Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘नाटु-नाटु’ को ऑस्कर : लोहे के पंजे मख़मल के दस्तानों में ही छुपे रहते हैं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 14, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'नाटु-नाटु' को ऑस्कर : लोहे के पंजे मख़मल के दस्तानों में ही छुपे रहते हैं
‘नाटु-नाटु’ को ऑस्कर : लोहे के पंजे मख़मल के दस्तानों में ही छुपे रहते हैं
Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी

अमरीकी साम्राज्यवाद को चीन के विरूद्ध भारत को खड़ा करने के लिए ‘नाटु नाटु’ जैसे थर्ड क्लास गाने को ऑस्कर देने की ज़रूरत है. मूर्खों को बाद में समझ आएगा, अभी नाचो. ज़िंदगी में जब भी प्रशंसा मिले सबसे पहले यह देखिए कि कौन कर रहा है और क्यों कर रहा है. बिना निहित स्वार्थ की पहचान किए आप बहक जाएंगे.

दूसरी ज़रूरी बात है आत्म विश्लेषण. अगर मेरी किसी घटिया कृति पर बहुत वाह वाही मिलती है तो मैं उसे मिटा देता हूं. हाल में ही रेत समाधि जैसे औसत से नीचे दर्जे की किताब को भी ब्रुकर पुरस्कार मिल गया. ये घटनाएं मुझे उन दिनों की याद दिलातीं हैं जब भारत के नए बाज़ार में कॉस्मेटिक बेचने के लिए सुस्मिता सेन को ब्रह्मांड सुंदरी के ख़िताब से नवाज़ा गया.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

वह नब्बे के दशक का दौर था. आगे की कहानी आपको मालूम है. छोटे बड़े शहर की गलियों में कुकुरमुत्ते की तरह ब्यूटी पार्लर उग आए. हर दूसरी भारतीय लड़की खुद को कुरुप मानते हुए वहां जाने लगीं. यहां तक कि सुंदरता के पैमाने भी बदल गए. उबटन और मुल्तानी मिट्टी से चमकते हुए, अच्छी साड़ी में लिपटी वधू अब किसी को पसंद नहीं, सबको फेशियल, आई ब्रो, पैडिक्योर, मैनिक्योर, वैक्सिंग की हुई मोम की गुड़िया पसंद है.

हम भूल गए कि बाज़ार पहले आपकी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए साधन उपलब्ध कराता है और जता देता है कि आप एक बहुत ही घटिया ज़िंदगी जी रहे हैं. आपको लगता है कि सरकारी स्कूल और अस्पताल बेकार हैं और प्राईवेट बेहतर हैं. नतीजा यह होता है कि आप सरकार पर बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार के लिए दवाब बनाना छोड़ देते हैं और धीरे-धीरे कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को आपकी सहमति से ही फ़ासिस्ट लोगों द्वारा ख़त्म किया जाता है.

ठीक इसी तरह से प्राईवेट क्षेत्र के कुछेक उच्च सैलरी पाने वाले लोगों को प्रचारित कर आपको बताया जाता है कि कैसे निजी क्षेत्र सरकारी क्षेत्र से बेहतर सुख सुविधाएं देता है. आपको ये सोचने की फ़ुर्सत नहीं है कि इतने बड़े देश और इतनी बड़ी जनसंख्या को रोज़गार देने के लिए निजी क्षेत्र के पास कितनी बड़ी पूंजी और संसाधन हैं.

आप ये भी नहीं समझते हैं कि सैलरी नौकरी का एक हिस्सा है, सामाजिक सुरक्षा, मान सम्मान, देश की प्रगति से सीधे तौर पर जुड़ने का जो मौक़ा एक VLW या ब्लॉक कर्मचारी के पास है, वह किसी सत्य नाडेला के पास भी नहीं है.

नतीजतन, आप अपने बच्चों को कॉरपोरेट ग़ुलाम बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और वे पैसों से भरपूर एक नाकामयाब ज़िंदगी जीते रहते हैं. इस तरह से आप शोषण और युद्ध आधारित पूंजीवादी व्यवस्था (वास्तव में अर्द्ध सामंती-अर्द्ध औपनिवेशिक व्यवस्था- सं.) के कल्पतरु की जड़ों में अपने खून को पानी समझ कर सींचते रहते हैं.

आज की परिस्थितियों में मैं देश की राजनीतिक व्यवस्था पर मध्यम वर्ग की चुप्पी के बारे बहुत कुछ सुनता रहता हूं. यह मध्यम वर्ग कौन है और क्या है इसका राजनीतिक, सामाजिक चरित्र ? यह वही वर्ग है जिसकी आधी आबादी ब्यूटी पार्लर के आसरे है खूबसूरत दिखने के लिए और बाक़ी महानगरों में एक फ़्लैट ख़रीदने को अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मान कर सारे ग़लत सही काम निर्विकार भाव से करती है.

अब एक नया चाल चला गया है. हमारे हज़ारों साल पुराने शास्त्रीय संगीत पर कोई भी गीत उनको ऑरिजिनल नहीं लगता, लेकिन एक सी ग्रेड फ़िल्म की डी ग्रेड गाने को पुरस्कार मिलता है. वे जानते हैं कि राष्ट्रवाद के इस घिनौने दौर में अधिकांश भारतीयों के दिमाग़ को यह कितना सुकून पहुंचाएगा और गधों को नाचते देखना मज़ेदार तो होता ही है.

समाज और देश के पतन के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार विचारों का पतन होता है. हो सके तो इसे बचा लीजिए. चलते चलते बता दूं कि हाथी पर बनी डॉक्युमेंटरी को मिले पुरस्कार के लिए उनके निर्माता वाक़ई बधाई के पात्र हैं. आपको ये विरोधाभास लग रहा होगा लेकिन लोहे के पंजे मख़मल के दस्तानों में ही छुपे रहते हैं.

Read Also-

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

‘ये क्या जगह है दोस्तों’ : एक युद्धरत संस्कृतिकर्मी की पुकार…

Next Post

महान क्रांतिकारी समाजवादी दार्शनिक और चिंतक कार्ल मार्क्स

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

महान क्रांतिकारी समाजवादी दार्शनिक और चिंतक कार्ल मार्क्स

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

किसान आन्दोलन का माओवादी कनेक्शन ?

December 17, 2020

है तो है

August 27, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.