Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

लाल किले की प्राचीर से धड़ाधड़ उगलता झूठ – 2

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 16, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

लाल किले की प्राचीर से धड़ाधड़ उगलता झूठ - 2

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ

लाल किले से वो झूठा आदमी धड़ाधड़-धड़ाधड़ झूठ पर झूठ बोले जा रहा था और उसके झूठों में से एक अर्थ-व्यवस्था वाले झूठ के बारे में हमने बता दिया था. आज उसके दूसरे झूठ गांवों के विकास और उनमें बिजली-पानी पहुंचाने के झूठ का पर्दाफाश करूंंगा. यथा –

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

वो आदमी कल लाल किले की प्राचीर से बोल रहा था कि ’70 साल में जो नहीं हुआ, वो हमने पांच साल में किया और हमारे राज में हर गांव में बिजली-पानी पहुंंच रही है.’ मगर वो झूठा आदमी ये नहीं जानता कि उसके झूठे लच्छेदार भाषण सिर्फ भक्तों को खुश कर सकते हैं, हम जैसे सत्य अन्वेषकों को नहीं.

जब नेहरू जी को देश तब देश के साढ़े छह लाख गांंवों में से किसी एक भी गांव में बिजली नहीं थी (ध्यान से पढ़ लीजिये, किसी एक भी गांंव में बिजली नहीं थी). गांवों की बात तो जाने दीजिये, शहरों में भी बिजली नहीं थी. सिर्फ इक्का-दुक्का बिजली सयंत्र थे, पुरे देश में. और उस झूठे आदमी ने स्वयं ही अपने झूठे भाषणों में बताया कि जब उसे देश मिला, तब देश के 18,000 गांवों में बिजली नहीं थी, अर्थात 6,32,000 गांव ही नहीं बल्कि देश का हरेक शहर उस झूठे आदमी को विरासत में जगमगाता मिला. और इन सबको जगमग किया नेहरू के प्रयासों ने, और ये हुआ पिछले 70 सालो में. लेकिन वो झूठा आदमी जिसे जब देश मिला तो अपने पांच सालों के राज में उन 18,000 गांंवों को भी बिजली नहीं दे पाया और वे आज भी बिना बिजली के हैं.

ये तो हुई बिजली की बात. अब ये और जान लीजिये कि जब नेहरूजी को देश मिला, तब देश में पीने के पानी कोई सुचारु व्यवस्था नहीं थी (पुराने तालाब, बावडिया, कुंओं इत्यादि थे, मगर उन पर जमींदारों और राजाओं का अधिकार होता था, और गांवों से वे कई-कई किलोमीटर दूर होते थे. और गांव की स्त्रियांं घड़ों में पानी भर-भरकर सर पर लाद कर लाती थी. गांवों की छोड़ियें, शहरों में पीने का पानी ठीक से उपलब्ध नहीं होता था और पिछले 70 सालों में भारत के सभी शहरों के साथ लगभग हर गांव में पीने के पानी की सुचारु व्यवस्था नेहरू विजन ने लगातार की, और आज लगभग हर जगह पानी की सुचारु व्यवस्था है, और जहांं पर ये व्यवस्था नहीं पहुंंच पायी, वहां वो झूठा आदमी एक बून्द पानी नहीं पहुंचा पाया पिछले पांच सालों में. बिजली-पानी तो छोड़िये, निकासी तक की व्यवस्था नहीं थी (आज तो वो झूठा आदमी निर्मल भारत का नाम बदल कर स्वच्छ भारत बताता घूमता है और उसे अपनी उपलब्धि बताता है, और हर जगह शौचालय की बात करता है, जबकि जब नेहरूजी को देश मिला, तब देश में सीवर तो छोड़िये ठीक से निकासी की व्यवस्था भी नहीं थी. पूरा देश खोदकर पाइप बिछाने का काम नेहरू विजन ने किया और ये सब हुआ पिछले 70 सालों में (मंच पर खडे होकर फेंकने से कोई काम नहीं होता, बल्कि नेहरू की मजबूत इच्छाशक्ति और 70 सालों के सतत प्रयासों से ये संभव हुआ), और वो झूठा आदमी जिसे सब कुछ किया कराया मिला, वो शौचालय-शौचालय चिल्लाता है, मगर भूल जाता है कि अगर नेहरू ने सीवरेज और निकासी की व्यवस्था शुरू न होती और पिछले 70 सालों में पुरे देश में मजबूत निकासी व्यवस्था न बनी होती, तो उन शौचालयों का मल कहांं डिस्पोज होता ?

मैं एम्स जैसे विश्वस्तरीय अस्पताल औऱ रिसर्च सेंटर या स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालय के साथ-साथ वैज्ञानिक शोध केंद्र, मिसाइल उपग्रह आदि पर किया गया अद्भुत काम इत्यादि का जिक्र तो करूंंगा ही नहीं, क्योंकि जब उस झूठे आदमी को देश मिला तो भारत सबसे कम लागत में सफल मंगलयान बनाने वाला और मंगल की धरती पर जाने वाला देश बन चुका था. चंद्र की तो बात ही जाने दीजिये, मंगल तक पहुंचना तो छोड़िये, उस तक पहुंंचने की सोचने तक की हिमाकत तक आज भी कई देश नहीं करते, जबकि पिछले 70 सालों के सतत प्रयासों से भारत मंगल पर पहुंंचा और आज भी शोध चालू है !

Read Also –

लाल किले की प्राचीर से धड़ाधड़ उगलता झूठ – 1
नेहरु के बनाये कश्मीर को भाजपा ने आग के हवाले कर दिया
मोदी चला भगवान बनने !

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

लाल किले की प्राचीर से धड़ाधड़ उगलता झूठ – 1

Next Post

सरकार के हाईटेक दमन का हाईटेक जनप्रतिरोध

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

सरकार के हाईटेक दमन का हाईटेक जनप्रतिरोध

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय: दिल्ली सरकार बनाम केन्द्र सरकार

प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय: दिल्ली सरकार बनाम केन्द्र सरकार

May 17, 2017

आतंक की पुलिसिया पाठशाला : सैफुल्ला बनाम दूबे

July 5, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.