इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है, अर्थात भारत में विधायकों और सांसदों के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है. ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई. इसके अलावा इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा, इलाज, विदेशी सैर सपाटा भत्ता आदि का का खर्च भी अलग है और लगभग इतना ही बैठेगा ! अर्थात, इन विधायकों और सांसदों पर लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है, जो जनता के द्वारा दिया गया टैक्स का पैसा है.




अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड इत्यादि कुल 7 पुलिसकर्मी की सुरक्षा मिलती है. 7 पुलिस का वेतन लगभग (25,000 रूपये प्रति माह की दर से) 1 लाख 75 हजार रूपये होता है. इस हिसाब से 4582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख प्रति वर्ष है. इसी प्रकार सांसदों के सुरक्षा पर प्रति वर्ष 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं. Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए लगभग 16,000 जवान अलग से तैनात हैं, जिन पर सालाना कुल खर्च लगभग 776 करोड़ रुपया बैठता है.

इस प्रकार सत्ताधीन नेताओं की सुरक्षा पर हर वर्ष लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं. अर्थात, हर वर्ष इन नेताओं पर कम से कम 50 अरब रूपये खर्च होते हैं और इन खर्चों में राज्यपाल, भूतपूर्व नेताओं के पेंशन, पार्टी के नेता, पार्टी अध्यक्ष , उनकी सुरक्षा आदि का खर्च शामिल नहीं है. यदि उसे भी जोड़ा जाये तो कुल खर्च लगभग 100 अरब यानी 1 लाख करोड़ रुपया हो जायेगा.




अब सोचिये, हम प्रति वर्ष टैक्स इन नेताओं की अय्याशियों के लिये देते है या देश की तरक्की के लिये ?

जनता को ठेंगा दिखाकर ये नेता न सिर्फ अपनी झूठी शानो-शौकत और रुतबे के लिये जनता के पसीने की कमाई का 100 अरब रूपये से भी अधिक धन हर साल उड़ा देते हैं, बल्कि सत्ता में आने और रिश्वत के रूप में मिलने वाले काले धन को पाने के साथ ही तख्ता-पलट का खेल भी गाहे-ब-गाहे धन लेकर खेलते है ! क्या यही है लोकतंत्र ?

इन नेताओं को हम अपना प्रतिनिधि चुनते हैं और ये पैसे खाकर दलबदल कर लेते हैं. इसी कारण से पहले दल-बदल नियम में बदलाव करके दो-तिहाई किया गया था. मगर अब तो जरूरत है कि जो भी नेता दल-बदल करना चाहे, उसका चुनाव निरस्त माना जाये और उन सीटों पर फिर से उप-चुनाव करवाया जाये, जिसमें उस नेता को प्रतिबंधित किया जाये अर्थात उसके चुनाव लड़ने पर अगले पांच साल तक पाबंदी लगा दी जाये, तभी ये दलबदलू नेता सुधरेंगे.




सोचकर देखिये, जनता की जनता के टैक्स का जमा अब तक हज़ारों करोड़ रुपया ये नेता खा गये. अगर ये पैसा देश की जनता के लिये और देश की तरक्की के लिये खर्च किया गया होता तो ? तो आज भारत का बिल्डिंग स्ट्रेक्चर चीन जैसा भव्य और लिविंग स्टैंडर्ड अमेरिका जैसा विलासपूर्ण होता. और सुरक्षा, सुरक्षा तो रूस से भी ज्यादा उम्दा होती. भारत में कोई गरीब नहीं होता बल्कि हरेक नागरिक कम से कम लखपति होता. सबके पास अपना घर, अपना खेत, अपना काम और अपने पशु होते. सबके पास गाड़ियांं होती, लेकिन ये नेता जनता को हिन्दू-मुस्लिम और धार्मिक पाखंडों में उलझा के रखते हैं ताकि जनता को ये सब सोचने का मौका ही न मिले !




एक सर्जिकल स्ट्राइक इन नेताओ पर भी होनी चाहिये और ऐसी भयानक होनी चाहिये कि एक भी नेता बच न सके. इसके बाद भारत में दो स्पेशल कानून पारित होकर तुरंत प्रभाव से लागू किये जाने चाहिये. उसमें से पहला ‘इन नेताओं के चुनाव प्रचार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर पार्टी सिस्टम को ख़त्म किया जाना चाहिये तथा दूसरा सभी नेताओं के वेतन भत्तों और सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा देना चाहिये और सैलरी या पेंसन भी नहीं देनी चाहिये अर्थात जो भी नेता बनना चाहे उसे राष्ट्रहित में फ्री काम करना पड़े ! जिस ऐसा हुआ उस दिन भारत सोने की चिड़िया जैसा नहीं बल्कि सोने की लंका जैसा बन जायेगा !




Read Also –

 




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें ]




Previous Post

कश्मीर विवाद का सच

Next Post

बीएसएनएल को मोदी जानबूझकर बर्बाद कर रहा है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

बीएसएनएल को मोदी जानबूझकर बर्बाद कर रहा है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

एन्काउंटर

February 14, 2026

नेहरू झंडे की डोर खींच रहे थे…

May 28, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.