Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

मौलिक अधिकार के नाम पर बुर्कापोशों की गुंडागर्दी : मुस्कान बनाम अरुसा परवेज

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 17, 2022
in ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मौलिक अधिकार के नाम पर बुर्कापोशों की गुंडागर्दी : मुस्कान बनाम अरुसा परवेज
मौलिक अधिकार के नाम पर बुर्कापोशों की गुंडागर्दी : मुस्कान बनाम अरुसा परवेज

बुर्कापोशों की गुंडागर्दी अब खुलकर सामने आ गई है जब कश्मीर की एक छात्रा अरुसा परवेज ने बिना बुर्कापोशी या हिजाब पहने एक इंटरव्यू दिया और उसकी तस्वीर मीडिया में छपी. बिना बुर्कापोशी के छपी अरुसा की तस्वीरों ने बुर्कापोशों की गुंडागर्दी सामने ला खड़ी की, जिसने मुस्कान के बुर्कापोशी का समर्थन यह कहकर किया कि बुर्का पहनना या ना पहनना उसका मौलिक अधिकार है.

अब इसी मौलिक अधिकार के नाम पर बुर्कापोशों की बोलती तब बंद हो गई जब कश्मीर की छात्रा अरुसा की तस्स्वीर बिना बुर्कापोशी के छपी और बुर्कापोशों के गुंडों ने बुर्कापोशी न होने के उसके मौलिक अधिकार का हनन करते हुए उसका सर कलम करने का फतबा जारी कर दिया.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

दरअसल अरुसा परवेज़ जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के इलाहीबाग इलाके की रहने वाली है, जो साइंस स्ट्रीम में 500 (99.80 फीसदी) में से 499 अंक हासिल की है. श्रीनगर के उपायुक्त मोहम्मद एजाज असद ने उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान उनका सम्मान किया और उनकी सफलता के लिए प्रोत्साहन के रूप में उत्कृष्टता प्रमाण पत्र, एक ट्रॉफी और 10,000 रुपये के चेक से सम्मानित किया गया था, जिसकी तस्स्वीर मीडिया में छपी थी. इससे बौखलाया बुर्कापोशों का गिरोह सोशल मीडिया पर अरुसा को जमकर न केवल ट्रोल ही किया अपितु सर काटने की धमकी भी दी.

यही पर बुर्कापोशों की सारी दलीलें धरी रह जाती है जब वह मुस्कान के बुर्कापोशी के अधिकार का तो समर्थन करता है जबकि वह अरुसा के बुर्कापोशी न करने के अधिकार को कुचल डालना चाहता है. यह दरअसल महिलाओं को सदियों पुरानी गुलामी और घर के सजावट की वस्तु मानने के पितृसत्तात्मक सोच का ही परिणाम है. याद होगा भारत की मशहूर टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा के शॉर्ट्स ड्रेस पहनने का भी इसी सोच के कारण विरोध किया था.

आज भी दुनिया भर की मुस्लिम औरतें बुर्कापोशी का विरोध कर रही है और इसके बदले में अपनी जान तक दाव पर लगा रही है, तब मौलिक अधिकारों के नाम पर भारत में बुर्कापोशी का समर्थन करना या समर्थक बनना, प्रतिक्रियावादी पितृसत्तात्मक सामंती व्यवस्था को ही मजबूत करना या उसे बढ़ावा देना होगा. मुस्कान बुर्कापोशी हो, यह उसका अधिकार हो सकता है तो अरुसा का बुर्कापोशी न होना भी उसका मौलिक अधिकार होना चाहिए.

क्या हम भूल गये है कि सती प्रथा के नाम पर औरतों को जिन्दा जलाने की क्रूरता को ? जब राजाराम मोहन राय ने सती प्रथा की क्रूरता का विरोध किया तो ऐसे ही कट्टरपंथी ताकतों ने राजा राम मोहन राय के खिलाफ विरोध का झंडा बुलंद कर दिया था, वह भी समाजिकता और परम्परा के नाम पर, जो असलियत में ‘मौलिक अधिकार’ का ही पुरातन शैली था. उसी तरह दलित महिलाओं पर स्तन टैक्स लगाने की भी प्रथा थी, जिसके खिलाफ आन्दोलन होने पर कट्टरपंथियों ने भी यही ‘समाजिकता और परम्परा’ का राग अलापा था.

ऋयह एक सामान्य सा विज्ञान है कि महिलाओं को पर्दा या बुर्कापोशी कराने से न केवल उसकी प्रतिभा पर ही प्रतिकूल असर पड़ता है बल्कि महिलाओं को एक ‘वस्तु’ बनाने की प्रतिक्रियावादी सोच को भी बल मिलता है. यही कारण है कि तुर्की के अतातुर्क मुस्तफा कमाल पाशा ने बड़ी ही बेरहमी से न केवल बुर्कापोशी का विरोध किया अपितु इसके समर्थक कट्टरपंथी ताकतों को कुचल भी दिया.

आज जो प्रगतिशील और उदारतावादी ताकतें जो बुर्कापोशी का समर्थन कर रहे हैं दरअसल कल वे सती प्रथा और स्तन टैक्स का समर्थन करते नजर आये तो कोई अचंभा नहीं होगा. दरअसल ये लोग वे लुढ़कने वाले लोटा हैं जिनका पेंदा नहीं है और जिधर सुविधापूर्वक लुढ़कने का सहुलियत मिलता है उधर लुढ़क जाते हैं. इसको गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है.

हां, बुर्कापोशी का उलट नंगा होना नहीं होता. मुस्तफा कमाल पाशा ने अपने देश के लिए यूरोपीय परिधान को अपने देश का राष्ट्रीय परिधान घोषित किया था, ठीक वैसे ही जैसे भारतीयों का राष्ट्रीय परिधान धोती कुर्ता, साड़ी, लुंगी को बनाया गया था. परन्तु, भारतीयों का यह राष्ट्रीय परिधान जिस सामंतकालीन वक्त के लिए ठीक था, अब वही राष्ट्रीय परिधान आज के औद्योगिक काल में अनुपयुक्त हो गया है. इसलिए भारतीयों को भी एक राष्ट्रीय परिधान औद्योगिकीकरण के इस दौर में पश्चिमी सभ्यता की ही भांति बदलना चाहिए, न कि मूर्खों और पाखंडियों की भांति परम्परा के नाम पर पुरातन से चिपका रहना चाहिए.

Read Also –

छद्म सपनों की आड़ में धर्मवाद और कारपोरेटवाद की जुगलबंदी भाजपा को किधर ले जायेगा ?
हिजाब पर खिंचाव अर्थात, नया संसद, नया संविधान, नया देश बनाने की कवायद
पितृसत्ता से संघर्ष के लिए धर्मसत्ता से संघर्ष करना जरूरी भी है, मजबूरी भी
कर्नाटक : शिक्षण संस्थानों में बुर्के पर बबाल के बीच सवाल 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

शाम फिर से सुर्खियों में है

Next Post

छलपूर्ण चुनाव : फासीवाद का चौदहवां लक्षण

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

छलपूर्ण चुनाव : फासीवाद का चौदहवां लक्षण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

रविशंकर प्रसाद : अर्थशास्त्र का एक नया मॉडल

October 23, 2019

यूक्रेन युद्ध : पश्चिमी मीडिया दुष्प्रचार और रूसी मीडिया ब्लैक-आउट

March 4, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.