Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

14 अगस्त को बंटवारा नहीं, एकीकरण हो रहा था

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 14, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
14 अगस्त को बंटवारा नहीं, एकीकरण हो रहा था
14 अगस्त को बंटवारा नहीं, एकीकरण हो रहा था

14 अगस्त, 1947 बंटवारे का दिन है…आम सोच है कि हिंदू और मुसलमानों ने इसे दो हिस्से मे बांट लिया. क्या ऐसा सोचना ठीक है ?? यह ओवरसिंप्लीफिकेशन आपको एक कम्यूनल ऐंगल देता है, किसी पार्टी, किसी खास विचारधारा के लिए यह सूट करता है. पर गंभीरता से देखेंगे, तो आपको कुछ अलग रंग दिखाई देंगे.

इस नक्शे से ही शुरूआत करें, जो उस दिन भारत की राजनीतिक अवस्था को बताता है. उस दिन कोई 600 से ज्यादा पॉलिटिकल यूनिट्स थी. आप उन्हें रजवाडे कहते हैं. वे एक दूसरे से स्वतंत्र ताकतें थी. रक्षा, विदेश, संचार के मामले वे ब्रिटिश को सम्हालने देते थे, मगर तमाम प्रेक्टिकल रीजन मे ये स्वतंत्र देश की तरह ही थे.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

तो इतने सारे देशों का 14 अगस्त को बंटवारा नहीं, एकीकरण हो रहा था. ब्रिटिश द्वारा सीधे इलाके भी इसी नव-एकीकरण का हिस्सा थे. दिक्कत यह थी, कि दो संस्कृतियां एक साथ रहने को तैयार नहीं थी. जो चुनावी नारें आप आज सुनते हैं, जो व्हाट्सप आप आज पढते हैं, उनका स्रोत उसी दौर से है. वह सोच, जो मोहम्मद घोरी और बाबर की संतानों से एक हजार साल पुराना बदला भंजाना चाहता है.

उन्हें सेकेण्ड क्लास सिटिजन बनाना चाहता है. सत्य यह कि मुठ्ठी भर लोग ही तुर्क और अरब थे, शेष इसी धरती के निवासी थे. मगर धर्म बदल लिया था, तो हमारे बीच के कुछ लोग उन्हें इस भूमि पर जगह देने को तैयार नहीं थे.

दूसरी ओर भी ऐसे लोग थे, जिन्हे फ्यूडल दौर की राजनीतिक सुप्रीमेसी का हैंगओवर था. यह वो मुस्लिम एलीट था, जिसे लगता था कि एकीकृत देश में उनकी राजनीतिक भूमिका गौण हो जाएगी. वे गलत भी नहीं थे. आज 80 बरस बाद, संसद और विधानसभाओं मे उनकी संख्या उन्हें सही साबित करती है.

तो उन्हें अपनी अवाज, अपनी भागीदारी चाहिए थी. इस सोशोपॉलिटिकल खाई के बीच, भारतीय उपमहाद्वीप के भू-राजनीतिक इलाकों का एकीकरण दो ढेरियों मे हुआ. तो बंटवारा शब्द, जो किसी एक चीज के हिस्से करता है, उस पर मेरी असहमति है. 14 अगस्त दरअसल 600 टुकडों का एकीकरण है. मगर अफसोस, एक नहीं…दो खेमों में एकीकरण है.

जब आप यह समझ लेगें, तो यह भी स्पस्ट हो जाएगा कि जिम्मेदार कौन था. तब आपको तय करने में आसानी होगी, कि वे लोग, जो हिंदू मुसलमान को बराबर बताते हुए उन्हे एक होने की समझाइश देते थे, क्या वे दो देशों के जन्म के जिम्मेदार हैं या वे लोग दोषी हैं, जिन्होने कहा कि हिंदू और मुसलमान दो पृथक संस्कृति है, ये कभी साथ नहीं रह सकती..! यही टू नेशन थ्योरी है.

लेकिन यहीं न रूकिये. टू नेशन थ्योरी तो 30 साल से चल रही थी. जिन्ना द्वारा उसे उठाये 8 साल ही हुए थे. क्या नेहरू, जिन्ना या किसी भी भारतीय राजनीतिज्ञ, अथवा उसके दल में ये ताकत थी, कि वह बंटवारा करवा देता ??

कोई आंदोलन चलता है, बढता है, थकता है, खत्म होता है. गर्वमेन्ट ऑफ द डे, उसपर जो फैसला करती है, जो रूख लेती है .. इतिहास की धारा उससे बनती है. जैसे कश्मीर को विलग करने के लिए आतंकी तंजीमों मे खूब कोशिश की. नक्सली आंदोलन सन 64 से शुरू हुआ था, क्या हुआ ?? जीरो बटे सन्नाटा !!

तैलंगाना बना, झारखंड बना. तब बना जब गर्वमेण्ट आफ द डे ने बनाना चाहा. तो यह आंदोलन का नतीजा कम, सरकार का निर्णय ज्यादा था. छत्तीसगढ के लिए भला किसने आंदोलन किया ?? अभी कश्मीर को तोड़कर दो यूयिन टेरेटरी बना दिये गए, किसने आंदोलन किया ?? अब फारूख अब्दुल्ला, या महबूबा मुफ्ती को कश्मीर के विभाजन का दोषी बताना मूर्खता होगी. उतना ही मूर्खतापूर्ण है जिन्ना या नेहरू, या इवन सावरकर को भारत विभाजन का दोषी बताना.

ब्रिटिश सरकार इस मामले को 10 और साल खीेंच देती, जिन्ना, लियाकत, गांधी, सरदार सब स्वर्गवासी हो चुके होते. ब्रिटिश की मर्जी थी, उसके जियोपॉलिटिकल इंट्रेस्ट थे. उसने हमारी फॉल्ट लाइंस का फायदा उठाया, दो देश बनाए. आखिर पाकिस्तान के दो टृकड़े, शेख मुजीब ने नहीं, इंदिरा गांधी ने किये. उसकी मर्जी थी, भारत के जियोपॉलिटिकल इंट्रेस्ट थे. उसने दो देश बनाए.

मेरी निगाह मे 14 अगस्त यही बताता है कि राष्ट्र कोई अजर अमर चीज नहीं. इसकी उम्र, तत्समय प्रवृत पॉपुलर डेफिनेशन.. क्या बनाइ गई, उस पर निर्भर करता है. आप धर्म, भाषा, संस्कृति, खानपान को एक देश की परिभाषा में रखते हैं …??? या तमाम विविधताओं के बावजूद, जो इस धरती पर है … उसकी डिग्निटी, उसकी भागीदारी, उसके कल्चर, भाषा को सम्मान देते हुए सबमे एकता का भाव भरने का प्रयास करते हैं ??

फॉल्ट लाइंस को मेाहब्बत से भरते हैं. किसी निहित स्वार्थ को देश बांटने का कोई मौका नहीं देते हैं. यह गांधी की अवधारणा है, नेहरू का रास्ता है. तब उनकी जिन्होने न मानी, बंटवारे का दंश दिया. आज भी जो न मानेंगे, बंटवारें का ही दंश देंगे.

  • मनीष सिंह

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

शुभांगी

Next Post

उत्पीड़ित जातियों का उत्पीड़ित वर्ग ही क्रान्तिकारी आंदोलन का झंडा थाम सकता है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

उत्पीड़ित जातियों का उत्पीड़ित वर्ग ही क्रान्तिकारी आंदोलन का झंडा थाम सकता है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बेनीटो मुसोलिनी का अंत बताता है कि तानाशाहों का अंत कैसा हो सकता है !

September 7, 2025

यूक्रेन के हारे राष्ट्रपति अमेरिकी टट्टू वोलोदिमीर जेलेंस्की की रुस से ‘अपील’

March 1, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.