Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में है भारत का राजनीतिक भविष्य

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 5, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में है भारत का राजनीतिक भविष्य

मेरे बहुत से मित्र कांग्रेस में भारत का राजनीतिक भविष्य देखते हैं. वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में ये आपकी मज़बूरी हो सकती है लेकिन दो बातें बिल्कुल साफ हैं जिन्हें नजरदांज नहीं करना चाहिए. पहला कॉरपोरेट परस्त नीतियों के मामले में कांग्रेस भाजपा से अलग नहीं होगी इसलिए बहुत-सी तकलीफें जो इसी से पैदा होती हैं वो बरकरार रहेगी.

दूसरा, मुसलमान विरोधी साम्प्रदायिकता के मामले में कांग्रेस हमेशा हिन्दुत्व की सियासत के साथ रही है. ऐसा करने में नेहरू जी की मज़बूरी रही होगी लेकिन राजीव जी तक आते-आते ये एक सियासी टूल बन चुका था, जिसे कांग्रेसी लोगों ने भी इस्तेमाल किया है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

थोड़ा साफ कर देता हूं, बाबरी मस्जिद में मूर्ति रखी गई तब नेहरू जी प्रधानमंत्री थे, जब ताला खोला गया तब राजीव जी प्रधानमंत्री थे, मस्जिद तोड़ी गई तो नरसिम्हा राव जी प्रधानमंत्री थे. पहला शिलान्यास भी कांग्रेस ने ही करवाये.

पूरे उत्तर भारत में मुसलमान विरोधी दंगे जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं, कांग्रेस के दौर में हुए हैं और ज़्यादातर अपराधी कानून के शिकंजे से बच गए या बचा लिए गए. यही नहीं दलित विरोधी मारकाट में भी कांग्रेस का वही रवैया रहा है, जो मुसलमानों के मामले में रहा है.

आरएसएस या भाजपा जिस भी हथियार या टूल का इस्तेमाल करते हैं वो अमूमन कांग्रेस की फैक्ट्री में बना होता है. दूसरी तमाम पार्टियों के पास सियासी क़ूवत ज़्यादा नहीं है लेकिन हिन्दुत्व की सियासत उनके लिए भी ज़रूरी है. इसी में कुछ जूठन चाट लेने की कोशिश उनकी भी होती है.

जाति व्यवस्था पर आधारित एक सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक ढांचा वाली हुकूमत बनाने की कोशिश जो लगभग सौ साल पहले शुरू हुई थी वो लगातार बढ़ती ही रही है और अब तो इसके सामने कोई चुनौती भी नहीं है.

हिन्दुत्व की राजनीति मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि शूद्रों (दलित और पिछड़ा) के खिलाफ है लेकिन अगर मुसलमानों पर हमला कुछ महीने भी रुक गया तो लोगों को जातिगत असमानता और आर्थिक लूट नज़र आने लगेगी, इसलिए ये हमले निरंतर जारी रहेंगे. फिलहाल देश का एक बड़ा वर्ग मुसलमानों को लेकर पागलपन की हद तक जा चुका है, पागलों की इस जमात को भी लगातार काम चाहिए. ऐसा न हुआ तो ये पागलपन से बाहर आ जाएंगे और अपने आकाओं को ही खा जायेंगे.

इस सूरत में मार्क्सवादी सियासत देश और दुनिया का तार्किक विकल्प है लेकिन यहां दो बड़ी चुनौतियां हैं. मीडिया अपनी ताकत से देश के सभी वर्गों में मार्क्सवाद की गलत तश्वीर पेश करती रही है आगे भी करती रहेगी. दूसरे तरह-तरह की वामपंथी पार्टियां अपनी मौजूदगी से जनता में कोई आशा फिलहाल नहीं जगा पाई हैं, इनके बीच सही वामपंथ ओझल-सा हुआ है.

एक और निराशाजनक स्थिति है. हमारा पड़ोसी श्रीलंका हो या म्यामार, बरबादी के बाद भी जनता पूंजीवादी लूट को न देख पाए, इसकी कोशिश यहां कामयाब हुई है, यहां एक बार फिर जनता के राजनीतिक प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाली ताकतें कमज़ोर साबित हुई हैं.

देश का पीड़ित मुसलमान हो या शूद्र, मरते मरते भी इस राजनीतिक ऑक्सीज़न को नहीं पहचान पा रहे हैं. मेरी सभी वर्गों के जागरूक तबके के आप मित्रों से एक अनुरोध करता हूं. अतीत में रूस चीन में क्या हुआ या फ़लाने फ़लाने ने क्या किया, इसे छोड़िए, एक पतली सी किताब पीडीएफ में मिल रही है, नाम है कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो, डाऊनलोड कीजिये और पढिये.

हिन्दू बनाम मुसलमान या सवर्ण बनाम दलित की सियासी बहस हमें किसी समाधान पर नहीं ले जाती. हिन्दुत्व की सियासत भी चाहती है कि हम इसी बहस में उलझे रहे, लेकिन भारत जिस राजनीतिक संकट में पहुंच चुका है इसे यहां से बाहर निकालने के लिए प्रचलित और प्रेरित बहस से निकलना होगा, पढ़िए और खुद तय कीजिये कि सही क्या है. फिर बिना किसी पूर्वाग्रह के लोगों से चर्चा कीजिये, जो लोग साथ नज़र आयें उनके साथ आगे बढ़िये.

ये तरीका बहुत अपीलिंग शायद न लगे लेकिन कोई और विकल्प भी नज़र नहीं आता, फिलहाल कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो पढ़िए, उसके बाद आगे सोचा जाएगा.

जो लोग बात करना चाहेंगे उनके साथ फोन पर या मिलकर बात की जाएं. भारतीय जनता के लिए ये संकट का दौर है लेकिन यही वो दौर है जब हमको देश को तबाही की ओर ले वाली ताकतों से निपटना पड़ेगा, कॉरपोरेट लूट या मेहनतकशों की हुकूमत, आज हमारे सामने बस यही दो विकल्प हैं, बीच में भटकाने वाली सियासी भीड़ भी है लेकिन ये सभी कॉरपोरेट लूट के साथ हैं, आपको अपना रास्ता चुनना है.

  • डॉ. सलमान अरशद

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

सुप्रीम कोर्ट कॉरपोरेट घरानों और हत्यारों-बलात्कारियों का संरक्षण स्थल है

Next Post

जेलेंस्की के खिलाफ रुसी कार्रवाई में पश्चिमी मीडिया के झूठे प्रोपेगैंडा से सावधान

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

जेलेंस्की के खिलाफ रुसी कार्रवाई में पश्चिमी मीडिया के झूठे प्रोपेगैंडा से सावधान

Recommended

कोरोना और लॉकडाऊन का संबंध नियंत्रण से है, बीमारी से नहीं

April 13, 2021

पार्वती योनि

November 10, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.