Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कीचड़ में अभी सिर्फ पांव धंसे हैं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 6, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कीचड़ में अभी सिर्फ पांव धंसे हैं

यह वाकया 1994 का है. सिंगापुर की यात्रा पर गये पी. वी. नरसिंहराव वहां के पीएम के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे. जिन लोगों की पैदाइश या यादाश्त 2014 के बाद की है, उनके लिए बता देना आवश्यक है, प्रेस कांफ्रेंस सामान्य परंपरा रही है, जो बताती है कि लोकतंत्र जिंदा है.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

तो प्रेस कांफ्रेंस चल रही थी और दुनिया भर के पत्रकार सवाल पूछ रहे थे. अचानक एक आदमी उठा और उसने अपना परिचय दिया- ‘मैं सिंगापुर की पाकिस्तानी एंबेसी का फर्स्ट सेक्रेटरी हूं और मेरा सवाल कश्मीर पर है.

नरसिंहराव ने पूरा सवाल ध्यान से सुना और जवाब दिया- ‘आप जो कुछ कह रहे हैं, वह तथ्यात्मक रूप से गलत है लेकिन इससे ज्यादा बड़ी बात ये है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की अपने तौर-तरीके और मर्यादा है. सरकार के स्तर पर पाकिस्तान से हमारी बातचीत होती रहती है. मुझे समझ में नहीं आया कि आप इस तरह कहां से टपक पड़े ?’

हॉल में जोरदार ठहाका लगा और सिंगापुर के पीएम ने कहा- ‘नेक्स्ट क्वेश्चन प्लीज एंड रिबेंबर आई डोंट वांट एनी पाकिस्तानी.’ पाकिस्तानी मीडिया ने उस राजनायिक को नेशनल हीरो बनाया लेकिन सड़क छाप हरकत के लिए पूरी दुनिया में पाकिस्तान की थू-थू हुई.

यह सब सुनकर जिन्हें बहुत आनंद आ रहा है, उन्हें यह जानकर और भी आनंद आएगा कि परिश्रम की पराकाष्ठा करके हमने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वो हैसियत हासिल कर ली है, जो पाकिस्तान की हुआ करती थी.

जिस अरब दुनिया में भारत को हमेशा सम्मान मिला। जिस अरब दुनिया ने पाकिस्तान पर भारत को हमेशा तरजीह दी। जिस अरब दुनिया से हमेशा दोस्ताना रिश्ता रहा हमारा।

वहाँ हमारे राजदूत को तलब किया गया, बहिष्कार की बातें की गईं, प्रधानमंत्री की अपमानजनक तस्वीरें लगाई गईँ।

ज़िम्मेदार कौन?

— Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک (@Ashok_Kashmir) June 5, 2022

गलती नूपुर की नही है !! ..थ्रेड जरूर पढिये

थ्रेड का शीर्षक देखकर चौकिये मत!! मैं नफरती नूपुर का बिलकुल भी बचाव करने नही आया हूँ मैं आपको को यह बताने आया हूँ आज भारत पूरे विश्व में जो शर्म झेल रहा है उसका असली अपराधी कौन है !! 1/n #NupurSharma #ShameOnBJP #घोरकलजुग #डाटावाणी pic.twitter.com/U2sLFBDEiK

— अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj (@grafidon) June 6, 2022

सुब्रमहण्यम स्वामी की उटपटांग बयानबाजी के बाद मालदीव ने भारतीय राजदूत को तलब किया था, यह घटना बहुत से लोगों को याद होगी. मालदीव वही देश है, जहां हुए तख्ता-पलट को भारत ने छह घंटे के भीतर खत्म किया था. अब आप मालदीव जाकर देखिये सड़क से वहां की संसद तक हर जगह भारत विरोधी बातें सुनने को मिलेंगी.

नेपाल लगातार आंखें दिखा रहा है. बांग्लादेश यह ज्ञान दे रहा है कि लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता का सम्मान किस तरह किया जाता है. ये बात हुई पड़ोसी देशों की. अब आते हैं, पूरी दुनिया पर क्योंकि डंका और ज़ोर से बज रहा है.

खाड़ी के देशों के साथ भारत के शुरू से अत्यंत मैत्रीपूर्ण संंबंध रहे हैं. इस देश के करोड़ों परिवार गल्फ से आनेवाले पैसे पर निर्भर हैं. इन देशों से कभी भारत विरोधी आवाज़ सुनने को नहीं मिली है.

बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के बाद जब पूरे दक्षिण एशिया में दंगे हो रहे थे, तब खाड़ी देशों ने वहां रहने वाले लाखों भारतीयों की जान-माल की हिफाज़त की थी और कहीं से भी एक घटना तक सुनने को नहीं मिली थी.

इन्हीं खाड़ी देशों में आज भारत सरकार की थू-थू हो रही है. कतर जैसे देश ने राजदूत को तलब किया है. कई और जगहों से विरोध प्रदर्शनों की ख़बरें हैं. आखिर ये सब क्यों हो रहा है ?

ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान यह मानता है कि एक के बाद एक करके चुनाव जीतते चले जाना ही असली काम है और इसके अलावा कुछ और करने की ज़रूरत नहीं है. सांप्रदायिक उग्रता के प्रसार से समाज का ध्रुवीकरण होगा तो चुनाव में फायदा होगा, लेकिन देश का क्या होगा ?

बीजेपी की सरकारें पहले भी आई थी. अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे- विदेश नीति और अर्थनीति पर यह देश हमेशा से एकजुट रहा है. वाजपेयी ये क्यों कहते थे ? वे जानते थे कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का जो एक स्वतंत्र व्यक्तित्व है, उसे बनाने में पुरखे राजनेताओं ने अथक श्रम लगाया है.

जिम्मेदार सरकारें जानती हैं कि एक सभ्य और लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की छवि अगर धूमिल होती है तो इसका असर अर्थव्यवस्था और दुनिया के हर कोने में रहने वाले करोड़ों आप्रावासी भारतीयों पर पड़ेगा. लेकिन क्या इन बातों की कोई चिंता है आज की भारत सरकार को ?

बीजेपी के नये-नवेले पोस्टर ब्वाय तेजस्वी सूर्या ने कुछ साल पहले इस्लामिक देशों की महिलाओं के यौन जीवन से संबंधित एक बेहद अभद्र टिप्पणी की थी. इसे लेकर ज़बरदस्त नाराज़गी देखने को मिली थी.

पैगंबर मुहम्मद के बारे में बीजेपी के प्रवक्ताओं की ताजा बयानबाजी का नतीजा यह है कि भारत के पीएम की तस्वीर को खाड़ी देशों में जूतों का हार पहनाया जा रहा है. यह भी सत्तर साल में पहली बार हुआ है. ठीक है कि बीजेपी ने दोनों प्रवक्ताओं को निकाल दिया लेकिन पकड़े जाने पर पपलुओं को पहचानने से इनकार करना तो संघ की पुरानी परंपरा है. क्या बीजेपी और सरकार की नीति में कोई आमूल बदलाव आएगा ?

आठ साल में यह बात पूरी तरह और बारंबार साबित हो गई है कि गवर्नेंस के नाम पर महाशून्य है. कुछ आता-जाता नहीं है. अगर आता होता तो कॉरपोरेट मीडिया उन मुद्दों पर बात करता, रात-दिन हिंदू मुसलमान नहीं करता. बीजेपी जिस दिन सांप्रादायिकता का रास्ता छोड़ेगी उसी दिन समाप्त हो जाएगी.

राजनीतिक फायदे के लिए वह किसी भी हद तक जाएगी. कश्मीरी पंडितों से लेकर दुनिया भर में रहने वाले भारतीयों का इस्तेमाल करेगी और नतीजा जो होगा उसकी सिर्फ कल्पना की जा सकती है. दलदल में अभी सिर्फ पांव धंसे हैं, निकलने का कोई रास्ता नहीं है, और पूरे शरीर का धंसना अवश्यंभावी है.

  • राकेश कायस्थ

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

एंटायर सत्यवादी : वन एंड ओनली सत्यवादी

Next Post

वे पांच थे

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

वे पांच थे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘भारत में वसंत का वज़नाद’ : माओ त्से-तुंग नेतृत्वाधीन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी के मुखपत्र पीपुल्स डेली (5 जुलाई, 1967)

November 12, 2024

पुलिस और न्यायिक गिरोह की क्रूरता के भेंट चढ़ी एक औरत की मां बनने की जिद !

December 20, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.