Wednesday, July 29, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘लिखे हुए शब्दों की अपेक्षा लोगों को फिल्मों से जोड़ना अधिक आसान है’ – हिटलर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 19, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'लिखे हुए शब्दों की अपेक्षा लोगों को फिल्मों से जोड़ना अधिक आसान है' - हिटलर
आप वही देख रहे हो जो दिखाया जा रहा है वर्ना तथ्य तो ये हैं कि कश्मीर में आतंकवादियों ने हर उस व्यक्ति को मारा, जो उनके अनुसार भारत सरकार के साथ था.
girish malviyaगिरीश मालवीय

इतिहास में केवल एक ही उदाहरण मिलता है जब चुनी हुई सरकार ने जनता को नफरत फ़ैलाने वाली फिल्म देखने के लिए प्रेरित किया हो. हम बात कर रहे हैं नाजी जर्मनी की. नाज़ी पार्टी ने 1933 में जर्मनी में Department of Film की स्थापना की. इसका मुख्य कार्य ‘सार्वजनिक ज्ञान और शिक्षा के लिए उपयुक्त’ फिल्म शो आयोजित करना था, ऐसी फिल्मों का मुख्य लक्ष्य जातीय और नस्लीय ‘सफाई’ का था.

You might also like

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उस दौर में डाक्यूमेंट्री, न्यूज़रील, शॉर्टफिल्म्स और फीचर फिल्म मिलाकर लगभग 1000 फिल्में बनाई गई. नाजी फिल्म विभाग द्वारा निर्मित यहूदी विरोधी फिल्म द इटरनल जूयस और जूड सस को 1940 में रिलीज़ किया गया.

आपको जानकर बेहद आश्चर्य होगा कि जिस तरह से यहां एक राज्य के गृहमंत्री द्वारा ऐसी फिल्म देखने के लिए पुलिसकर्मियों को छुट्टी दी जा रही है वैसे ही होलोकास्ट के मुख्य कर्ताधर्ता और हिटलर के विश्वस्त सहयोगी हेनरिक हिमलर ने एसएस और पुलिस के सदस्यों से एसी फिल्में देखने का आग्रह किया था.

नाजी जर्मनी में ऐसी प्रोपेगंडा फिल्मों के निर्माण के लिए कम ब्याज पर लोन उपलब्ध कराने के लिए लिए एक फिल्म बैंक (फिल्म क्रेडिट बैंक जीएमबीएच) की स्थापना की गई और ऐसी फिल्मों को टैक्स फ्री भी किया गया. नाजी जर्मनी में ऐसी फिल्मों को पुरस्कृत भी किया जाता था,

हिटलर स्वयं फिल्मों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव के बारे में समझ रखता था. अपनी आत्मकथा ‘मीन कैम्फ’ में उसने लिखा है कि लिखे हुए शब्दों की अपेक्षा लोगो को फिल्मों से जोड़ना अधिक आसान है. हिटलर और उसका प्रचार मंत्री गॉयबल्स नियमित रूप से अपने घरों में फिल्में देखते थे और अक्सर फिल्मों और फिल्म निर्माण पर चर्चा करते थे. साफ़ नजर आता है कि फिल्में नाजी जर्मनी में प्रोपेगेंडा प्रचार के सबसे महत्वपूर्ण साधन में थी. आज भारत में भी यही देखने में आ रहा है.

सदन में ‘कश्मीर फाईल्स’ फिल्म का जिक्र करते हुऐ मोदी कहते हैं कि ‘सारी दुनिया मार्टिन लूथर और नेल्सन मंडेला की बात करती है लेकिन दुनिया गांधीजी पर बहुत कम चर्चा करती है. वे कहते हैं कि पहली बार एक विदेशी फिल्म निर्माता ने गांधी जी पर फिल्म बनाई, जिस पर ढेर सारे पुरस्कार मिले. इसके बाद दुनिया को पता चला कि महात्मा गांधी इतने महान व्यक्ति थे.’ मोदी यहां कह रहे है कि 1982 में बेन किंग्सले के ‘गांधी’ बनने से पहले विदेश में गांधी की कोई लोकप्रियता ही नहीं थी. फ़िल्म बनी उसके बाद ही गांधी जी लोकप्रिय हुए.

मोदी ऐसी उलटबांसिया बहुत पहले से ही सुनाते आए हैं. उपर हिटलर का ज़िक्र किया था इसलिए आज भी मोदी की ऐसी बेतुकी बातों को समझने के लिऐ हिटलर का आइडियोलॉजी को समझना होगा – हिटलर की राय में प्रोपगंडा आम लोगों पर केंद्रित और उसका बौद्धिक स्तर आम लोगों के रुचि के हिसाब से होना चाहिए, ताकि उनकी कल्पनाओं को गुदगुदाया जा सके. हिटलर मानता था कि आम लोग मानवीय बच्चों की अनिश्चयग्रस्त भीड़ की तरह होते हैं, उनके लिए संतुलित तर्क कर पाना असंभव होता है. उनकी भावना महज दोधारी होती है.

लिखे हुऐ शब्दों से बोले गए शब्द अधिक प्रभाव छोड़ते हैं. आउटलुक पत्रिका के एक लेख में पारसनाथ चौधरी लिखते हैं कि ‘नात्सी लोगों का अफवाह पर सर्वाधिक भरोसा इसलिए था कि वे लिखित शब्दों को फालतू मानते थे. उनकी राय में आदमी उन्हीं चीजों को पढ़ता है, जो उनके पहले से बने विचारों को मजबूत करने का काम करती हैं. इसी वजह से नात्सियों का मानना था कि बोले गए शब्द लोगों के विचार को तत्काल बदल सकते हैं.

खुद हिटलर लिखित शब्दों को बकवास मानता था. फौरी भाषण ही उसके लिए सब कुछ था. बोले गए शब्द नात्सी लोगों के लिए इतने महत्वपूर्ण थे कि नात्सी पार्टी में एक विशेष सेल का गठन किया गया था, जिसका एकमात्र काम देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय नात्सी वक्ताओं के लिए ‘फौरी सूचनाएं’ आपूर्ति करना होता था. कहने की जरूरत नहीं कि ये सारी जानकारियां मनगढ़ंत होती थीं.

गोएबल्स के प्रोपगंडा का मूल उद्देश्य आम लोगों में हिटलर के प्रति स्वामिभक्ति की भावना पैदा करना और यहूदियों को जर्मन राष्ट्र के घोर ‘दुश्मन’ के रूप में पेश करना था. इनमें आधारहीन तथ्यों या अफवाहों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता था. यहूदियों को दुश्मन के रूप में लक्षित करने से गोएबल्स का प्रोपगंडा आश्चर्यजनक ढंग से सफल साबित हुआ था.

कुछ लोगों का मानना है कि गोएबल्स की नकल में ही सभी तानाशाह अपने लिए एक दुश्मन की रचना करते हैं. राजनैतिक प्रोपगंडा के संदर्भ में आज दुश्मन का जुगाड़ करना तो सिद्धांत ही बन गया है. आज मोदीकालीन भारत में दुश्मन नंबर 1 कौन है, यह तो आप जानते ही हैं.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

सिलिकोसिस : मंदिरों की मूर्तियां बनाने में मौत के घाट उतरते मजदूर

Next Post

असुर कृष्ण को आर्यों ने विष्णु का अवतार घोषित कर दिया ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

असुर कृष्ण को आर्यों ने विष्णु का अवतार घोषित कर दिया ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सिनेमा, क्रिकेट और राजनीति आधुनिक युवाओं के आदर्श

May 23, 2021

देशद्रोह बनाम देशप्रेम

January 20, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.