Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

गरीब कौन है..?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 16, 2020
in कविताएं
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

गरीब कौन है..?
जिसके पास खाने के लिए खाना
पहनने के लिए कपड़ा
रहने के लिए मकान नहीं है

तो क्या दुनिया में खाना कम है..?
क्या दुनिया में
सबकी ज़रूरत के लिहाज़ से,
कपड़े कम हैं..?
क्या दुनिया में
सभी इंसानों के रहने के लिए,
ज़मीन कम है..?

You might also like

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

नहीं, असल में तो दुनिया में
खाना ज़रूरत से ज़्यादा है
कपड़े ज़रूरत से भी ज़्यादा हैं
ज़मीन भी सभी के घर बनाने के लिए,
काफी से भी ज़्यादा है !

फिर दुनिया के करोड़ों लोग
बिना खाना, बिना कपड़े और
बिना मकान के क्यों हैं..?
कहीं ऐसा तो नहीं
हम बंटवारे में कोई गलती कर रहे हों..?

क्या कोई बच्चा गरीब पैदा होता है..?
क्या जो बच्चा पैदा हुआ है
उसके लिए ज़मीन, कपड़ा और
मकान इस दुनिया में मौजूद नहीं है..?
या उस बच्चे के हिस्से का दूध, निवाला व खिलौनों पर,
किसी और का कब्ज़ा है..?
उस बच्चे के कपड़ों पर,
किसी और का कब्ज़ा है..?
उस बच्चे के रहने की ज़मीन पर,
किसी और का कब्ज़ा है..?

इस बच्चे की ज़मीन पर,
जिसका कब्ज़ा है
क्या वही दुनिया के हर बच्चे की
भूख, नंगापन और
बेघर होने के लिए ज़िम्मेदार हैं..?
क्या उस नए पैदा हुए बच्चे की
ज़मीन पर कब्ज़ा करने वाला अमीर
कानून की मर्जी के बिना,
बच्चे के खाने, कपड़े और मकान पर,
कब्ज़ा करके बैठ सकता है..?

क्या कानून ही यह नहीं कहता कि
अगर इस बेशुमार दौलत में से
अभी-अभी पैदा हुआ बच्चा
अपने खाने, कपड़े और घर के लिए,
अपना हिस्सा मांगेगा तो
सरकार की पुलिस
उस दौलत, हज़ारों एकड़ ज़मीन की रक्षा करेगी
इस तरह सरकार की पुलिस की बंदूकें
गरीब बच्चे के खाना, कपड़ा और
मकान का हक़ छीन लेती है

आप सोच रहे थे कि
सरकारें गरीब की तरफ होती हैं
नहीं! बल्कि सरकारों के कारण
करोड़ों लोगों की गरीबी,
इस दुनिया से जा नहीं रही है

जिसके पास ज़्यादा ज़मीन है
क्या उनके लिए
प्रकृति ने ज़्यादा ज़मीन बनाई है..?
अगर आप कहते हैं कि यह ज़मीन
उसकी मेहनत का नतीजा है तो
क्या मेहनत का नतीजा
यह होना चाहिए कि कोई व्यक्ति
लाखों लोगों की ज़रूरत की ज़मीन पर,
कब्ज़ा करके बैठ जाए..?

क्या ज़्यादा ज़मीन वाले के पास
इसलिए ज़्यादा ज़मीन नहीं है क्योंकि
यह ज़मीन उसके बाप की है..?
और इस अमीर ने इस ज़मीन के लिए,
कोई मेहनत नहीं की है..?
क्या असली मेहनत करने वाले ही उससे वंचित नहीं हैं ?

तो क्या यह सच नहीं है कि
समस्या ग़रीब या गरीबी नहीं है ?
बल्कि समस्या तो अमीरी
व यह दौलत का नाजायज़ बंटवारा है
समस्या इस अमीरी की रक्षा,
करने वाले कानून और इस अमीरी की
रक्षा करने वाली सरकार है

यही वह राजनैतिक व्यवस्था है
जिसे बदले बिना दुनिया से,
भूख, नंगापन और बेघरी नहीं जायेगी
आप इस क्रूर व्यवस्था को समझ न सकें
इसलिए आपके स्कूल
आपको इस व्यवस्था की तारीफ के
गुणगान करना सिखाते हैं

आपका धर्म !
इस पर सवाल खड़े करना नहीं सिखाता
और आप इस दुनिया को
सुंदर बनाने के अपने असली धर्म से,
वंचित रहकर ही
अपनी उम्र पूरी करके
इस दुनिया से चले जाते हैं
और यह क्रूर व्यवस्था
ऐसे ही चलती रहती है

इसे समझिए
इस पर सवाल उठाइये
ताकि दुनिया को बदलने की
संभावना मज़बूत हो सके
इस दुनिया को बदलने का वक्त अभी है

जागो! भूखो, वंचितो, मेहनतकशो
यहाँ आपका भी पूरा हक़ है
आपकी ग़ुलामी की ज़ंजीरें
आपको ही मिलकर तोड़नी होंगी.

  • हिमांशु कुमार

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

राष्ट्रभाषा हिंदी को उसका सही स्थान दिलाने के लिए देशव्यापी आंदोलन की जरूरत

Next Post

हिन्दुत्व के आड़ में देश को लूटना, असली मक़सद

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
Next Post

हिन्दुत्व के आड़ में देश को लूटना, असली मक़सद

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

चे-ग्वेरा के जन्म दिन पर ‘चे’ को याद करते हुए

June 14, 2024

सिंहावलोकन – 1: मोदी सरकार के शासन-काल में शिक्षा की स्थिति

May 21, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.