21 जनवरी पर विशेष : विश्व के महान नेता कामरेड लेनिन स्मृति दिवस
165 बार पढ़ा गया

21 जनवरी पर विशेष : विश्व के महान नेता कामरेड लेनिन स्मृति दिवस
21 जनवरी वह दिन है जब दुनिया ने एक महान क्रांतिकारी को खोया, लेकिन उसी क्षण एक ऐसे विचार को अमरत्व मिला जिसने पूरी मानव सभ्यता की दिशा बदल दी. कामरेड लेनिन केवल रूस की अक्टूबर क्रांति के नेता नहीं थे, बल्कि वे शोषणमुक्त समाज के सबसे सुसंगत और व्यावहारिक सिद्धांतकार थे. उनका जीवन संघर्ष, अध्ययन, संगठन और जनक्रांति के कालजयी ओज से लबरेज था.
लेनिन का जन्म 22 अप्रैल 1870 को रूस के सिम्बिर्स्क (आज का उल्यानोव्स्क) में हुआ. उनका वास्तविक नाम व्लादिमीर इलिच उल्यानोव था. परिवार शिक्षित था, लेकिन सामंती-ज़ारशाही शासन की क्रूरता ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी. उनके बड़े भाई अलेक्ज़ेंडर उल्यानोव को ज़ार अलेक्ज़ेंडर तृतीय की हत्या की साज़िश के आरोप में फांसी दे दी गई. इस घटना ने लेनिन को भीतर तक झकझोर दिया और उन्होंने अपना जीवन शोषक व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए समर्पित कर दिया.
लेनिन ने क़ानून (लॉ) की पढ़ाई की, लेकिन उनका असली विश्वविद्यालय समाज था. उन्होंने कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स के किताबों का गहन अध्ययन किया.
मार्क्सवाद को उन्होंने केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे रूसी परिस्थितियों के अनुसार व्यावहारिक क्रांतिकारी सिद्धांत में बदला. यही आगे चलकर लेनिनवाद कहलाया—जिसका मूल था संगठित पार्टी, अनुशासित कैडर और निर्णायक कार्रवाई.
ज़ारशाही शासन के खिलाफ गतिविधियों के कारण लेनिन को कई बार गिरफ़्तार किया गया और साइबेरिया में निर्वासित किया गया. निर्वासन उनके लिए रुकावट नहीं, बल्कि तैयारी का समय था.
उन्होंने रूस और यूरोप में रहकर क्रांतिकारी संगठनों को मज़बूत किया और रूसी सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी को दिशा दी. 1903 में पार्टी का विभाजन हुआ और लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक धड़ा उभरा—जिसने आगे चलकर समाजवादी रूस की बुनियाद रखी.
1917 की महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति
पहला विश्व युद्ध, भुखमरी, बेरोज़गारी और ज़ारशाही की नाकामी ने रूस को विस्फोटक स्थिति में पहुंचा दिया था. लेनिन ने नारा दिया— 'शांति, रोटी और ज़मीन'. यह नारा सीधे मज़दूरों, किसानों और सैनिकों के दिलों तक पहुंचा. अक्टूबर 1917 में लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने सत्ता पर कब्ज़ा किया. यह इतिहास की पहली सफल समाजवादी क्रांति थी, जिसने साबित किया कि श्रमिक वर्ग सत्ता संभाल सकता है और राज्य चला सकता है. क्रांति के बाद लेनिन ने सोवियत राज्य की नींव रखी. उनकी प्रमुख नीतियां थीं -- ज़मीन का किसानों में वितरण
- उद्योगों का राष्ट्रीयकरण
- शिक्षा और स्वास्थ्य को जनअधिकार बनाना
- स्त्री-पुरुष समानता
- साम्राज्यवादी युद्ध से बाहर निकलना
अंतरराष्ट्रीय दृष्टि और साम्राज्यवाद विरोध
लेनिन ने साम्राज्यवाद को पूंजीवाद की चरम अवस्था बताया. उनकी प्रसिद्ध कृति 'साम्राज्यवाद: पूंजीवाद की चरम अवस्था' आज भी विश्व राजनीति को समझने की कुंजी है. उन्होंने उपनिवेशों के मुक्ति आंदोलनों का समर्थन किया और एशिया, अफ्रीका व लैटिन अमेरिका के संघर्षों को प्रेरणा दी.अंतिम समय और निधन
लगातार काम, युद्ध और तनाव ने लेनिन के स्वास्थ्य को तोड़ दिया. 21 जनवरी 1924 को 53 वर्ष की आयु में उनका मृत्यु हो गई. उन्होंने सिखाया कि इतिहास राजा नहीं, जनता बनाती है; और क्रांति कोई सपना नहीं, संगठित संघर्ष का परिणाम होती है. 'जब तक शोषण रहेगा, तब तक लेनिन प्रासंगिक रहेंगे.' साम्राज्यवाद मुर्दाबाद ! कामरेड लेनिन अमर रहें !- ऐ. के. ब्राईट
हमारे काम में सहयोग करें
हमें सहयोग करें
स्वतंत्र लेखन और जनपक्षीय पत्रकारिता को जारी रखने में अपना योगदान दें। इस QR code को scan करके सहयोग करें।


0 टिप्पणियां
अपनी प्रतिक्रिया दें
आपकी टिप्पणी approval के बाद प्रकाशित होगी।