Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मोदी का नया जुमला – ‘शहीदों का योगदान अमर है’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 31, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कृष्णकांत

इंडिया गेट पर 1971 के शहीदों की याद में जल रही ‘अमर जवान ज्योति’ को बुझाने के बाद आज नरेंद्र मोदी जी ज्ञान बांच रहे हैं कि ‘शहीदों का योगदान अमर है.’ अगर उन्हें शहीदों की सच में कद्र है तो शहीदों के सम्मान में 50 साल से जल रही अमर जवान ज्योति क्यों बुझाई गई ?

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

कह रहे हैं कि वॉर मेमोरियल म्युजियम में एक नई ज्योति जलाई गई है इसलिए पुरानी का उसी में विलय कर दिया गया. दो ज्योतियों का विलय कैसे संभव है ? क्या किसी की समाधि को शिफ्ट किया जा सकता है ? क्या किसी के प्रति आस्था और सम्मान का विलय किया जा सकता है ? क्या शहीदों के प्रति सम्मान की भावना कोई राजनीतिक पार्टी है, जिसका विलय करा दो ?

संघी और भाजपाई मिलकर महात्मा गांधी के कद और सम्मान के साथ हमेशा गोडसे का विलय कराने की कोशिश करते रहे हैं. आज भी कर रहे हैं लेकिन कर नहीं पाए. उन्हें समझना चाहिए कि आस्थाओं का और सम्मान का विलय नहीं होता.

विलय किया क्यों गया ? कारण क्या था ? कह रहे हैं कि दो ज्योति का रखरखाव संभव नहीं था. क्या 50 साल से जल रही एक ज्योति के रखरखाव का खर्च मोदी के दसलखा सूट से भी ज्यादा था ? भारत सरकार के खजाने से प्रधानमंत्री अपने लिए आठ आठ हजार करोड़ के दो विमान खरीद सकते हैं, 20 हजार करोड़ का हवामहल बनवा सकते हैं, 12 करोड़ की कार खरीद सकते हैं, जासूसी के लिए इजराइल से हथियार खरीद सकते हैं, शहीदों के लिए एक ज्योति का खर्च नहीं उठा सकते ? भारत इतना गरीब कब से हो गया कि शहीदों के लिए जल रहे एक दिये का खर्च न उठा सके ?

नई ज्योति जलाने का तुक क्या था ? युद्ध 1971 में हुआ था, सैनिकों के सम्मान में ज्योति उसके बाद जलाई गई थी ? उसे क्यों छेड़ा गया ? शहीदों का अपमान क्यों किया गया ? क्योंकि उसका उद्घाटन इंदिरा गांधी ने किया था ? इनको करना धरना कुछ नहीं, बस देश तबाह करना है और नेहरू और इंदिरा की भद्दी नकल करनी है.

आरएसएस का नया तरीका है कि जिसे मिटाना होता है, ये उसी के नाम का नारा लगाते हैं. सुबह नरेंद्र मोदी गांधी को फूल चढ़ाकर आए हैं और अब उनके अंडाणु ट्विटर पर हत्यारे की जय बोल रहे हैं और ट्रेंड करा रहे हैं. पत्रकारों और आम लोगों के ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कराने वाली सरकार इस तरह नफरत भरे ट्रेंड क्यों नहीं रुकवाती है ? क्योंकि इन्हीं की शह पर यह हो रहा है.

इनका मकसद है पूरे भारत की ऐतिहासिक विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को मिटाना, धर्मनिरपेक्ष और बहुलता से परिपूर्ण भारत को नष्ट करके एक घृणास्पद विचारधारा की स्थापना करना. वही विचारधारा जो हिटलर के नाजीवाद से प्रेरित है, जो घृणा पर आधारित है, सावरकर और गोलवलकर के अनुसार जिसमें यह माना गया है कि मुसलमानों, इसाइयों और कम्युनिस्टों की भारत में कोई जगह नहीं है. ये लोग रहना चाहें तो हिंदुओं की संस्कृति अपना कर दोयम दर्जे के नागरिक बनकर रह सकते हैं.

इसी विचार को लागू करने के लिए धर्म पर आधारित सीएए और एनआरसी नाम के घृणास्पद कानून बनाने की कोशिश की गई. मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि सांप्रदायिकता धर्म और सं​स्कृति की खाल ओढ़कर आती है. अपने असली रूप में सामने आने में उसे लज्जा आती है. आरएसएस और भाजपा ने धर्म, संस्कृति के साथ राष्ट्रवाद की खाल ओढ़ रखी है.

स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को बताया था कि हमारी धरती पर सभी धर्मों के लिए जगह है. वसुधैव कुटुंबकम हमारा मूलमंत्र है. महात्मा गांधी का भारत पूरी दुनिया में अपनी बहुलता और विविधता के लिए सराहा गया. आज उसी खूबी पर चोट की जा रही है. भारत की संसदीय परंपराओं से लेकर भारत के इतिहास पर और भारत के शहीदों पर हमला बोला जा रहा है.

संघ की विचारधारा ने यह तरीका अपनाया है कि जिसे खत्म करना हो, पहले उसके आगे सिर झुकाओ. हत्यारा गोडसे जब गांधी के पास पहुंचा तो विरोधी बनकर नहीं पहुंचा था. वह आम आदमी की तरह गया, गांधी के पैर छुए और धोखे से गोली मारी.

नरेंद्र मोदी अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने जाते रहे हैं. उन्हें यह नहीं लगा कि जिस ज्योति के सामने देश के प्रधानमंत्री, सेनाध्यक्ष जाकर सिर झुकाते हों, उसे खंडित नहीं करना चाहिए, उन्होंने कर दिया. उनका सिर जहां-जहां झुकता है, आप कैसे विश्वास करेंगे कि उनकी श्रद्धा सच्ची है ? यह बहुत​ दुखद और आहत करने वाला है.

यह आपको तय करना है कि आप इस दुष्कृत्य के साथ हैं या इसके खिलाफ हैं ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

संघियों का आत्मनिर्भर भारत यानी शिक्षामुक्त, रोजगारमुक्त, अस्पतालमुक्त भारत

Next Post

राकेश टिकैत का टोक देना और ऐंकर का भरभरा जाना

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

राकेश टिकैत का टोक देना और ऐंकर का भरभरा जाना

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

गरीब आदिवासियों को नक्सली के नाम पर हत्या करती बेशर्म सरकार और पुलिस

December 2, 2019

नफरत आज हमारा राष्ट्रधर्म है

December 29, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.