Tuesday, June 9, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

नवनीत राणा : जनता को गड्ढे में गिराने वाले मुद्दे उठा कर अब जनता में लोकप्रिय बन सकते हैं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 10, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना

उन्होंने कहा, ‘चालीसा पढ़ना अपराध है तो मुझे 14 साल जेल में रहना मंजूर.’ अभी कल-परसों ही वे हनुमान चालीसा विवाद में 12 दिन की जेल काट कर लौटी हैं. जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था तो मीडिया के कैमरों के सामने अपनी मुट्ठियां भींच कर वे बलिदानी तेवर दिखा रही थीं. लग रहा था कि महाराष्ट्र में आत्महत्या को मजबूर बेबस गरीब किसानों के हक की लड़ाई में वे जेल जा रही हैं। बगल में उनके विधायक पतिदेव भी थे जो दोनों हाथों को उठा कर न जाने क्या कहना, क्या दिखाना चाह रहे थे.

हनुमान जी के प्रति उनकी भक्ति का प्रदर्शन अन्य भक्तों को आह्लादित कर रहा था और तमाम हिंदी न्यूज चैनल दिन भर उन्हें ही दिखाते रहे. उन्होंने संकल्प भी जोरदार लिया था कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर के सामने वे हनुमान चालीसा का पाठ करेंगी. हालांकि, इसमें गहरे सन्देह हैं कि इससे पहले उन्होंने अपने जीवन में कभी हनुमान चालीसा पढ़ी भी होगी. इसकी आठ दस पंक्तियां भी उन्हें याद हो, इसका तो सवाल ही नहीं उठता. लेकिन, उन्हें एक साधारण एमपी से अब बड़ी नेत्री बनना है और इसके लिये धर्म की ध्वजा थाम लेना सबसे शार्ट कट है. भाजपा ने देश की राजनीतिक संस्कृति बदल दी है. अब आप जनता को गड्ढे में गिराने वाले मुद्दे उठा कर जनता में लोकप्रिय बन सकते हैं.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

बीते कुछ दिनों में टीवी न्यूज चैनलों ने उन्हें देश के घर-घर में जाना-पहचाना नाम बना दिया है. इसके पहले हिंदी पट्टी में राजनीति के अच्छे खासे बहसबाज भी उन्हें शायद ही जानते हों. जब मीडिया की किसी हल्की-फुल्की रिपोर्ट में ‘खूबसूरत महिला सांसदों’ की चर्चा होती थी तो उनका नाम भी आता था…उनकी खूबसूरत फोटो के साथ. लेकिन, अब उन्हें सब जानते हैं. अब वे सीधे उद्धव ठाकरे को चुनाव में सामना करने की चुनौती दे रही हैं. निर्दलीय के रूप में उन्होंने लोकसभा का चुनाव जीता था, अपने अप्रत्यक्ष राजनीतिक सहयोगियों के बल पर. अब वे महाराष्ट्र ही नहीं, देश भर में भाजपा की स्टार प्रचारक हो सकती हैं.

कितना मनोहारी (हाहाकारी) दृश्य होगा, जब मॉडल और अभिनेत्री रह चुकी कोई महिला धर्म की ध्वजा थाम कर देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने के राजनीतिक अभियान पर निकलेगी ! पहले से ही अवसन्न किये जा चुके बेरोजगार नौजवानों के मस्तिष्क में ढेर सारा कचरा भरेगी और…जब सभा स्थल पर हेलीकॉप्टर से उतर कर वह मंच की ओर बढ़ेगी तो ‘नवनीत तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ के तुमुल नाद से इलाका गुंजायमान हो उठेगा.

वह संघर्ष करेगी कि हनुमान जी को उनका हक मिलना ही चाहिये. जब मुल्ले-मौलवी लाउडस्पीकर पर चिल्ला-चिल्ला कर अल्लाह को पुकार सकते हैं तो हमारे हनुमान जी कम हैं क्या ! हम उन्हें डीजे पर पुकारेंगे और उनके मंदिर के सामने नहीं, किसी मस्जिद के सामने पुकारेंगे. अनजाने में ही वे मंदिर-मस्जिद और अल्लाह-हनुमान जी के एक ही होने का दृश्य प्रस्तुत करेंगी. हालांकि, उनकी पूरी कोशिश होगी कि अल्लाह के बंदों और हनुमान जी के भक्तों के बीच तनाव बढ़े, झगड़े-फसाद हों तो वोटों की जोरदार फसल कटे. उन्हें स्टार प्रचारक बनाना, हेलीकॉप्टर पर घुमाना पार्टी के लिये नेमत साबित हो.

संभव है, उनकी सभाओं में हनुमान चालीसा का समवेत गान भी हो. अगर ऐसा होगा तो निस्संदेह यह हिट आइडिया होगा. धंसे पेटों और सीने पर उभरी हड्डियों वाले कुपोषित, गरीब, बेरोजगार नौजवान भी उनके स्वर में स्वर मिलाएंगे. अद्भुत समां होगा. जिन नौजवानों को रोटी, रोजगार, शिक्षा और चिकित्सा के मूलभूत अधिकारों के लिये विद्रोह गान करना था, सत्ता की नीतिगत विफलताओं से बढ़ती ही जा रही मंहगाई का विरोध करना था, उन्हें भजन और चालीसा गाते देखना-सुनना ऐतिहासिक अनुभव होगा !

छद्म रचती राजनीति छद्म राजनीतिक प्रतिमान भी गढ़ती है, छद्म नायक-नायिकाओं को भी गढ़ती है. भूख और बीमारियों से लड़ रहे लोगों को, बेरोजगारी की ग्लानि में डूबे नौजवानों को बरगलाने के लिये, उन्हें अपना राजनीतिक संसाधन बनाने के लिये ऐसे छद्म प्रतिमानों को गढ़ते रहना बेहद जरूरी है. नवनीत राणा नाम की अल्पज्ञात सांसद और राजनीतिक नेत्री अब एक विख्यात नाम है. वह राजनीति के छद्म से उपजी एक प्रायोजित प्रतिमा है. किसी संसदीय क्षेत्र की संकुचित सीमाओं से निकल कर वह अब राष्ट्रीय फलक पर है. जनविरोधी मीडिया किस तरह ऐसे भ्रामक प्रतिमान गढ़ता है, वह प्रतीक है इसकी.

Read Also –

नवनीत राणा और उनके पति लगातार भद्द पिटवा रहे हैं
ब्राह्मणों से ज्यादा खतरनाक ब्राह्मणवादी शुद्र है
लड़की जासूसी कांड : मोदी के चरित्रहीनता की मिशाल 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

स्वर्ग का रास्ता

Next Post

कमजोर होते रुपये पर लोगों को बेवकूफ बनाते अर्थशास्त्री बने धर्मशास्त्री

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

कमजोर होते रुपये पर लोगों को बेवकूफ बनाते अर्थशास्त्री बने धर्मशास्त्री

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

नवदेवियांं या नवअप्सराएंं ..?

October 18, 2020

छत्तीसगढ़ में सिक्योरिटी फोर्सज द्वारा मारे गये 22 इंसानी लाशें किसकी है ?

May 11, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.