Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

क्या भारत में नरसंहार की तैयारी चल रही है ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 23, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

क्या भारत में नरसंहार की तैयारी चल रही है ?

नरसंहार शोधकर्ता डॉ. ग्रेगरी स्टैंटन

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ
यदि हत्यारे डाकू बलात्कारी अपराधी पापी प्रत्याशी लोकतंत्र के मन्दिर में ‘पुरोहित’ (सांसद या विधायक ) बनेंगे तो उस मन्दिर (संसद भवन) का खण्डहर होना तय है, जहांं वे (धार्मिक) चरस और अफीम का धंधा करते हैं. धर्म की ये अफीम भारत का एक न एक दिन विनाश जरूर करेगी….याद रखना मेरी बात !

क्या बहुत ही जल्द भारत में वृहद जनसंहार हो सकता है ? नरसंहार शोधकर्ता डॉ. ग्रेगरी स्टैंटन ने अभी हालिया बयान में कहा था कि ‘भारत में नरसंहार की तैयारी चल रही है.’ डॉ. ग्रेगरी स्टैंटन नजदीकी समय में मुमकिन नरसंहारों के संकेतों के अध्ययन करने वाले दुनिया के प्रमुख अधिकारियों में से एक हैं और उन्होंने ‘जेनोसाइड वाच’ संस्था की स्थापना की है, जिसके अधीन ‘नरसंहार ढांचे के दस चरणों’ को राष्ट्रों के वैश्विक अध्ययन के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

जेनोसाइड वाच वेबसाइट पर ‘नरसंहार के दस चरणों’ की जो सूची दी गई है, वो ये है –

  1. वर्गीकरण,
  2. प्रतीकीकरण,
  3. भेदभाव,
  4. अमानवीकरण,
  5. संगठन,
  6. ध्रुवीकरण,
  7. तैयारी,
  8. उत्पीड़न,
  9. तबाही, और
  10. इनकार…

उन्होंने अभी भारत को 5वें नंबर पर रखा है, मगर मेरे हिसाब से भारत में कमोबेश रूप से 6-7-8 स्टेज भी पार हो चुकी है. पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी यथावत, पांचवीं, छठीं, सातवीं और आठवीं स्टेज मनु के जमाने में चल रही है।

डॉ. ग्रेगरी के अनुसार भले ही भारत अब पांचवी स्टेज पर आ चुका है, जो संगठनात्मक है अर्थात धार्मिक समुदायों के सांप्रदायिक संगठन बन चुके हैं लेकिन मेरे हिसाब से संगठन का काम तो भारत में पिछली सदी में ही शुरू हो चुका था और 70 से लेकर 90 तक ध्रुवीकरण का कार्य प्रसार पर था. उसके बाद के दशकों में इन धार्मिक संगठनों ने जबरदस्त तैयारी भी की और उसके बाद (अब तक) 3 बार जनसंहार करने की कोशिश भी की गयी लेकिन तीनों बार सिर्फ कुछ हद तक कामयाबी ही मिली और बड़ा जनसंहार होने से बच गया.

मुझे लगता है अब तो भारत तबाही वाली स्टेज पर है. भारत अंदर ही अंदर जवालामुखी की तरह सांप्रदायिक आग उगल रहा है. जिस दिन ये ज्वालामुखी फटेगा, भयंकर तबाही होगी और शायद इतना बड़ा नरसंहार होगा जितना शायद पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में भी नहीं हुआ था !

इसीलिये तो मैं हमेशा इन धार्मिक कटटरपंथियों के खिलाफ लिखता हूंं ताकि लोग सच को समझे और आने वाले कल के जनसंहार से बचा जा सके. लेकिन गोदी मीडिया ऐसा भ्रम फैला रहा है कि लोग गफलत में सच और झूठ में अंतर तक नहीं कर पा रहे है ! ये टीवी चैनल के बकैत जोर जोर से चिल्ला कर आसमान सर पर उठाकर जो बहुमत की बकैती करते हैं, उसी का परिणाम है कि नेता अपने आपको शहंशाह समझने लगे हैं.

जब तक इस भ्रष्ट भारतीय मीडिया के मुंह में कपडा नहीं ठूंंसा जाता, देश की औसत बुद्धि जनता को ये यूं ही गुमराह करते रहेंगे. एंकरों का यूं गला फाड़कर चिल्लाना और मोदी विरोध में बोलने वालों को हड़काकर चुप करवाना, स्पष्ट बतलाता है कि ये मोदी के टॉमी है जबकि पत्रकारों और एंकरों का नैतिक दायित्व है कि वे जनता को सिर्फ सच से अवगत करवाये लेकिन ये एंकर तो शो में जज बनकर बैठते हैं तो सच कहे कौन ? मेरे सामने बहुमत का राग मत अलाापियेगा क्योंकि मैंने छह साल पहले ही लिख दिया था कि जनता को मिलेगा ‘बाबाजी का ठुल्लु.’

हमेशा याद रखिये – ‘बहुमत का मतलब ये नहीं होता कि अल्पमत ग़लत है.’ एक ज़माने में जब पूरी दुनिया पृथ्वी को चपटा कह रही थी, तो गोल बताने वाला आदमी अल्पमत में ही नहीं बल्कि अकेला था. आज हम जानते हैं कि वो अकेला आदमी ही सही था और बहुमत गलत.

मुझे ये समझ नहीं आता कि आम जनता सब कुछ जानते/समझते भी खमोश क्यों है ? शायद ड़रती है क्योंकि सदन में ज्यादातर अपराधी ही बैठे हैं और शरीफ आदमी अपराधियों से डरता ही है. लेकिन याद रखियेगा कि ‘यदि हत्यारे डाकू बलात्कारी अपराधी पापी प्रत्याशी लोकतंत्र के मन्दिर में ‘पुरोहित’ (सांसद या विधायक ) बनेंगे तो उस मन्दिर (संसद भवन) का खण्डहर होना तय है. और मंदिर के खंडहर (संसद भवन) में पूजा पाठ (संविधान) नहीं होता बल्कि नशेड़ी अपराधियों का जमावड़ा ही होता है, जहांं वे (धार्मिक) चरस और अफीम का धंधा करते हैं. और धर्म की ये अफीम भारत का एक न एक दिन विनाश जरूर करेगी….याद रखना मेरी बात !

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

इस डरावने माहौल मेंअधिकांश मीडिया अपनी यथार्थवादी भूमिका में लौटता दिखा

Next Post

गधगणना और उसके बाद

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

गधगणना और उसके बाद

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मणिपुर की उन औरतों के लिए बोलिए…

July 22, 2023

बादशाह अकबर और हीर सूरी कथा

March 12, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.