Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हमारी दुर्गति हमने खुद ही की हुई है, पिट सब रहे हैं पर अलग-अलग

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 13, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

हमारी दुर्गति हमने खुद ही की हुई है, पिट सब रहे हैं पर अलग-अलग

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, प्रसिद्ध गांधीवादी चिन्तक

सबसे पहले सरकार आपको बताती है कि जंगल सरकार का है. फिर सरकार कहती है आदिवासी ने इस जंगल पर गैरकानूनी कब्ज़ा कर लिया है. फिर सरकार आदिवासी को निकालने के लिये वन विभाग को भेजती है. वन विभाग की मदद के लिये पुलिस को भेजती है. पुलिस आदिवासी को पीटती है, पैसा छीनती है, उसकी बेटी से बलात्कार करती है. आदिवासी विरोध करता है. फिर सरकार सीआरपीएफ को जंगल में भेजती है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

जब आदिवासी और सीआरपीएफ में टकराव होता है तो सरकार कहती है ये लोग देशद्रोही हैं, सरकार से लड़ रहे हैं. फिर जब सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी जनता को बताते हैं कि सरकार गलती पर है तो सरकार इन सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाल देती है और कहती है यह लोग भी आतंकवादी हैं.

जंगलों से दौलत को लूट-लूट कर बेइंतेहा दौलतमंद बनने के बाद जब पूंजीपति सरकारों को अपनी उंगलियों पर नचाते हैं, वह आपकी समस्याओं की तरफ ध्यान भी नहीं देते, तब आपको यह समझने में मुश्किल होती है कि आखिर यह सरकार आपकी तरफ ध्यान क्यों नहीं दे रही ?-एक-एक ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए आपके परिवार के सदस्य बिना पानी की मछली की तरह तड़प तड़प कर मर जाते हैं और दाढ़ी बढ़ा कर ऋषि मुनि का भेष धरकर एक बेशर्म प्रधानमंत्री घोषणा करता है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा !

इस पूरे लूट के खेल की तरफ आपका ध्यान न जाए इसलिए हिंदू मुस्लिम की लड़ाई की तरफ आपका ध्यान भटकाया जाता है. लेकिन जो इनका असली काम है वह है मुल्क की दौलत पर कब्जा करना. राजनीति असल में अर्थनीति है. पैसे के लिए, पैसे के द्वारा, पैसे का खेल ही राजनीति है.

बस्तर में पुलिस औरतों को, बच्चों को, बूढ़ों को मार डालती है और कहती है कि यह माओवादी कमांडर थे. देश कोई सवाल नहीं करता. अदालत इनकी तरफ देखती भी नहीं..मैं अभी तक साढे पांच सौ मामले कोर्ट को सौंप चुका हूं, एक में भी आज तक इंसाफ नहीं मिला.

2 साल पहले एक मामला हुआ था. एक आदिवासी युवती को बलात्कार करने के बाद गोली मार दी गई थी. पुलिस ने युवती की लाश की फोटो प्रकाशित की थी. उस युवती को नक्सलियों की वर्दी पहनाई गई थी. वर्दी पर न तो खून लगा हुआ था, ना एक भी गोली का छेद था. पैंट इतनी लंबी थी कि उसको नीचे से दो तीन बार फोल्ड किया गया था. कोई बच्चा भी देखकर समझ सकता था कि पुलिस ने कितनी बेवकूफी से काम किया है.

पुलिस हर जगह इसी तरह की बदमाशी पूर्ण हरकतें करती है. पिछले महीने की लखनऊ की घटना ले लीजिए. पुलिस ने दावा किया कि उसने दो मुस्लिम को पकड़ा है, जो प्रेशर कुकर और रिक्शे की बैटरी का इस्तेमाल करके बम बनाते थे, वह भी अलकायदा के लिए. इनसे पूछो कि गधों अलकायदा को क्या बमों की कमी है कि वह लखनऊ के रिक्शेवाले से कहेगी कि तू हमको बम बना कर दे.

अब आप फोटो देखिए. बम डिफ्यूजल स्कवाड वाला वर्दी पहने हुए है. उसके पीछे एक पुलिस वाला बिना हेलमेट, बिना किसी सुरक्षा के चिपक कर फोटो खिंचवा रहा है क्योंकि उस पुलिस वाले को पता है कि बम डिफ्यूजल स्क्वाड वाली वर्दी पहने हुए पुलिस वाले के हाथ में जो है, वह एक साधारण प्रेशर कुकर है बम नहीं. और नजदीक में ही खड़े होकर फोटो खींचने वाले मीडिया कैमरे वालों को भी पता है कि यह सारी कहानी फर्ज़ी है और वहां कोई बम नहीं है इसीलिए वह लोग बिल्कुल नजदीक खड़े होकर फोटो खींच रहे हैं. अगर यह सचमुच का बम होता तो इसके इतने नजदीक इनमें से कोई भी नहीं आता.

सरकार बदमाश है, पुलिस गुलाम है, मीडिया गरीब है दो पैसे में बिक जाती है और जनता कुचली जा रही है, पीटी जा रही है, लूटी जा रही है. किसान पीटा जा रहा है, मजदूर पीटा जा रहा है, अल्पसंख्यक पीटा जा रहा है, दलित पीटा जा रहा है, आदिवासी पीटा जा रहा है. पीटने वाला एक ही है, मार खाने वाले अलग-अलग है.

जब एक को पीटा जाता है तो दूसरे से कहा जाता है तुम चुप रहो. जब मुसलमान को पीटा जाता है तो बाकी लोगों से कहा जाता है यह आतंकवादी है, पाकिस्तानी है, इसका साथ मत दो. जब आदिवासी को पीटा जाता है तो कहा जाता है ये नक्सली है, हमारा विकास नहीं होने दे रहे. जब किसान को पीटा जाता है तो कहा जाता है यह खालिस्तानी है. और हम इतने स्वामी भक्त हैं कि सरकार में बैठे इन गुंडों, बदमाशों, बेईमानों, अपराधियों की हर बात को सच्ची और ईश्वरीय वाणी समझते हैं. हमारी दुर्गति हमने खुद ही की हुई है. पिट सब रहे हैं पर अलग-अलग.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रेड इंडियन्स, माओरी वगैरह की बस्तर-त्रासदी

Next Post

जातिवार जनगणना से कौन डरता है ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

जातिवार जनगणना से कौन डरता है ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

दिल्ली के दंगे और उसकी चुनौतियों को याद रखा जाना चाहिए

March 11, 2020

100 करोड़ की आपराधिक मानहानि से लेकर हत्या तक

October 18, 2017

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.